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Jio देश का सबसे बड़ा IPO ला रही:₹30,188 करोड़ जुटाएगी; 21 अक्टूबर को खुलेगा, ₹1065-1119 प्राइस बैंड तय




रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की डिजिटल सर्विसेज कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स देश का सबसे बड़ा IPO ला रही है। कंपनी का IPO 21 से 23 अक्टूबर तक खुलेगा। इसके जरिए कंपनी 30,188 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस IPO में कंपनी 27 करोड़ शेयर जारी करेगी। कंपनी ने एक शेयर की कीमत यानी प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 तय किया है। लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट कैप ₹10.30 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। एंकर इन्वेस्टर्स 19 अक्टूबर से बोली लगा सकेंगे कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, एंकर इन्वेस्टर्स यानी बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए बिडिंग की तारीख 19 अक्टूबर तय की गई है। यानी इश्यू खुलने से दो दिन पहले एंकर इन्वेस्टर्स बोली लगा सकेंगे। आम निवेशकों के लिए यह आईपीओ तीन दिनों तक खुला रहेगा। कर्मचारियों और शेयरहोल्डर्स के लिए ₹3,000 करोड़ रिजर्व कंपनी ने आईपीओ में अपने कर्मचारियों और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरहोल्डर्स के लिए रिजर्वेशन रखा है… इश्यू का ब्रेक-अप देश में अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा जियो प्लेटफॉर्म्स देश में अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा। इसके जरिए कंपनी लगभग 30,200 करोड़ रुपए जुटाएगी। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,858 करोड़ रुपए का IPO देश का सबसे बड़ा IPO था। किन्हें मिलेगा शेयरहोल्डर रिजर्वेशन का फायदा? एलिजिबल रिलायंस शेयरहोल्डर्स में वे व्यक्ति और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) शामिल हैं, जिनके पास RHP दाखिल करने की तारीख यानी 14 अक्टूबर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के पब्लिक इक्विटी शेयर थे। यह छूट लागू एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और रेगुलेटरी नियमों के अधीन होगी। 27 करोड़ फ्रेश शेयर जारी होंगे फाइलिंग के मुताबिक, इस आईपीओ के जरिए कंपनी ₹10 की फेस वैल्यू वाले 27.5 करोड़ तक फ्रेश यानी नए शेयर जारी करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस जियो का टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज बिजनेस शामिल है। यह बिजनेस रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू अनलॉकिंग स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है। भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल इकोसिस्टम और विशाल टेलीकॉम नेटवर्क को देखते हुए बाजार के निवेशकों की नजर इस लिस्टिंग पर टिकी है। RHP के जरिए निवेशकों को कंपनी के फाइनेंशियल परफॉरमेंस, बिजनेस रिस्क और अन्य जरूरी पहलुओं की विस्तृत जानकारी मिलेगी। जुटाई गई रकम से कर्ज चुकाएगी कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल कंपनी की प्रमुख सब्सिडियरी, रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) के बकाए कर्जों के पेमेंट के लिए किया जाएगा। इसके अलावा जनरल कॉर्पोरेट परपज के लिए भी फंड का इस्तेमाल किया जाएगा। इश्यू के बाद प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 66.43% से घटकर 64.48% रह जाएगी, जबकि पब्लिक शेयरहोल्डिंग 33.57% से बढ़कर 35.52% हो जाएगी। SEBI से अगस्त में मिली थी मंजूरी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने डिस्क्लोजर में बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने इससे पहले 19 जून को ड्राफ्ट रेड हियरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा किया था। इसके बाद 28 अगस्त को मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से ऑब्जर्वेशन लेटर यानी मंजूरी मिली थी। जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है जियो प्लेटफॉर्म्स इस समय देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है। 30 जून 2026 कंपनी का कुल सब्सक्राइबर बेस 53.3 करोड़ है। इसमें 28.49 करोड़ 5G यूजर्स हैं, जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा 5G कस्टमर बेस है। रिलायंस की टेक कंपनी है जियो प्लेटफॉर्म्स जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस की टेक कंपनी है, जिसका हेडक्वार्टर मुंबई में है। भारत में सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क चलाने के साथ-साथ यह कंपनी दुनिया की दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को भी एडवांस 5G सर्विस और तकनीक देती है। इसके पास 5G से जुड़े सभी जरूरी सॉफ्टवेयर, नेटवर्क सर्विसेज और AI टूल्स मौजूद हैं। इस तकनीक की मदद से बड़ी कंपनियों और प्राइवेट नेटवर्क्स के लिए 5G का इस्तेमाल करना बेहद आसान हो जाता है, जिसे इंटरनेट क्लाउड पर भी चलाया जा सकता है। कंपनी ने RHP दाखिल किया IPO के लिए कंपनी ने बुधवार को रेड हियरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी RHP दाखिल कर दिया है। गुजरात के अहमदाबाद में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास RHP फाइल किया गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी गई रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी है। क्या होता है RHP (रेड हियरिंग प्रॉस्पेक्टस)? यह एक ऐसा आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसे कोई कंपनी IPO लाने से पहले SEBI और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास जमा करती है। इसमें कंपनी के बिजनेस, वित्तीय स्थिति, प्रमोटर्स और रिस्क फैक्टर्स का पूरा ब्यौरा होता है। इसमें केवल शेयरों की फाइनल कीमत (इश्यू प्राइस) या प्राइस बैंड और शेयर्स की संख्या की जगह अनुमानित दायरा होता है, जिसे बाद में तय किया जाता है।



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