चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी एक्टर राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट के आदेश के बावजूद 5 करोड़ नहीं जमा करने पर सोमवार को जस्टिस जॉयमाल्य बागची नाराज हो गए।
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उन्होंने कहा, “इस घमंड को सही जगह दिखानी होगी। आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है। आपकी जगह जेल में है।”
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को आखिरी मौका देते हुए मंगलवार (6 अक्टूबर) तक पैसे जमा करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होगी।
कोर्ट ने इससे पहले 15 सितंबर को भी उन्हें भुगतान के लिए समय दिया था। साथ ही उन्हें सरेंडर करने से मिली अंतरिम राहत 5 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी।

राजपाल ने कहा था- पांच बार जेल जाने को तैयार, लेकिन एक पैसा नहीं दूंगा
कोर्ट में 50 लाख के डिमांड ड्राफ्ट की फोटो कॉपी दिखाई
राजपाल यादव के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की फोटोकॉपी कोर्ट के सामने रखी गई है। यह डिमांड ड्राफ्ट अगले दिन तक दिल्ली पहुंच जाएगा। इस पर CJI सूर्यकांत ने पूछा, “50 लाख रुपये? क्या यह असली भी है?”
कोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव को 5 अक्टूबर तक 5 करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसका पालन नहीं किया।
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वकील ने राजपाल यादव के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि अभिनेता कोर्ट में भी ‘एक्टिंग’ कर रहे हैं। उन्हें कोर्ट का भी सम्मान नहीं है।
इसके बाद जब राजपाल यादव के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता गरीब नहीं हैं, तो जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि वे भले ही ज्यादा अमीर हों, लेकिन जिस रकम से उन्हें नुकसान हुआ है, उस हद तक वे गरीब हैं।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें दो हफ्ते का समय दिया गया था और अब वह समय खत्म हो चुका है। वकील ने सफाई दी कि बैंक 3-4 दिनों तक बंद थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर समय बढ़ाने की जरूरत थी तो इसके लिए अंतरिम आवेदन दाखिल किया जा सकता था।
शिकायतकर्ता ने बताया कि कुल रकम करीब 7.5 करोड़ रुपये है और राजपाल यादव को अवमानना का दोषी ठहराया जाना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि भुगतान अगले दिन तक हो जाना चाहिए।

2010 में फिल्म के लिए लिया था 5 करोड़ का फंड
यह मामला करीब 16 साल पुराना है। शिकायतकर्ता कंपनी के मुताबिक, 2010 में राजपाल यादव को उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए करीब 5 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद दी गई थी। फिल्म के निर्देशन और निर्माण से जुड़े राजपाल यादव पर रकम लौटाने की जिम्मेदारी थी। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौते हुए और भुगतान के लिए चेक जारी किए गए, लेकिन उनमें से सात चेक बाउंस हो गए।

राजपाल यादव ने फिल्म के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी 3 महीने की सजा
मामले में राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया था। जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों मामलों में उनकी सजा बरकरार रखते हुए तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। सभी सजाएं एक साथ चलने का आदेश दिया गया था। इसके बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए भुगतान की शर्त रखी थी। 15 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें रकम जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। अब भुगतान की शर्त पूरी नहीं होने पर कोर्ट ने उन्हें आखिरी मौका दिया है।

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