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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने बड़ा दावा किया है। बुधवार को उन्होंने मुंबई में ANI न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनने के बाद भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने एक हजार गांवों जाकर सोना और दान जुटाया था। अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया था कि राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाएंगे। गोविंदानंद सरस्वती ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में विशेष जांच दल (SIT) को पत्र भेजा है और उनके पास आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने ट्रस्ट, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और SIT से मामले की आंतरिक और बाहरी दोनों स्तरों पर जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के सबसे पहले चोर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती हैं। उन्हें इस गलत काम के लिए सजा मिलनी चाहिए। उनकी सारी संपत्ति जब्त की जाए और उन्हें जेल में डाला जाए। गोविंदानंद सरस्वती बद्री और द्वारका पीठ के ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के दीक्षित शिष्य हैं। रिश्ते में वे अविमुक्तेश्वरानंद के गुरुभाई हैं। ‘ट्रस्ट बनने के बाद किसी को चंदा जुटाने का अधिकार नहीं था’ गोविंदानंद सरस्वती ने कहा कि 5 फरवरी 2020 को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हो गया था। इसके बाद मंदिर निर्माण के लिए दान और चंदा जुटाने का अधिकार केवल ट्रस्ट के पास था। इसके बावजूद 7 फरवरी 2020 को वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ‘राम-राम ग्राम-ग्राम अभियान’ शुरू कर सोना संग्रह करने की घोषणा की, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश, केंद्र सरकार के निर्देश और ट्रस्ट की व्यवस्था के खिलाफ था। ‘गुरुदेव के निधन के बाद सोना-चांदी ले गए’ उन्होंने आरोप लगाया कि उनके गुरुदेव स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने पूरे देश से राम मंदिर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये, सोना और चांदी एकत्र किया था। वर्ष 2022 में उनके निधन के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कथित रूप से वह सोना, चांदी और अन्य कीमती सामान लेकर श्री विद्या मठ में रख दिए। ‘दो साल पहले भी की थी शिकायत’ गोविंदानंद सरस्वती ने दावा किया कि 26 जून 2024 को उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अयोध्या थाना प्रभारी को पत्र लिखकर इस मामले की शिकायत की थी। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को भी फोन और पत्र के जरिए कथित अनियमितताओं की जानकारी दी गई थी। ‘एक हजार गांवों से सोना जुटाने की जांच हो’ उन्होंने SIT से मांग की कि सबसे पहले यह जांच की जाए कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कथित तौर पर एक हजार गांवों से कितना सोना और दान एकत्र किया। उनका आरोप है कि वाराणसी में लोगों को कुछ चुनिंदा व्यक्तियों से सोना खरीदने के लिए भी कहा गया था और बाद में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत अन्य स्थानों पर सोना, हीरा और अन्य कीमती सामान बेचा गया। गोविंदानंद सरस्वती की प्रमुख मांगें कैसे खुली राम मंदिर चोरी की पोल बताया जा रहा है कि सेवादारों को मंदिर में सालों से चल रहे गबन की जानकारी थी। इसमें बड़े लोगों के नाम होने के कारण वे कुछ बोल नहीं रहे थे। पिछले 2 सालों में टिन्नू का दबदबा बढ़ा तो मंदिर में काम करने वाले एक गुट को यह चुभने लगा। इस गुट ने प्लानिंग बनाकर उससे करीबी बढ़ाई। फिर सभी तथ्य पता कर इसकी जानकारी मीडिया तक पहुंचा दी। अब तक 2 करोड़ की रिकवरी, 200 करोड़ चोरी का अनुमान राम मंदिर चोरी मामले में 5 आरोपियों लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर 2 करोड़ रुपए की रिकवरी हो चुकी है। चंपत राय के करीबी टिन्नू के घर से सोना मिला था। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, चोरी 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की हो सकती है। ऑडिट फर्म ने दिए थे ये सुझाव ऑडिट फर्म ने चंदे और फंड मैनेजमेंट को बेहतर करने, गहनों और कीमती सामान का स्टॉक रजिस्टर बनाए रखने, बैंक रिकॉर्ड का नियमित मिलान करने, IT डेटा सुरक्षा मजबूत करने, HR और प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने का सुझाव दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट की वेबसाइट पर न तो इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध है और न ही SOP की जानकारी दी गई है। 5 फरवरी, 2020 को ट्रस्ट बनने के बाद नवंबर, 2025 तक 4575 करोड़ से ज्यादा नकद दान मिलने का दावा किया गया है। इसके अलावा सोना-चांदी और अन्य कीमती धातुओं के रूप में भी बड़ा दान मिला है। ***************
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गोविंदानंद सरस्वती बोले- अविमुक्तेश्वरानंद राम मंदिर के पहले चोर:एक हजार गांवों से सोना-चांदी और दान जुटाया था, SIT को भेजा सबूत