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मैथ्यू फटरमैन. द न्यूयॉर्क टाइम्स4 मिनट पहले

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चेकिया (चेक रिपब्लिक) की दो स्टार खिलाड़ी- लिंडा नोस्कोवा और कैरोलिना मुचोवा।- फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

चेकिया (चेक रिपब्लिक) की दो स्टार खिलाड़ी- लिंडा नोस्कोवा और कैरोलिना मुचोवा।- फाइल फोटो

विम्बलडन 2026 का महिला सिंगल्स फाइनल इस बार बेहद खास रहा। इस साल खिताबी मुकाबला चेकिया (चेक रिपब्लिक) की दो स्टार खिलाड़ी- लिंडा नोस्कोवा और कैरोलिना मुचोवा के बीच खेला गया।

महज 1.1 करोड़ की आबादी वाला यह छोटा सा यूरोपीय देश महिला टेनिस की दुनिया पर राज कर रहा है। आज दुनिया की टॉप-50 महिला टेनिस खिलाड़ियों में से लगभग 20 प्रतिशत खिलाड़ी अकेले चेकिया से ही आती हैं। हालिया विम्बलडन के टॉप-16 में चार खिलाड़ी इसी देश से थीं।

मार्टिना नवरातिलोवा से शुरू हुई थी यह स्वर्णिम परंपरा

चेक रिपब्लिक के इस शानदार सफर की शुरुआत महान खिलाड़ी मार्टिना नवरातिलोवा से हुई थी। उन्होंने 18 ग्रैंड स्लैम जीते थे। उनके बाद हाना मंडलिकोवा, जाना नोवोत्ना, पेट्रा क्वितोवा, कैरोलिना प्लिस्कोवा, बारबरा क्राजिकोवा और मार्केटा वोंद्रोसोवा जैसी चैम्पियन खिलाड़ी सामने आईं।

1. एक साथ कई खेलों से लचीला शरीर मुचोवा और नोस्कोवा ने बचपन में टेनिस को अपना इकलौता करियर नहीं बनाया था। मुचोवा के पिता और भाई फुटबॉलर थे, इसलिए वे बचपन में हर तरह के खेल खेलती थीं। नोस्कोवा जिम्नास्टिक व घुड़सवारी समेत 7-8 हॉबीज में व्यस्त रहती थीं। बचपन में मिले इस बहु-आयामी शारीरिक विकास ने बॉडी को लचीला और मानसिक रूप से मजबूत बनाया है।

2. टेक्निक नहीं, अंकों की ट्रेनिंग अमेरिका जैसे देशों में बच्चों को कोर्ट पर घंटों एक ही तरह के शॉट्स मारने का अभ्यास कराया जाता है। इसके उलट, चेक रिपब्लिक में शुरुआत से ही असली पॉइंट्स, गेम्स और सेट्स खिलाए जाते हैं। इससे बच्चे सिर्फ गेंद को ताकत से हिट करना नहीं सीखते, बल्कि यह सीखते हैं कि अंक कैसे बनाए जाते हैं।

3. वीकेंड पर सिंगल्स-डबल्स टूर्नामेंट चेक गणराज्य की टेनिस क्रांति की असली बुनियाद उनके स्थानीय क्लबों और क्ले कोर्ट्स पर टिकी है। क्ले कोर्ट पर खेलने से खिलाड़ियों में धैर्य और शॉट्स की वैरायटी (जैसे स्लाइस और ड्रॉप शॉट्स) विकसित होती है। यहां का लोकल क्लब सिस्टम बेहद मजबूत है, जहां हर वीकेंड पर सिंगल्स और डबल्स की ढेरों प्रतियोगिताएं होती हैं।

4. दिग्गजों के साथ प्रैक्टिस का मौका पुरानी चैम्पियन पीढ़ी नई पीढ़ी का हाथ नहीं छोड़ती। जब क्राजिकोवा 18 साल की थीं, तब उन्होंने दिग्गज जाना नोवोत्ना को पत्र लिखा और नोवोत्ना उनकी कोच बन गईं। जब नोस्कोवा ने 18 साल की उम्र में ग्रास कोर्ट पर कदम रखा, तो पूर्व नंबर-1 डबल्स खिलाड़ी स्ट्राइकोवा ने उनके साथ प्रैक्टिस की।



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