ढाका3 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की फाइल फोटो।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 21 अगस्त को पहली बार भारत दौरे पर आ सकते हैं। यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले दोनों देशों के बीच कुछ अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का है।
ढाका से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश चाहता है कि भारत में रह रहीं शेख हसीना को राजनीतिक गतिविधियां चलाने या बांग्लादेश की राजनीति को प्रभावित करने वाले बयान देने की अनुमति न दी जाए।
हसीना के बयानों से बांग्लादेश सरकार नाराज
शेख हसीना अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि वह भारत से लगातार राजनीतिक बयान दे रही हैं। ढाका का कहना है कि इससे देश की आंतरिक राजनीति प्रभावित हो रही है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक, भारत की ओर से इस मुद्दे पर कुछ अच्छे संकेत मिले हैं। लेकिन ढाका चाहता है कि भारत का रुख और स्पष्ट हो, ताकि तारिक रहमान की यात्रा से पहले इस मुद्दे को लेकर कोई गलतफहमी न रहे।
5 अगस्त की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा तनाव
दरअसल इसी महीने 5 तारीख को शेख हसीना ने वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसमें उन्होंने अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए और बांग्लादेश की राजनीति पर भी अपनी बात रखी।
इस पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक रूप से राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की इजाजत पर फिर बढ़ा तनाव
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सरकार इस घटनाक्रम से ‘नाराज और निराश’ है। मंत्रालय ने आपत्ति जताई कि मानवता के खिलाफ अपराध के एक मामले में मौत की सजा पा चुकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी गई।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने पहले ही भारत को आगाह किया था कि इस तरह के घटनाएं दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
गौरतलब है कि भारत ने शेख हसीना का प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार कर दिया था। भारत ने कहा था कि उनका कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। इससे सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।
