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Caller Name Display Mandatory on Phones


नई दिल्ली8 मिनट पहले

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कल यानी 1 नवंबर 2026 से आपके फोन पर जब भी किसी अनजान नंबर से कॉल आएगा, तो स्क्रीन पर नंबर के साथ उस व्यक्ति का असली नाम भी दिखेगा। यह नाम वही होगा जो उसने सिम खरीदते समय सरकारी ID (जैसे आधार) में दिया था।

दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए इस नियम को लागू करना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए आपको कोई एप डाउनलोड या सर्विस शुरू करने की जरूरत नहीं होगी, यह अपने-आप काम करेगी।

अब तक अनजान नंबरों की पहचान के लिए लोग ट्रूकॉलर जैसे एप का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब बिना किसी एप के ही आपको पता चल जाएगा कि कौन कॉल कर रहा है। इससे फर्जी और फ्रॉड कॉल से बचने में आसानी होगी।

सरकार का यह नियम 8 सवाल-जवाब में समझें…

सवाल 1: जब किसी का कॉल आएगा तो फोन स्क्रीन पर नाम और नंबर कैसे दिखेगा?

जवाब: जिस भी व्यक्ति ने आपको फोन किया है, आपकी मोबाइल स्क्रीन पर उसका नाम दिखेगा। अगर फोन करने वाले व्यक्ति का नाम आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट है तो वही नाम दिखेगा। अगर उसका नंबर सेव नहीं है तो सिम लेते वक्त फोन करने वाले ने जो नाम दर्ज कराया था, वह दिखेगा।

सवाल 2: अगर विदेश से कोई कॉल आती है तो स्क्रीन पर क्या लिखा आएगा?

जवाब: अगर कॉल किसी दूसरे देश यानी इंटरनेशनल नंबर से आ रही है तो स्क्रीन पर किसी का नाम नहीं होगा, सिर्फ इंटरनेशनल कॉल लिखा नजर आएगा।

सवाल 3: यह सिस्टम काम कैसे करेगा, क्या कंपनियों को नया डेटाबेस बनाना होगा?

जवाब: हां, हर टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर को अपने यूजर्स के नाम और उनके मोबाइल नंबरों को लिंक करने वाला एक नया डेटाबेस तैयार करना होगा। जब आपको कॉल आएगा तो कंपनी डेटाबेस से नाम फेच करके तुरंत आपकी स्क्रीन पर दिखाएगी।

सवाल 4: क्या मेरी पर्सनल प्राइवेसी और डेटा सुरक्षित रहेगा?

जवाब: कॉल कटते ही सिस्टम उस नाम को अपनी मेमोरी से तुरंत मिटा देगा, ताकि आपका डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहे। वहीं जिन लोगों ने प्राइवेसी के लिए अपना नाम छिपाने (CLIR) की सर्विस ली हुई है, उनका नाम स्क्रीन पर शो नहीं होगा।

सवाल 5: बिजनेस, कंपनियों और बल्क कनेक्शन वालों के लिए क्या नियम हैं?

जवाब: बिजनेस या बल्क सिम इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को अपने ट्रेडमार्क या रजिस्टर्ड बिजनेस नेम दिखाने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए उन्हें ट्रेडमार्क रजिस्ट्री या GST पोर्टल पर रजिस्टर्ड नाम का वेरिफिकेशन और डॉक्यूमेंट्स ऑपरेटर को देने होंगे।

सवाल 6: 2G, 3G और लैंडलाइन नेटवर्क वाले यूजर्स का क्या होगा?

जवाब: फिलहाल यह नियम सिर्फ 4G और 5G या उससे ऊपर की जनरेशन के मोबाइल नेटवर्क पर अनिवार्य रूप से लागू हो रहा है। 2G, 3G नेटवर्क और पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क (PSTN) पर इसे रोलआउट करने के लिए सरकार अलग से विचार करेगी।

सवाल 7: इस फैसले के पीछे का बैकग्राउंड क्या है, क्या इसके ट्रायल हो चुके हैं?

जवाब: टेलिकॉम रेगुलेटरी TRAI ने फरवरी 2024 में इसकी सिफारिश की थी। इसके बाद पिछले कुछ महीनों में इसके ट्रायल्स किए गए। अक्टूबर 2025 में TRAI और DoT के बीच सहमति बनी कि इसे ‘रिक्वेस्ट पर देने’ के बजाय बाय-डिफॉल्ट लागू किया जाएगा।

सवाल 8: आम मोबाइल यूजर्स को इस फैसले से क्या फायदे होंगे?

जवाब: सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि फर्जी कॉल्स, साइबर फ्रॉड, स्पैम कॉल्स और ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाओं पर रोक लगेगी। फर्जी नामों से सिम चला रहे लोगों की पहचान आसान हो जाएगी और यूजर्स को थर्ड-पार्टी एप्स जैसे ट्रू कॉलर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

यूजर्स के लिए टिप्स

  • अपना सिम डेटा चेक करें: अगर आपकी सिम आपके किसी परिजन या पुराने नाम पर है, तो 1 नवंबर से कॉलिंग के वक्त वही नाम दूसरों को दिखेगा। इसे सही कराने के लिए अपने टेलिकॉम ऑपरेटर से संपर्क कर KYC अपडेट रखें।
  • बिजनेस ओनर्स ध्यान दें: अगर आपका कोई बिजनेस कनेक्शन है तो 1 नवंबर से पहले अपने GST या ट्रेडमार्क डॉक्यूमेंट्स देकर अपना ब्रांड नेम अपडेट करवा लें।



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