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Jacob completed the 110m hurdles in 12.75 seconds


न्यूयॉर्क16 मिनट पहले

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जैकॉब अपनी हर बड़ी रेस से पहले मैकडॉनल्ड्स का फास्ट फूड खाते हैं। यह कोई शौक नहीं, बल्कि उनका एक अंधविश्वास (सुपरस्टिशन) बन चुका है।- फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

जैकॉब अपनी हर बड़ी रेस से पहले मैकडॉनल्ड्स का फास्ट फूड खाते हैं। यह कोई शौक नहीं, बल्कि उनका एक अंधविश्वास (सुपरस्टिशन) बन चुका है।- फाइल फोटो

क्या कोई एथलीट अपनी सबसे अहम रेस से ठीक पहले भारी-भरकम फास्ट फूड खाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बना सकता है? 20 साल के अमेरिकी एथलीट जैकॉब थार्प ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। ऑबर्न यूनिवर्सिटी के इस युवा छात्र ने 110 मीटर स्प्रिंट हर्डल को महज 12.75 सेकंड में पूरा कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है।

अपनी शानदार जीत के साथ-साथ जैकॉब अपने अनोखे प्री-रेस रूटीन के लिए भी चर्चा में हैं। रेस से पहले उनका फिक्स मील है: दो चीजबर्गर, लार्ज फ्रेंच फ्राइज और चिकन नगेट्स। यूजीन (ओरेगन) में आयोजित NCAA चैम्पियनशिप में जैकॉब ने यह ऐतिहासिक कारनामा किया।

उन्होंने 2012 में बेल्जियम में एरीस मेरिट द्वारा बनाए गए पुराने रिकॉर्ड को 0.05 सेकंड से पीछे छोड़ दिया। इस टूर्नामेंट में आने से पहले जैकॉब का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 13.01 सेकंड था। अपने समय में 0.26 सेकंड का सुधार लाकर उन्होंने दुनिया को चौंका दिया है। जैकॉब अब दुनिया भर में मशहूर हो चुके हैं, लेकिन उनका असली लक्ष्य अभी बाकी है। उनकी नजर अब 2027 के बीजिंग वर्ल्ड चैम्पियनशिप और 2028 के लॉस एंजिलिस ओलिंपिक पर है। जैकॉब अपनी रिकॉर्ड-ब्रेकिंग रेस का वीडियो 15 बार देख चुके हैं ताकि यह समझ सकें कि और कहां समय बचाया जा सकता है।

जैकॉब का मानना है कि रेस की आखिरी 3 बाधाओं पर सबसे ज्यादा फोकस की जरूरत होती है। वे कहते हैं, ‘जब आप इतनी तेज दौड़ रहे होते हैं, तो बाधाएं बहुत जल्दी सामने आती हैं और आपका शरीर धीमा होना चाहता है। लेकिन आपको एक ‘कामिकेज पायलट’ की तरह खतरे की ओर बिना डरे हमला करते रहना होता है।’ जैकॉब के माता-पिता बास्केटबॉल खिलाड़ी रहे हैं। शुरुआत में जैकॉब भी बास्केटबॉल और ट्रैक दोनों में हाथ आजमाते थे, लेकिन बाद में उन्होंने सिर्फ दौड़ने को अपना करियर चुना।

बतौर अंधविश्वास शुरू किया था फास्ट फूड खाना

जैकॉब अपनी हर बड़ी रेस से पहले मैकडॉनल्ड्स का फास्ट फूड खाते हैं। यह कोई शौक नहीं, बल्कि उनका एक अंधविश्वास (सुपरस्टिशन) बन चुका है। हाई स्कूल के दौरान स्टेट चैम्पियनशिप में उन्होंने यही मील खाया था और जीत हासिल की थी। तब से हर बड़े इवेंट से पहले वे इसी डाइट को फॉलो कर रहे हैं। उनके कोच केन हार्नडेन (जिम्बाब्वे के दो बार के ओलिम्पियन) को शुरुआत में यह बिल्कुल पसंद नहीं था। लेकिन जैकॉब कहते हैं, ‘अगर कोई चीज काम कर रही है, तो उसे बदलने की क्या जरूरत है। जब आप किसी चीज से जीतते हैं, तो उसी पर टिके रहना बेहतर है।’



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