कुछ ही क्षण पहले
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शबाना आजमी ने हालिया इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें और जावेद अख्तर को हिंदू और मुस्लिम हर वर्ग से नफरत मिलती है। उन्होंने कहा कि कई बार उन पर फतवे लगाए गए और कई बार उन्हें आतंकवादी तक कहा जाता है।
शबाना आजमी ने जूम को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘जावेद और मेरे हम दोनों के सिर पर ये श्रेय है कि हमें दोनों इनटोलरेंट कम्युनिटी के जो हिस्से हैं, वो बर्दाश्त नहीं कर पाते। हिंदू कट्टरपंथी और मुस्लिम कट्टरपंथी दोनों। तो फिर हमें लगता है कि हमारी धर्मनिर्पेक्ष सोच तो साबित होती है।’
आगे शबाना आजमी ने कहा, ‘कभी मौलवी हमें फतवा दे रहा है, कभी कोई हमें आतंकवादी कह रहा है। मुझे ये लगता है कि हमें हिंदू-मुस्लिम नेरेटिव से ऊपर उठना होगा। और मुझे लगता है कि सिर्फ एक ही तरीका है, जिससे ये हो सकता है, वो ये कि जब हमें हिंदू- मुस्लिम के झगड़े में धकेला जाए, तो हम इसमें फंसे न। ये लड़ाई हिंदू मुस्लिम की नहीं बल्कि उदार और कट्टर रसोच रखने वाले लोगों की होनी चाहिए। लिब्रल हिंदू और लिब्रल मुस्लिम को एक साथ होना चाहिए और इनटोलरेंट हिंदू-मुस्लिम को एक साथ होना चाहिए। ऐसे ही हमारे अंदर से धर्म का जहर का निकलेगा।’
शबाना ने कहा- सनी मुस्लिम बने, इसलिए फ्लॉप हुई बंटवारा 1947, डायरेक्टर का विरोध
शबाना आजमी ने हाल ही में बयान दिया है कि सनी देओल स्टारर उनकी फिल्म बंटवारा 1947, इसलिए फ्लॉप हुई, क्योंकि लोग सनी देओल को एक मुस्लिम शख्स के किरदार में नहीं देख पाए।

फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने इसका विरोध किया। उन्होंने वैराइटी इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा,“मुझे इसका कोई मतलब समझ नहीं आता। अमिताभ बच्चन ने ‘कुली’ (1983) में मुस्लिम हीरो का किरदार निभाया था। मनमोहन देसाई की कई फिल्मों में मुस्लिम हीरो थे।”
आगे उन्होंने कहा, “क्या हम ऐसे दौर में पहुंच गए हैं, जहां दूसरे समुदाय के हीरो को स्वीकार नहीं कर सकते? हम समझदार, अच्छे और पढ़े-लिखे लोग हैं। वे कैसे कह रहे हैं कि फिल्म में बड़ी गलती है?”
बोले- हर धर्म की अच्छी बातें अपनाना चाहता हूं
राजकुमार संतोषी ने कहा, “मैं हिंदू हूं। मंदिर जाता हूं। मेरे बेटे का नाम राम है। मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं हूं। लेकिन मैं हर धर्म की अच्छी बातें अपनाना चाहता हूं।”
क्या था शबाना आजमी का पूरा बयान?
‘बटवारा 1947’ के बॉक्स ऑफिस पर कमजोर प्रदर्शन को लेकर शबाना आजमी ने जूम से कहा, “सबसे पहले तो मैं फिल्म की कुल बॉक्स ऑफिस कमाई देखकर बहुत हैरान हूं, क्योंकि मेरे आसपास ऐसे लोग हैं, जो आकर कहते हैं कि उन्हें फिल्म बहुत पसंद आई।”
उन्होंने कहा, “वे बताते हैं कि उन्हें फिल्म का संदेश पसंद आया। उनमें से बहुत से लोग मानते हैं कि आज के माहौल में इंसानियत की बात करना बहुत जरूरी है। दूसरी ओर, लोग थिएटर नहीं गए और जो लोग फिल्म देखने गए, वे उलझन भरी प्रतिक्रिया के साथ बाहर आए। समस्या यह है कि लोग सनी देओल को मुस्लिम के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते।”
शबाना का सवाल- क्या सनी ने पाकिस्तानी का किरदार निभाया है?
शबाना आजमी ने कहा कि ‘बटवारा 1947’ देखने वाले लोगों ने भी शायद फिल्म को पूरी तरह नहीं समझा। उन्होंने कहा, “लोग जिस तरह प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उससे मैं हैरान हूं। फिल्म देखने वाले लोग भी सोचते हैं कि सनी देओल ने पाकिस्तानी का किरदार निभाया है। ऐसा नहीं है। यह बात उनके दिमाग में ठीक से बैठ ही नहीं रही।”
शबाना ने आगे कहा, “अगर दोनों धर्मों के लोग फिल्म से खुश नहीं हैं, तो इसका मतलब है कि यह ऐसी चीज है, जो शुद्ध और सुंदर है।”

एक साथ रिलीज हुईं शबाना आजमी की दो फिल्में
शबाना आजमी की एक साथ दो फिल्में बंटवारा 1947 और आवारापन 2, 14 अगस्त को साथ रिलीज हुई हैं। फिल्म बंटवारा 1947 फ्लॉप रही, जबकि आवारापन 2 ने 200 से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया है। आवारापन 2 में शबाना आजमी ने नेगेटिव रोल निभाया है।
