मुंबई5 मिनट पहले
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महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने SIR के बीच चुनाव आयोग को लेटर लिखकर ECINet सॉफ्टवेयर में 4 बदलाव करने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को कानून के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करने की सुविधा सॉफ्टवेयर में भी होनी चाहिए।
चोकलिंगम ने 24 सितंबर को आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा। इसमें ‘तार्किक गड़बड़ी’ वाले मामलों में ERO को यह तय करने की छूट देने की मांग की गई है कि किन लोगों को सुनवाई के लिए बुलाना है, कौन से दस्तावेज स्वीकार करने हैं और किन मामलों का निपटारा अधिकारी खुद कर सकते हैं।
क्या हैं CEO की 4 मांगें
1. सुनवाई से छूट का विकल्प ERO को यह तय करने का विकल्प मिले कि संतोषजनक दस्तावेज मिलने पर किसी मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत है या नहीं।
2. दूसरे दस्तावेज स्वीकार करने की सुविधा सिर्फ तय सूची वाले दस्तावेजों तक सीमित न रहते हुए ERO को दूसरे वैध और संबंधित दस्तावेज स्वीकार करने का विकल्प मिले।
3. ‘तार्किक गड़बड़ी’ पर फैसला लेने की छूट ERO को ऐसे मामलों में खुद फैसला लेने की सुविधा मिले, जहां वोटर की जानकारी में नाम, उम्र, सरनेम या माता-पिता से जुड़ी जानकारी का अंतर सामने आता है।
4. सॉफ्टवेयर में ERO के कानूनी अधिकार लागू हों CEO की मांग का मूल मुद्दा यह है कि ECINet में ERO को वही निर्णय लेने की सुविधा मिले, जो कानून उन्हें देता है। इससे सॉफ्टवेयर की तय प्रक्रिया के कारण उनके अधिकार सीमित न हों।
क्या है ‘तार्किक गड़बड़ी’
SIR के दौरान ECINet पुराने और नए वोटर रिकॉर्ड का मिलान करता है। नाम या सरनेम में अंतर, उम्र में असामान्य अंतर या माता-पिता की जानकारी में बदलाव जैसी स्थिति में रिकॉर्ड को ‘तार्किक गड़बड़ी’ के तौर पर चिन्हित किया जा सकता है। यह अपने आप में किसी व्यक्ति के वोटर न होने का फैसला नहीं है।
आयोग ने क्या बदलाव किया
महाराष्ट्र CEO की मांग के बाद चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को फैसला लिया कि ‘अनमैप्ड’ और ‘तार्किक गड़बड़ी’ वाले मामलों में मतदाताओं को सामान्य तौर पर ERO/AERO कार्यालय में सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाएगा। BLO घर जाकर दस्तावेज ले सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे। सुनवाई केवल विशेष परिस्थितियों में होगी और संभव हो तो ऑनलाइन की जाएगी।
आयोग ने ECINet की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाने का भी फैसला किया है। इसमें IIT या IIIT का स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होगा और समिति यह देखेगी कि सॉफ्टवेयर संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं।
पहले भी उठे थे ERO के अधिकारों पर सवाल
महाराष्ट्र CEO की मांग ऐसे समय आई है, जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी ECINet में ERO के अधिकार सीमित होने को लेकर आपत्ति दर्ज करा चुके हैं।
संधू ने कहा था कि कानून के तहत वोटर लिस्ट से जुड़े काम की जिम्मेदारी ERO, जिला निर्वाचन अधिकारी और CEO की है, जबकि सॉफ्टवेयर का नियंत्रण केंद्रीय स्तर पर होने से उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
