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भविष्य की शिक्षा के नाम पर अमेरिकी स्कूलों का चौंकाने वाला सच सामने आया है। यहां एडमिशन के लिए बच्चों को हार्ट मॉनिटर से जोड़कर पूरी क्लास के सामने उनके पेरेंट्स के आलोचनात्मक वीडियो दिखाई जाते हैं, जहां दिल की धड़कन बढ़ने पर वे फेल हो जाते हैं। ‘सहनशीलता’ सिखाने का यह अमानवीय एआई मॉडल बच्चों की मानसिक सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है, जानिए… सिलिकॉन वैली का अल्फा स्कूल… कमरे में ऐसा सन्नाटा था कि सिर्फ दीवार पर लगे विशाल मॉनिटर की ‘बीप-बीप’ सुनाई दे रही थी। यह अस्पताल का आईसीयू नहीं, बल्कि भविष्य की शिक्षा का दावा करने वाला अत्याधुनिक एआई स्कूल है। चौदह साल का रेयान मंच पर रखी एक कुर्सी पर अकेला बैठा था। उसकी उंगलियों और सीने से सेंसर जुड़े थे, जबकि सामने बैठे छात्र बड़ी स्क्रीन पर उसकी धड़कनों का ग्राफ देख रहे थे। रेयान का सामान्य हार्ट रेट 80 बीपीएम था। नियमों के मुताबिक अपनी जगह बनाए रखने के लिए रेयान को दिल की धड़कन 10% से अधिक नहीं बढ़ने देनी थी। 88 बीपीएम पार होते ही वह तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाता। तभी प्रोजेक्टर की स्क्रीन जगमगाई। सामने रेयान के पेरेंट्स का पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो चलने लगा। वे उसके काम, उसकी कमियों और उसकी हर नाकामी की तीखी आलोचना कर रहे थे। एक-एक शब्द रेयान के आत्मसम्मान पर हथौड़े की तरह चोट कर रहा था। पूरी क्लास की नजरें कभी उस वीडियो पर जातीं, तो कभी स्क्रीन पर दौड़ती लाल लकीर पर। ‘82… 85… 87…’ रेयान की मुट्ठियां भींच गईं। उसने अपनी आंखें बंद कीं, सांसों को जबरदस्ती धीमा करने लगा। दिल सीने से बाहर आने को बेताब था, पर बाहर दिखने वाली हर कमजोरी का मतलब था विफलता। जब वीडियो थमा, स्क्रीन पर औसत दर्ज था- 87 बीपीएम। वह सिर्फ एक धड़कन के फासले से बच गया था। पूरा हफ्ता उसके हाथ कांपते रहे। सिलिकॉन वैली के चर्चित एआई स्कूल में परीक्षा सिर्फ दिल की धड़कन नियंत्रित करने तक सीमित नहीं थी। छात्रों पर बॉट्स की मदद से कुछ ही दिनों में कठिन कोर्स पूरा करने का दबाव था। उन्हें बिना शिकायत गंदे शौचालय साफ कराए जाते और सोशल मीडिया पर खुद को ‘बेचने’ की ट्रेनिंग दी जाती। अल्फा स्कूल के अलावा जाने-माने स्कूल सिंथेसिस, अल्फा एनीवेयर और क्वेस्ट् टू लर्न यही तरीका अपना रहे हैं…सहनशीलता और ‘अदम्य साहस’ के नाम पर चल रहा यह प्रयोग शिक्षा से ज्यादा तकनीकी सैन्य प्रशिक्षण जैसा लगता था, जहां संवेदनाओं को दबाना ही सफलता की कसौटी माना जाता है। सेंसर हटाते ही रेयान ने राहत की सांस तो ली, पर उसकी आंखें शून्य में ताक रही थीं। मशीन ने उसके दिल की रफ्तार तो नाप ली थी, लेकिन उस डर और घुटन का कोई डेटा स्क्रीन पर नहीं आया, जो उसके भीतर हमेशा के लिए दर्ज हो चुका था।
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अमेरिकी AI स्कूलों के लर्निंग मॉडल की हो रही आलोचना:स्कूल बने टॉर्चर चैम्बर, पेरेंट्स के कड़वे बोल तय कर रहे भविष्य