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कोटा3 मिनट पहले
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एशियन गेम्स से नाम कटने के दावे के बाद राजस्थान की वुशू खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी का रोते हुए वीडियो सामने आया है। करीब 9 मिनट के वीडियो में वह रोते हुए सिलेक्शन प्रोसेस, चोट और फेडरेशन पर सवाल उठाती हैं। अंत में वह माता-पिता से माफी मांगते हुए सुसाइड की बात करती हैं और वीडियो को अपना आखिरी वीडियो बताती हैं।
दिव्यांशी का दावा है कि उन्होंने अंतिम चयन ट्रायल में पहले नंबर की प्लेयर रोशीबीना देवी को हराया था। उनका कहना है कि डॉक्टर ने उन्हें खेलने के लिए फिट बताया, फिर भी उनका नाम एशियन गेम्स की टीम से हटा दिया गया।
दिव्यांशी के पिता सुनील कुमार का कहना है कि बेटी के चयन के बाद किट और सेरेमनी तक हो चुकी थी। दूसरी ओर, वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बाजवा ने कहा कि दिव्यांशी चोटिल थीं और निजी अस्पताल के साथ स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की मेडिकल रिपोर्ट में भी उन्हें आराम की सलाह दी गई थी।

दिव्यांशी ने बताया की उन्हें एशियन गेम्स की जर्सी भी मिल गई थी। इसके बाद उनका नाम वुशू टीम से हटा दिया गया।
‘मैंने उसे हराया, फिर मुझे जाने क्यों नहीं दिया?’
दिव्यांशी वीडियो में कहती हैं कि उन्होंने ट्रायल में नंबर-1 प्लेयर को हराया है। इसके बाद भी उन्हें एशियन गेम्स में जाने से क्यों रोका जा रहा है।
उनका आरोप है कि श्रीनगर में 10 दिन के कैंप के दौरान रोशीबीना के साथ मुकाबले में उनके कंधे में चोट लगी। चोट के कारण उन्होंने 4-5 दिन अभ्यास नहीं किया, लेकिन बाद में रिकवर होकर दोबारा खेला। इसके बाद वह इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भी गईं।
दिव्यांशी का कहना है कि उन्होंने डॉक्टर को चोट दिखाई थी। डॉक्टर ने उन्हें टैपिंग के साथ खेलने की बात कही थी। वह यह भी कहती हैं कि उनकी MRI रिपोर्ट कोच और फेडरेशन के पास थी और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन में उन्हें खेलने के लिए सक्षम बताया गया था।
उनका सवाल है कि अगर वह खेलने के लिए फिट थीं तो उनकी मेडिकल रिपोर्ट को स्वीकार क्यों नहीं किया गया और इतना बड़ा फैसला लेने से पहले उन्हें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
नाओरेम रोशिबिना देवी ने एशियन गेम्स 2022 में सिल्वर मेडल जीता था। दिव्यांशी ने वूशु ट्रायल में उन्हीं को हराने की बात कही है।
‘मैं 18 साल की हूं, मुझे अपनी बात रखने का अधिकार है’
दिव्यांशी कहती हैं कि वह 18 साल की हो चुकी हैं और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है। उनका कहना है कि उनका नाम लेकर फैसला किया गया, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।
वह कहती हैं कि उनका सपना भारत की जर्सी पहनकर एशियन गेम्स में खेलना और देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना था।
10 साल की मेहनत, वजन 74 से 60 किलो किया
दिव्यांशी ने वीडियो में अपने संघर्ष का भी जिक्र किया है। वह बताती हैं कि उन्होंने करीब 10 साल इस सपने के लिए मेहनत की।
शुरुआती ट्रायल के दौरान उनका वजन करीब 74 किलो था। 60 किलो कैटेगरी में जगह बनाने के लिए उन्होंने लगभग 14 किलो वजन कम किया।
वह यह भी कहती हैं कि वह सामान्य परिवार से आती हैं और नहीं चाहतीं कि उनके माता-पिता उनके लिए हाईकोर्ट जाने में पैसे खर्च करें। उन्होंने लोगों से वीडियो देखने और शेयर करने की अपील की।
वीडियो के अंत में बोलीं- ‘मां-पापा माफ करना’
वीडियो के आखिरी हिस्से में दिव्यांशी की आवाज और भावुक हो जाती है। वह अपने माता-पिता से माफी मांगती हैं और कहती हैं कि उन्होंने कभी सुसाइड नहीं करना चाहा, लेकिन अब उन्हें ऐसा करना पड़ेगा।
इसके बाद वह अपने माता-पिता को याद करते हुए उन्हें प्यार करने की बात कहती हैं। आखिर में वह अपने खेल किट को दिखाती हैं, घर की छत की ओर कैमरा करती हैं और कहती हैं कि यह उनका आखिरी वीडियो है।
पिता बोले- चयन हुआ, किट मिली, सेरेमनी भी हुई
दिव्यांशी के पिता सुनील कुमार सुंडा ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में हुए फाइनल चयन ट्रायल में उनकी बेटी पहले स्थान पर रही थी। उन्होंने फाइनल में चंडीगढ़ की खिलाड़ी को हराकर पहला स्थान हासिल किया।
पिता के मुताबिक इसके बाद दिव्यांशी करीब तीन महीने से SAI के भारतीय वुशू टीम कैंप में तैयारी कर रही थीं। उनका कहना है कि श्रीनगर कैंप में बेटी के कंधे में चोट लगी थी, लेकिन इसके बावजूद उसने चीन में इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेला और सिल्वर मेडल जीता।
सुनील कुमार का दावा है कि एशियन गेम्स के लिए बेटी का चयन हो चुका था। उसे किट मिली, सेरेमनी हुई और जापान के लिए अंतिम एंट्री भी कन्फर्म थी। इसके बाद अंदरूनी तौर पर बेटी का नाम हटाकर रोशीबीना देवी का नाम कर दिया गया।

ट्रायल सिलेक्शन में वूशु की नंबर-1 भारतीय खिलाड़ी को हराने के बाद दिव्यांशी का नाम एशियन गेम्स के लिए चुना गया था।
‘हर तीसरे दिन रोती थी बेटी’
पिता का कहना है कि चयन के बाद से ही उनकी बेटी इस मामले को लेकर परेशान थी। उनके मुताबिक वह खेल मंत्री, पीटी उषा और फेडरेशन से संपर्क कर रही थी।
उन्होंने बताया कि हर कुछ दिन में उसे रोशीबीना देवी के रवाना होने की जानकारी मिलती थी और इसके बाद वह रोने लगती थी। वीडियो सामने आने के बाद पिता ने बताया कि दिव्यांशी ने फोन बंद कर लिया था। वह उससे संपर्क नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने कोच से बात की और तुरंत पटियाला के SAI कैंप जाने की तैयारी की। पिता ने कहा कि उन्हें चिंता थी कि बेटी के साथ कुछ गलत न हो जाए।
फेडरेशन अध्यक्ष बोले- ‘चोट लगी थी, डॉक्टर ने आराम कहा’
वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बाजवा ने दिव्यांशी के आरोपों पर कहा कि वह 60 किलो कैटेगरी की खिलाड़ी हैं और ट्रायल में अच्छा प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने माना कि दिव्यांशी शीर्ष स्तर पर खेल रही थीं।
लेकिन बाजवा के मुताबिक बाद में दिव्यांशी चोटिल हो गईं। उन्हें मेडिकल के लिए ले जाया गया और निजी अस्पताल में भी जांच कराई गई। उनके मुताबिक डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी।
बाजवा ने कहा कि पटियाला में डायरेक्टर ने भी दिव्यांशी को देखा और डॉक्टर की रिपोर्ट मांगी। उनके अनुसार SAI ने भी उनकी मेडिकल जांच कराई और दोनों जगह की रिपोर्ट में चोट के कारण आराम की सलाह दी गई।
उनका कहना है कि चोटिल खिलाड़ी को एशियन गेम्स भेजना देश के हित में नहीं होगा।
‘पिता की रिपोर्ट अलग है, SAI की अपनी रिपोर्ट’
दिव्यांशी के पिता का कहना है कि निजी डॉक्टर ने बेटी को खेलने के लिए फिट बताया था। इस पर बाजवा ने कहा कि निजी डॉक्टर की रिपोर्ट अलग है, जबकि SAI की अपनी मेडिकल रिपोर्ट है।
उन्होंने कहा कि दोनों मेडिकल रिपोर्ट में दिव्यांशी के चोटिल होने और आराम की जरूरत बताई गई थी। बाजवा के मुताबिक एशियन गेम्स में देश के लिए मेडल जीतना प्राथमिकता है और इसके लिए फिट खिलाड़ी को भेजना जरूरी है।
चोट जानबूझकर पहुंचाने के आरोप पर भी जवाब
दिव्यांशी और उनके पिता ने आरोप लगाया है कि श्रीनगर कैंप के दौरान रोशीबीना देवी ने जानबूझकर दिव्यांशी के कंधे में चोट पहुंचाई।
बाजवा ने इस आरोप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वुशु मार्शल आर्ट का खेल है और मुकाबले के दौरान चोट लग सकती है। उनके मुताबिक किसी खिलाड़ी ने जानबूझकर चोट पहुंचाई, ऐसा कहना उचित नहीं है।
बाजवा ने यह भी कहा कि रोशीबीना देवी दो बार एशियन गेम्स की विजेता रह चुकी हैं और जिस खिलाड़ी का नाम लिया जा रहा है, उसका अपना अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड है।
बाजवा ने उठाया 15 दिन की चोट पर सवाल
बाजवा ने कहा कि अगर दिव्यांशी करीब 15 दिन से चोटिल थीं तो उन्होंने शुरुआत में इसे बीमारी बताया। बाद में डॉक्टर की जांच में चोट की बात सामने आई।
उनके मुताबिक टीम के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि एशियन गेम्स में कौन खिलाड़ी पूरी तरह फिट होकर देश के लिए मेडल जीत सकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर दोबारा मेडिकल जांच भी कराई जा सकती है।
जूनियर वर्ल्ड में ब्रॉन्ज, चीन में सिल्वर जीत चुकीं
दिव्यांशी 60 किलो वर्ग में सांदा खेलती हैं। वे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए मेडल जीत चुकी हैं। 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में उन्होंने 60 किलो वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
जून 2026 में चीन में हुए मेंबर वूशु टूर्नामेंट में भी उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। वह 2017 से कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी में ट्रेनिंग कर रही हैं। राजस्थान के लिए उन्होंने अलग-अलग स्तरों पर 12 गोल्ड मेडल जीते हैं।

2023 में भी 3 वुशू खिलाड़ी एशियन गेम्स से रह गए थे
2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में अरुणाचल प्रदेश के मेपुंग लामगू, न्येमान वांगसू और ओनिलु टेगा को चीन ने सामान्य वीजा नहीं दिया। तीनों खिलाड़ी भारतीय वुशू टीम का हिस्सा थे, लेकिन चीन में प्रवेश नहीं कर सके। भारत ने इसे भेदभावपूर्ण कार्रवाई बताया और तत्कालीन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने चीन का दौरा भी रद्द कर दिया था।
