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नेहा कक्कड़ ने सिंगिंग रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड और ‘फेक’ होने की बात को खारिज किया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान नेहा कक्कड़ से रियलिटी शोज के स्क्रिप्टेड होने और TRP गिरने को लेकर सवाल पूछा गया। उनसे सुनिधि चौहान जैसे कई जजों के बयानों पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई। इस पर नेहा कक्कड़ ने कहा, “वो इसलिए गिर गई क्योंकि मैंने करना छोड़ दिया! जब तक मैं कर रही थी, टीआरपी हाईएस्ट थी। लेकिन मैं ये कहना चाहूँगी, ‘अंगूर ना मिले तो खट्टे हैं’, लोग ऐसा बोलते हैं। तो वैसा ही है। अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे ही लगते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये शो बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं है। लोगों की लाइफ बिल्कुल स्क्रिप्टेड नहीं होती। ऑफ कोर्स, हम इंडियंस मोस्टली हम सब हम्बल बैकग्राउंड से ही आते हैं। मैं खुद हम्बल बैकग्राउंड से आई हूँ और अगर मुझे किसी की स्टोरी सुन के इमोशनल फील होता है, मैं इमोशंस फील करती हूँ, तो ऑफ कोर्स ये लाजमी है इमोशंस फील करना।” उन्होंने कहा, “हम सब बहुत ही पता नहीं कौन-कौन से छोटे-छोटे शहरों से आते हैं, और कितनी-कितनी हर्डल्स वो क्रॉस कर कर आते हैं। तो ऑफ कोर्स वो सारे कंटेस्टेंट्स एकदम से कोई नई स्टोरी बना के तो नहीं आ जाएंगे। जो सच है, वही सच है, एंड वही हमें विटनेस करने को मिला।” सुनिधि चौहान ने रियलिटी शोज पर सवाल उठाए थे
सिंगर सुनिधि चौहान ने राज शमानी के पॉडकास्ट में सिंगिंग रियलिटी शोज के बदलते फॉर्मेट पर खुलकर बात की थी। सुनिधि ने कहा था कि उन्हें ‘इंडियन आइडल’ के शुरुआती दो साल काफी पसंद थे। उस समय शो में चीजें अच्छी तरह चल रही थीं। उनके मुताबिक, तब रियलिटी शोज का फॉर्मेट आज से काफी अलग था। पहले कंटेस्टेंट्स की असली परफॉर्मेंस और उनका नेचर ज्यादा दिखाया जाता था। उन्होंने कहा कि शुरुआती सीजन में कंटेस्टेंट की कोई लंबी-चौड़ी कहानी नहीं बनाई जाती थी। अगर कोई कंटेस्टेंट खराब गाता था, तो जज उस पर हंसते थे। उसे मजाक में अगले साल फिर आने के लिए कहते थे। सुनिधि के मुताबिक, ये सब शो का हिस्सा जरूर था, लेकिन जो परफॉर्मेंस दर्शकों को सुनाई जाती थी, वह असली होती थी। अब कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं- सुनिधि सुनिधि ने दावा किया कि अब टीवी पर दिखाई जाने वाली कई चीजें ‘डॉक्टर्ड’ और ‘करेक्टेड’ होती हैं। उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा कि मेकर्स नहीं चाहते कि उनके शो में कोई खराब सिंगर दिखाई दे। इसलिए कई बार कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को इस तरह पेश किया जाता है कि वह टीवी पर बेहतर लगे। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार जज किसी कंटेस्टेंट की जमकर तारीफ करते हैं। वे उसके लिए खड़े होते हैं और कहते हैं कि उन्होंने इससे बेहतर परफॉर्मेंस कभी नहीं सुनी। इसके बावजूद अगले ही एपिसोड में वही कंटेस्टेंट बाहर हो जाता है। सुनिधि के मुताबिक, इससे दर्शक भी हैरान होते हैं। उन्हें समझ नहीं आता कि जिस कंटेस्टेंट के लिए जजों ने इतनी तारीफ की, उसे बाहर क्यों कर दिया गया। सुनिधि ने कहा कि ऐसी चीजें उन्हें परेशान करने लगी थीं। इसलिए उन्होंने धीरे-धीरे रियलिटी शोज का हिस्सा बनना छोड़ दिया। बाद में उन्होंने ‘द वॉइस’ के इंडियन वर्जन में काम किया। उन्होंने बताया कि इस शो के साथ कुछ शर्तें पहले से तय थीं और मेकर्स ने उन्हें मान लिया था। सुनिधि के मुताबिक, उन्हें इस बात की खुशी थी कि ‘द वॉइस’ में जज और दर्शक वही सुनते थे, जो वास्तव में कंटेस्टेंट ने गाया था। उन्होंने कहा कि उन्हें दर्शकों के साथ इस तरह की ‘चीटिंग’ पसंद नहीं है। पॉडकास्ट में सुनिधि से यह भी पूछा गया कि रियलिटी शोज में उन्हें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज क्या लगी। इस पर उन्होंने बताया था कि सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई, जब शो में उनसे किसी खास कंटेस्टेंट को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी बातें कहने को कहा गया। सुनिधि ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकती थीं। उनके मुताबिक, कुछ कंटेस्टेंट्स को आगे बढ़ाने के पीछे सिर्फ उनकी परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि दूसरे फायदे भी देखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि शो जीतने वाले कंटेस्टेंट के साथ बाद में शो या दूसरे प्रोजेक्ट किए जा सकते हैं क्योंकि उसे जीतते हुए देखने वाली ऑडियंस उसके साथ जुड़ी होती है। ऐसे में मेकर्स को लगता है कि वह कंटेस्टेंट आगे भी दर्शक खींच सकता है। सुनिधि ने कहा कि इसी वजह से कई बार रियलिटी शो खत्म होने के बाद मिलने वाले फायदे भी कंटेस्टेंट चुनने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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नेहा कक्कड़ ने रियलिटी शोज को बताया गैर-स्क्रिप्टेड:सुनिधि चौहान की ‘फेक’ वाली टिप्पणी के बाद बोलीं- अंगूर जिसको नहीं मिलते, उसको खट्टे लगते हैं