मुंबईकुछ ही क्षण पहले
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टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के पब्लिक लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चला आ रहा सस्पेंस अब खत्म होता नजर आ रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी की कोर इन्वेस्टिंग कंपनी (CIC) और NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी को खारिज कर दिया है।
इसका मतलब है कि टाटा संस को केंद्रीय बैंक के नियमों के तहत खुद को शेयर बाजार में लिस्ट कराना ही होगा।
पूरे मामले को सवाल-जवाब समझते हैं…
सवाल 1: टाटा संस को लेकर आरबीआई ने क्या बड़ा फैसला लिया है? जवाब: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने टाटा संस के उस आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में अपना सरेंडर रजिस्ट्रेशन स्वीकार करने की मांग की थी। इस फैसले के बाद अब टाटा संस को RBI के ‘अपर-लेयर NBFC’ के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा, जिसके तहत कंपनी को शेयर बाजार में अपने शेयर लिस्ट कराने होंगे।
सवाल 2: टाटा संस ने NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी क्यों दी थी? जवाब: टाटा संस ने 2024 में कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए अर्जी दी थी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2024 में ₹21,813 करोड़ का अपना पूरा कर्ज चुका दिया था और खुद को नेट कैश पॉजिटिव कंपनी बना लिया था। टाटा संस का तर्क था कि कर्ज खत्म होने के बाद उसे अब NBFC कैटेगरी के कड़े नियमों और अनिवार्य लिस्टिंग से छूट मिलनी चाहिए।
सवाल 3: आरबीआई ने इस अर्जी को खारिज क्यों किया? जवाब: केंद्रीय बैंक के रिवाइज्ड फ्रेमवर्क के मुताबिक, जिस भी NBFC का स्टैंडअलोन एसेट साइज ₹1 लाख करोड़ या उससे अधिक होता है, वह खुद-ब-खुद ‘अपर-लेयर’ (Upper-Layer) कैटेगरी के दायरे में आती है। टाटा संस का एसेट साइज इस ₹1 लाख करोड़ की सीमा से काफी ज्यादा है। अगस्त 2026 में भी RBI ने 17 अपर-लेयर NBFCs की अपडेटेड सूची में टाटा संस को बरकरार रखा था।
सवाल 4: टाटा संस को कब तक बाजार में लिस्ट होना था? जवाब: रिजर्व बैंक ने सितंबर 2022 में पहली बार टाटा संस को अपर-लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था। उस नियम के मुताबिक, ऐसी कंपनियों को 3 साल के भीतर यानी सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था। हालांकि, अर्जी पेंडिंग होने के कारण टाटा संस अब तक अनलिस्टेड रही, लेकिन अर्जी खारिज होने के बाद अब लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सवाल 5: टाटा संस की लिस्टिंग से आम (रिटेल) निवेशकों को क्या फायदा होगा? जवाब: अगर टाटा संस शेयर बाजार में लिस्ट होती है, तो आम निवेशकों को टाटा समूह की उन गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में अप्रत्यक्ष रूप से निवेश करने का मौका मिलेगा, जो फिलहाल शेयर बाजार में मौजूद नहीं हैं। इसमें एयर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा डिजिटल और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
सवाल 6: शेयरधारकों और मार्केट वैल्यूएशन पर इसका क्या असर पड़ेगा? जवाब: टाटा संस की लिस्टिंग से समूह की अनलिस्टेड संपत्तियों को एक पारदर्शी मार्केट-बेस्ड वैल्यूएशन (बाजार आधारित मूल्यांकन) मिलेगा। इससे कंपनी के वैल्यूएशन में बड़ा उछाल आ सकता है और मौजूदा शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक होगी।
सवाल 7: शापूरजी पलोनजी के लिए इस फैसले का क्या मतलब है? जवाब: शापूरजी पलोनजी ग्रुप की टाटा संस में लगभग 18.4% हिस्सेदारी है। कंपनी के शेयर बाजार में लिस्ट होने से SP ग्रुप के लिए अपनी हिस्सेदारी का सटीक बाजार मूल्य तय करना आसान हो जाएगा। इसके अलावा, यदि वे भविष्य में अपनी हिस्सेदारी के बदले फंड जुटाना या शेयर बेचना चाहते हैं, तो लिस्टेड होने के कारण उन्हें काफी लिक्विडिटी और आसानी मिलेगी।
सवाल 8: क्या टाटा संस के पास अब लिस्टिंग से बचने का कोई और विकल्प है? जवाब: चूंकि रिजर्व बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा एसेट वाली कंपनियों को अपर-लेयर दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता, इसलिए कानूनी या रेग्युलेटरी छूट के बिना टाटा संस के लिए लिस्टिंग टालना मुश्किल होगा। हालांकि, कंपनी इस फैसले के खिलाफ केंद्रीय बैंक से पुनर्गठन या समय-सीमा में राहत की अपील कर सकती है।
