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टाइगर के शूटर्स की गिरफ्तारी पर राम गोपाल वर्मा बोले:वे सिर्फ मोहरे होते हैं, जश्न मनाने से पहले अंडरवर्ल्ड को समझना होगा




बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने शूटर्स की गिरफ्तारी को बड़ी कामयाबी मानने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अंडरवर्ल्ड में गोली चलाने वाले सिर्फ मोहरे होते हैं, जबकि हमले की साजिश रचने वाले असली लोग पर्दे के पीछे रहते हैं। उन्होंने चेताया कि शूटर्स के पकड़े जाने के बावजूद बॉलीवुड में डर का माहौल खत्म होना जरूरी नहीं है। शूटर्स की गिरफ्तारी से खत्म नहीं होगा डर राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि शूटर्स की गिरफ्तारी का जश्न मनाने से पहले अंडरवर्ल्ड के काम करने के तरीके को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक, किसी वारदात को अंजाम देने वाला शख्स आपराधिक नेटवर्क का सबसे आसानी से बदला जा सकने वाला हिस्सा होता है। उसका काम सीमित होता है और वारदात के बाद उसकी भूमिका खत्म हो जाती है। इसलिए केवल हमलावरों को पकड़ लेने से पूरे नेटवर्क को खत्म मान लेना सही नहीं होगा। राम गोपाल वर्मा का मानना है कि असली चुनौती उन लोगों तक पहुंचना है, जो हमले की योजना बनाते हैं और दूसरों के जरिए उसे अंजाम दिलाते हैं। ‘शूटर मजदूर, मास्टरमाइंड मालिक की तरह’ फिल्ममेकर ने अंडरवर्ल्ड की कार्यप्रणाली समझाने के लिए बिल्डिंग बनाने का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह निर्माण में लगे मजदूर इमारत का डिजाइन तैयार नहीं करते और न ही उसके मालिक होते हैं, उसी तरह शूटर्स भी पूरे नेटवर्क को चलाने वाले लोग नहीं होते। उनके अनुसार, शूटर्स सिर्फ तय किए गए काम को अंजाम देते हैं, जबकि असली फैसले लेने वाले लोग दूर रहकर पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित करते हैं। कौन-सा काम करना है और किसे निशाना बनाना है, इसका फैसला करने वाले लोग ही नेटवर्क की असली ताकत होते हैं। राम गोपाल वर्मा ने इसी वजह से शूटर्स की गिरफ्तारी को पूरे आपराधिक तंत्र के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई मानने से इनकार किया। हालांकि, यह उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में व्यक्त की गई राय है; इससे मामले की जांच की वास्तविक स्थिति अपने आप साबित नहीं होती। सेना के उदाहरण से समझाया सत्ता का खेल राम गोपाल वर्मा ने अपनी बात समझाने के लिए सेना की व्यवस्था का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध में राजा या सेनापति खुद मैदान में लड़ने नहीं उतरते, बल्कि सैनिकों को आदेश देते हैं। जोखिम उठाने वाले सैनिक होते हैं, जबकि फैसले लेने वाले लोग अक्सर सुरक्षित दूरी पर रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सेना और अंडरवर्ल्ड को एक जैसा बताना नहीं है, बल्कि यह समझाना है कि ताकतवर व्यवस्था में फैसले लेने वाले और उन्हें जमीन पर लागू करने वाले अलग-अलग लोग हो सकते हैं। उनके मुताबिक, यही दूरी आपराधिक नेटवर्क के बड़े चेहरों को बचाए रखने में मदद करती है। यदि हर वारदात में सरगना खुद शामिल हो, तो उसके पकड़े जाने या मारे जाने का जोखिम बढ़ जाएगा। इसलिए ऐसे नेटवर्क दूसरे लोगों का इस्तेमाल करते हैं। टाइगर श्रॉफ केस के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा पर सवाल राम गोपाल वर्मा ने अपनी पोस्ट के आखिर में कहा कि शूटर्स की गिरफ्तारी को न तो पुलिस की अंतिम जीत माना जा सकता है और न ही इससे अंडरवर्ल्ड को निर्णायक नुकसान पहुंचना तय है। उनके मुताबिक, जब तक पर्दे के पीछे से काम करने वाले लोगों तक नहीं पहुंचा जाता, तब तक डर बना रह सकता है। उनकी टिप्पणी ने टाइगर श्रॉफ से जुड़े मामले के बाद बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है।



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