- Hindi News
- International
- Xi Jinping US Visit Photos Update; Donald Trump White House Dinner | US China Trade Tariff Deal
वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 14 मई 2026 को बीजिंग के झोंगनानहाई गार्डन में फोटो खिंचवाते हुए।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज अमेरिका रवाना होंगे। उनकी ये यात्रा 11 साल बाद हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प जॉइंट बेस एंड्रयूज एयरपोर्ट पर खुद उनका स्वागत करने जाएंगे।
किसी विदेशी नेता के स्वागत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का सीधे एयरपोर्ट जाना आम नहीं है। इससे पहले अगस्त 2025 में ट्रम्प ने अलास्का में रूसी राष्ट्रपति पुतिन का एयरफील्ड पर स्वागत किया था।
इसके बाद व्हाइट हाउस में शी जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन के सम्मान में राजकीय भोज होगा।
इसके बाद ट्रम्प-जिनपिंग के बीच द्वपक्षीय बातचीत होगी। इसमें व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ताइवान और रूस से जुड़े मुद्दे शामिल हो सकते हैं।

चीन दौरे के दौरान 14 मई 2026 को बीजिंग के टेंपल ऑफ हेवन में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग साथ चलते हुए।
ट्रम्प-शी की मुलाकात में 4 अहम मुद्दों पर बातचीत
1. ट्रेड और टैरिफ
अमेरिका और चीन के बीच सबसे बड़ा मुद्दा ट्रेड और टैरिफ है। पिछले साल ट्रम्प के टैरिफ के जवाब में चीन ने भी अमेरिका के सामान पर बड़े टैक्स लगाए थे। अब दोनों देश एक-दूसरे के सामान पर लगे टैक्स को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
करीब 30-30 अरब डॉलर के सामान पर टैरिफ घटाने और ऊर्जा व कृषि उत्पादों पर टैक्स कम करने को लेकर बातचीत चल रही है।
दोनों देशों के बीच टैरिफ कम रखने की मौजूदा सहमति 10 नवंबर को खत्म हो रही है। ऐसे में दोनों देश इस सहमति को आगे बढ़ाने के साथ ही टैरिफ में और कटौती के रास्ते तलाश रहे हैं।

2. AI पर पहली बार बातचीत
AI अब अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी मुकाबले का बड़ा मुद्दा बन गया है। दोनों देशों के बीच विवाद इस बात को लेकर है कि AI की सबसे ताकतवर तकनीक और मॉडल किसके पास रहेंगे और उनका इस्तेमाल कितना सुरक्षित होगा।
अमेरिका को चिंता है कि उसकी AI तकनीक और मॉडल चीन तक पहुंच सकते हैं। इसलिए अमेरिका ने चीन को AI चिप और दूसरी जरूरी तकनीक देने पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं। अमेरिका चीन की AI कंपनियों को लेकर भी सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं जताता रहा है।
वहीं, चीन इन पाबंदियों का विरोध करता है। उसका कहना है कि अमेरिका तकनीक के इस्तेमाल और व्यापार में रुकावट डाल रहा है।
न्यूयॉर्क में हुई बातचीत में दोनों देशों ने AI पर अलग से बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। अमेरिका ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि दोनों देश AI से जुड़े ऐसे सुरक्षा मामलों की जानकारी एक-दूसरे को दें, जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
3. ताइवान का मुद्दा
चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा में मदद करता है। चीन चाहता है कि अमेरिका ताइवान से दूरी बनाए रखे और उसे सैन्य मदद न दे।
ताइवान एशिया के समुद्री रास्तों और सेमीकंडक्टर चिप की सप्लाई के लिहाज से भी बेहद अहम है।
यही वजह है कि शी के लिए अमेरिकी समर्थन कम कराना और ट्रम्प के लिए चीन के साथ तनाव बढ़ाए बिना ताइवान को लेकर अपनी नीति बनाए रखना इस बातचीत का अहम हिस्सा हो सकता है।
हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि बैठक में ताइवान को लेकर कोई बड़ा फैसला या समझौता होगा या नहीं।

4. रूस से तेल खरीद का मुद्दा
अमेरिका ने ट्रम्प को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया है। भारत और चीन भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
चीन रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदता है। वह रूस के साथ अपने कारोबार में अमेरिका जैसे तीसरे देशों के दखल का लगातार विरोध करता रहा है। ऐसे में रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिकी दबाव ट्रम्प और शी की बातचीत में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
जिनपिंग ट्रम्प से बार-बार क्यों मिल रहे हैं?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिनपिंग अमेरिका के साथ रिश्ते बिगड़ने से बचने के लिए ट्रम्प से सीधे बातचीत जारी रखना चाहते हैं। गुरुवार की मुलाकात एक साल से भी कम समय में दोनों नेताओं की तीसरी मुलाकात होगी। इन बैठकों में अब तक कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ है, लेकिन दोनों नेताओं के बीच बातचीत जारी है।
इस साल 2 और मौके पर दोनों की मुलाकात हो सकती है। नवंबर में चीन के शेनझेन में APEC समिट और दिसंबर में अमेरिका के मियामी में G20 समिट के दौरान भी दोनों की मुलाकात हो सकती है। APEC समिट में ट्रम्प, जिनपिंग और पुतिन की त्रिपक्षीय बैठक भी हो सकती है।

यह तस्वीर 11 नवंबर 2017 को वियतनाम में आयोजित APEC समिट की है। इसके बाद ट्रम्प, पुतिन और जिनपिंग कभी भी एक साथ किसी एक मंच या बैठक में नजर नहीं आए।
जिनपिंग-ट्रम्प की डील से भारत पर क्या असर होगा?
अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम होता है तो इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। सबसे बड़ा असर ट्रेड और सप्लाई चेन पर होगा। अगर दोनों देश टैरिफ घटाते हैं तो चीन-अमेरिका के बीच कारोबार बढ़ सकता है और दुनियाभर की कंपनियों के लिए सप्लाई चेन में बदलाव आ सकता है।
रूस से तेल भी बड़ा मुद्दा है। अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे रहा है। चीन रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है और भारत भी रूसी तेल खरीदता है। इसलिए ट्रम्प-जिनपिंग की बातचीत में रूस पर अमेरिकी दबाव कम होता है या बढ़ता है, इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।
AI और चिप्स का मामला भी भारत के लिए अहम है। अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी की होड़ में अगर नियम बदले तो AI चिप, सेमीकंडक्टर और दूसरी तकनीक की ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। भारत इन दोनों देशों से कारोबार करता है, इसलिए इसका असर भारतीय कंपनियों तक भी पहुंच सकता है।
————————– यह खबर भी पढ़ें…
रिपोर्ट- ट्रम्प को भरोसा, जिनपिंग से अपनी बात मनवा लेंगे: चीनी राष्ट्रपति निजी रिश्तों से ज्यादा देशहित को देते हैं तरजीह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 24 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। ट्रम्प को भरोसा है कि शी के साथ उनके अच्छे निजी रिश्ते बातचीत में अमेरिका के काम आएंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

