Jio IPO Launch | Reliance Digital Services Share Price Market Cap Update


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मुंबई59 मिनट पहले

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जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का देश का सबसे बड़ा IPO आज, 21 अक्टूबर से ओपन होगा। कंपनी इसके जरिए 30,188 करोड़ रुपए जुटाएगी। पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए यह IPO 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा।

इस IPO में रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सर्विसेज कंपनी 27 करोड़ शेयर जारी करेगी। कंपनी ने एक शेयर की कीमत यानी प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 तय की है। लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट कैप ₹10.30 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

कर्मचारियों और शेयरहोल्डर्स के लिए ₹3,000 करोड़ के शेयर्स रिजर्व

  • कर्मचारियों के लिए: एम्प्लॉइज के लिए ₹500 करोड़ तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं।
  • एम्पलॉई डिस्काउंट: कर्मचारियों को हर शेयर पर ₹54 की छूट भी मिलेगी।
  • RIL शेयरहोल्डर्स: एलिजिबल शेयरहोल्डर्स के लिए ₹2,500 करोड़ तक का कोटा है।

मिनिमम 12 शेयर्स खरीद सकते हैं रिटेल इनवेस्टर्स

IPO में रिटेल निवेशक मिनिमम एक लॉट यानी 12 शेयर्स के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इश्यू के अपर प्राइज बैंड ₹1,119 के हिसाब से 1 लॉट के लिए अप्लाय करते हैं, तो आपको ₹13,428 का इन्वेस्टमेंट करना होगा।

वहीं रिटेल इनवेस्टर्स IPO के मैक्सिमम 14 लॉट यानी 168 शेयर्स के लिए बिडिंग कर सकते हैं। जिसके लिए इनवेस्टर्स को मैक्सिमम ₹1,87,992 का इन्वेस्टमेंट करना होगा।

IPO में इन्वेस्ट करने पर मिल सकता है 22.5% रिटर्न

लिस्ट होने के पहले कंपनी का शेयर ग्रे मार्केट में 22.52% यानी ₹252 प्रति शेयर के प्रीमियम पर पहुंच गया है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) के हिसाब से देखें तो अपर प्राइस बैंड ₹1,119 के लिहाज से इसकी लिस्टिंग (1119+252=₹1371) ₹1371 पर हो सकती है।

इश्यू में किसके लिए कितना हिस्सा रिजर्व

  • क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB): 50% हिस्सा रिजर्व
  • नॉन-इंसटीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII): 15% हिस्सा रिजर्व
  • रिटेल निवेशक: 35% हिस्सा रिजर्व

किन्हें मिलेगा शेयरहोल्डर रिजर्वेशन का फायदा?

एलिजिबल रिलायंस शेयरहोल्डर्स में वे व्यक्ति और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) शामिल हैं, जिनके पास कंपनी के रेड हियरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी RHP दाखिल करने की तारीख यानी 14 अक्टूबर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के पब्लिक इक्विटी शेयर थे। यह छूट लागू एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और रेगुलेटरी नियमों के अधीन होगी।

देश में अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा

जियो प्लेटफॉर्म्स देश में अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा। इसके जरिए कंपनी लगभग 30,200 करोड़ रुपए जुटाएगी। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,858 करोड़ रुपए का IPO देश का सबसे बड़ा IPO था।

IPO के जरिए 27 करोड़ फ्रेश शेयर जारी होंगे

RHP के मुताबिक, इस आईपीओ के जरिए कंपनी ₹10 की फेस वैल्यू वाले 27.5 करोड़ तक फ्रेश यानी नए शेयर जारी करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स में रिलायंस जियो का टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज बिजनेस शामिल है।

यह बिजनेस रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू अनलॉकिंग स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा है। भारत के तेजी से बढ़ते डिजिट ल इकोसिस्टम और बड़े टेलीकॉम नेटवर्क को देखते हुए बाजार के निवेशकों की नजर इस लिस्टिंग पर टिकी है।

जुटाई गई रकम से कर्ज चुकाएगी कंपनी

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल कंपनी की प्रमुख सब्सिडियरी, रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) के कर्जों के पेमेंट के लिए किया जाएगा। इसके अलावा जनरल कॉर्पोरेट परपज के लिए भी फंड का इस्तेमाल किया जाएगा।

इश्यू के बाद प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी 66.43% से घटकर 64.48% रह जाएगी, जबकि पब्लिक शेयरहोल्डिंग 33.57% से बढ़कर 35.52% हो जाएगी।

IPO से पहले एंकर इन्वेस्टर्स से ₹8,110 करोड़ जुटाए

IPO से पहले कंपनी ने 212 एंकर इन्वेस्टर्स से ₹8,110 करोड़ जुटाए। कंपनी की एंकर बुक को 30 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला था। यानी एंकर बुक के मुकाबले एंकर इन्वेस्टर्स ने करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए की बोलियां लगाई थीं।

एंकर इन्वेस्टर्स यानी बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए बिडिंग की तारीख 19 अक्टूबर थी। यह किसी भी भारतीय IPO के लिए अब तक की सबसे बड़ी इंस्टीट्यूशनल बोली है।

इस एंकर बुक में दुनिया के सबसे बड़े एसेट मैनेजर्स, सोवरेन वेल्थ फंड्स, भारत के प्रमुख म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियां और पेंशन फंड्स शामिल हुए थे।

IPO के लिए SEBI से अगस्त में मिली थी मंजूरी

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बताया था कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने इससे पहले 19 जून को ड्राफ्ट रेड हियरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) जमा किया था। इसके बाद 28 अगस्त को मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से ऑब्जर्वेशन लेटर यानी मंजूरी मिली थी।

जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर, 53.3 करोड़ यूजर्स

जियो प्लेटफॉर्म्स इस समय देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर है। 30 जून 2026 कंपनी का कुल सब्सक्राइबर बेस 53.3 करोड़ है। इसमें 28.49 करोड़ 5G यूजर्स हैं, जो दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा 5G कस्टमर बेस है। जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस की टेक कंपनी है, जिसका हेडक्वार्टर मुंबई में है।

भारत में सबसे बड़ा मोबाइल नेटवर्क चलाने के साथ-साथ यह कंपनी दुनिया की दूसरी टेलीकॉम कंपनियों को भी एडवांस 5G सर्विस और तकनीक देती है। इसके पास 5G से जुड़े सभी जरूरी सॉफ्टवेयर, नेटवर्क सर्विसेज और AI टूल्स मौजूद हैं।

इस तकनीक की मदद से बड़ी कंपनियों और प्राइवेट नेटवर्क्स के लिए 5G का इस्तेमाल करना बेहद आसान हो जाता है, जिसे इंटरनेट क्लाउड पर भी चलाया जा सकता है।

कंपनी ने 14 अक्टूबर को RHP दाखिल किया था

IPO के लिए कंपनी ने बुधवार, 14 अक्टूबर को रेड हियरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी RHP दाखिल किया था। गुजरात के अहमदाबाद में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास RHP फाइल किया गया था। रिलायंस ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को दी गई रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी दी थी।

इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग या IPO क्या होता है?

जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर्स को आम लोगों के लिए जारी करती है तो इसे इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO कहते हैं।

कंपनी को कारोबार बढ़ाने के लिए पैसे की जरूरत होती है। ऐसे में कंपनी बाजार से कर्ज लेने के बजाय कुछ शेयर पब्लिक को बेचकर या नए शेयर इश्यू करके पैसा जुटाती है। इसी के लिए कंपनी IPO लाती है।

IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम क्या होता है?

IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ये बताता है कि लिस्टिंग से पहले अनऑफिशियल मार्केट में लोग उस IPO के शेयर को कितने रुपए ज्यादा देकर खरीदने को तैयार हैं। ग्रे मार्केट एक अनऑफिशियल तरीका है, जिसमें कुछ ट्रेडर लिस्टिंग से पहले ही शेयर खरीदते-बेचते हैं।

चूंकि GMP ये दिखाता है कि लोग कितना प्रीमियम देने को तैयार हैं, इसलिए ज्यादातर निवेशक इसी से अंदाजा लगाते हैं कि शेयर लिस्टिंग के दिन कितने रुपए पर खुलेगा।

कई बार ग्रे मार्केट प्रीमियम बिल्कुल सटीक साबित होता है, कई बार थोड़ा ऊपर-नीचे भी हो जाता है। लेकिन ये लिस्टिंग गेन का अंदाजा लगाने का सबसे पॉपुलर तरीका है।

क्या होता है रेड हियरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP)?

यह एक ऐसा आधिकारिक दस्तावेज होता है जिसे कोई कंपनी IPO लाने से पहले SEBI और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास जमा करती है।

इसमें कंपनी के बिजनेस, फाइनेंशियल कंडीशन, प्रमोटर्स और रिस्क फैक्टर्स का पूरा ब्यौरा होता है। इसमें शेयरों की फाइनल कीमत (इश्यू प्राइस) या प्राइस बैंड और शेयर्स की संख्या की जगह अनुमानित दायरा होता है, जिसे बाद में तय किया जाता है।



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