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- Petroleum Ministry Rejects Karnataka Ethanol Blending Allegations | E20 Report
नई दिल्ली4 मिनट पहले
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कर्नाटक सरकार की ओर से तेल कंपनियों के पेट्रोल में 31.2% तक इथेनॉल मिलाने के आरोपों को पेट्रोलियम मंत्रालय ने खारिज कर दिया है।
सरकार ने कहा कि 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लिए गए E20 पेट्रोल के सभी 893 सैंपल जांच में पास हुए हैं। सभी में इथेनॉल की मात्रा तय लिमिट (19% से 20%) के अंदर पाई गई है।
वहीं, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने जांच के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। कंपनियों का कहना है कि सैंपल की जांच तय कानूनी और तकनीकी मानकों के मुताबिक नहीं हुई।
कंपनियों का कहना है कि सैंपल की जांच तय कानूनी और तकनीकी मानकों के मुताबिक नहीं हुई। कंपनियों ने जॉइंट टेस्टिंग की मांग की है।
कर्नाटक में लिए गए सभी 56 सैंपल जांच में पास
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के डिपो और पंपों से BIS स्टैंडर्ड (यानी सरकारी नियमों) के हिसाब से ही पेट्रोल के सैंपल लिए गए थे।
कर्नाटक से कुल 56 सैंपल जुटाए गए थे और जांच में ये सभी बिल्कुल सही निकले। इनमें इथेनॉल की मात्रा 19% से 20% के बीच ही मिली, जिसका एवरेज 19.30% रहा।
मंत्रालय ने कहा कि कर्नाटक सरकार का पेट्रोल में 31.2% तक इथेनॉल मिलाने का दावा पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है।
राहुल गांधी बोले- जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी
कर्नाटक सरकार के दावों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- ‘E20 अब 420 बन गया है, जनता की गाड़ी से पेट्रोल चोरी हो रहा है।’
राहुल के मुताबिक, कर्नाटक सरकार ने 7 जिलों से पेट्रोल के 14 सैंपल लेकर मान्यता प्राप्त लैब में जांच कराई। इनमें 11 सैंपल में एथेनॉल की मात्रा 20% से ज्यादा मिली।
ज्यादा इथेनॉल मिलाने से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है और मेंटेनेंस का खर्च बढ़ रहा है, जो सीधे तौर पर जनता की गाड़ियों से ‘पेट्रोल की चोरी’ है।

तेल कंपनियों ने जांच के तरीके पर उठाए सवाल
सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने कर्नाटक सरकार की अक्टूबर वाली जांच पर सवाल उठाए हैं:
- कंपनियों के लोग मौजूद नहीं थे: कंपनियों का कहना है कि पेट्रोल के सैंपल लेते वक्त उनके किसी भी प्रतिनिधि को साथ नहीं रखा गया।
- अधूरी रिपोर्ट सौंपी गई: राज्य सरकार ने न तो कंपनियों को मिलान के लिए रखे जाने वाले सैंपल (काउंटर-सैंपल) दिए और न ही पूरी लैब रिपोर्ट शेयर की।
- टेस्टिंग की तकनीक साफ नहीं: जिस प्राइवेट लैब से जांच कराई गई, उसके सर्टिफिकेट में टेस्टिंग के तरीके, सैंपल को पतला करने और जांच में इस्तेमाल हुई चीजों की कोई जानकारी नहीं है। इस वजह से इन नतीजों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
₹1.01 लाख करोड़ के नुकसान का दावा केंद्र ने खारिज किया
केंद्र सरकार ने कर्नाटक सरकार के उस दावे को नकार दिया है, जिसमें कहा था कि पेट्रोल में ज्यादा इथेनॉल से गाड़ी चलाने वालों को हर साल ₹1.01 लाख करोड़ का नुकसान हो रहा है।
कर्नाटक सरकार के अनुसार, इसमें ₹62,000 करोड़ माइलेज घटने से और ₹39,000 करोड़ गाड़ियों की मरम्मत पर खर्च हो रहे हैं।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि E20 पेट्रोल के हिसाब से बनी गाड़ियों में माइलेज केवल 1% से 2% ही गिरता है, जबकि दूसरी गाड़ियों में यह कमी 3% से 6% तक हो सकती है।
इस पूरे विवाद को खत्म करने के लिए तेल कंपनियों ने मांग की है कि दोनों पक्ष मिलकर सरकारी लैब में पेट्रोल के सैंपल लें और उसकी निष्पक्ष जांच कराएं।


