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MeitY Directs Meta: Roadmap for Deepfake & Propaganda Control


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नई दिल्ली12 मिनट पहले

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सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को अपने एल्गोरिदम में जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से एक डिटेल्ड कम्प्लायंस रोडमैप भी मांगा है।

इस रोडमैप में कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से प्रोपेगैंडा, डीपफेक और अवैध कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है।

यह निर्देश IT मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों और मेटा के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दिए गए। बैठक में मेटा की टेक्निकल टीम ने नुकसानदेह ऑनलाइन कंटेंट से निपटने के लिए अपने मौजूदा सिस्टम्स और जारी प्रयासों पर एक प्रेजेंटेशन भी पेश किया।

सरकार के निर्देशों की 3 प्रमुख बातें

  • एल्गोरिदम में बदलाव: सरकार ने मेटा को अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में ऐसे बदलाव करने को कहा है, जिससे प्रोपेगैंडा, डीपफेक, मॉर्फ्ड इमेज और किसी भी तरह के हेरफेर किए गए कंटेंट की रीच को सीमित किया जा सके।
  • डेटा लोकलाइजेशन: कंपनी को भारत के डेटा लोकलाइजेशन नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
  • कंटेंट तुरंत हटाना: अधिकृत सरकारी एजेंसियों द्वारा फ्लैग किए गए आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की प्रोसेस को तेज करने के लिए कहा गया है।

मेटा को सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम करना होगा

केंद्र सरकार ने मेटा से कहा है कि वह भारत सरकार के सभी विभागों की क्विक रिस्पॉन्स टीम्स (QRTs) के साथ नजदीकी तालमेल स्थापित करें और उन्हें मिलकर काम करना होगा।

इस कदम का मकसद डीपफेक वीडियो, एडिटेड तस्वीरों और भ्रामक कंटेंट की रियल-टाइम में तेजी से पहचान करना और उन्हें तुरंत हटाना सुनिश्चित करना है। इससे झूठी और नुकसानदेह जानकारियों को तेजी से वायरल होने से रोका जा सकेगा।

मेटा ने स्वीकार कीं अपने सिस्टम की कमियां

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इसके कुछ ही घंटे पहले मेटा ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ चर्चा के दौरान अपने एल्गोरिदम सिस्टम में कमियां होने की बात स्वीकार की थी।

बातचीत के दौरान कंपनी के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में मौजूद गैप्स और भारतीय कानूनों के पालन से जुड़े मुद्दों पर मुख्य रूप से फोकस किया गया।

मेटा की ग्लोबल टीम भारत में ही रुककर करेगी चर्चा

सरकार की चिंताओं और तकनीकी पहलुओं को सुलझाने के लिए मेटा की ग्लोबल टेक्निकल टीम भारत में ही रुककर आगे की बैठकों में हिस्सा लेगी। आने वाले दिनों में IT मिनिस्ट्री के साथ कुछ और दौर की चर्चाएं होनी तय हैं।

जवाबदेही और AI तकनीक पर सरकार का रुख

बैठक का मुख्य फोकस डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना और सरकारी एजेंसियों व मेटा के बीच सहयोग को बढ़ाना था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फर्जी व भ्रामक कंटेंट बनाने की बढ़ती घटनाओं पर सरकार ने गहरी चिंता जताई है।

सरकार का स्पष्ट कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को एआई-जनरेटेड और मैनिपुलेटेड कंटेंट रोकने के लिए अपने स्तर पर तकनीकी सेफगार्ड्स तुरंत लागू करने होंगे और कानूनी व रेग्युलेटरी जरूरतों का समय पर पालन करना होगा।

क्या होता है एल्गोरिदम और क्विक रिस्पॉन्स टीम्स?

सोशल मीडिया एल्गोरिदम: यह एक तरह का डिजिटल कोड या मैथमेटिकल फॉर्मूला होता है जो यह तय करता है कि आपकी फीड में कौन सा वीडियो या पोस्ट सबसे ऊपर दिखेगा। कंपनियां यूजर के एंगेजमेंट (लाइक, शेयर, कमेंट) के आधार पर ऐसा कंटेंट ज्यादा पुश करती हैं।

क्विक रिस्पॉन्स टीम: यह किसी आपात स्थिति, अफवाह या फर्जी जानकारी को सोशल मीडिया पर वायरल होने से रोकने के लिए बनाई गई साइबर विशेषज्ञों की इंस्टेंट एक्शन टीम होती है। यह टीम 24×7 ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी करती है और आपत्तिजनक मामलों पर तुरंत कार्रवाई कराती है।

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