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अमेरिका चीन और रूस से बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी परमाणु नीति बदलने की तैयारी कर रहा है। NBC न्यूज के मुताबिक, पेंटागन ऐसी रणनीति बना रहा है, जिसमें बड़े परमाणु हथियारों के साथ छोटे एटम बम (टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार) भी इस्तेमाल का विकल्प होंगे। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों या सीमित युद्ध में किया जा सकेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई नीति पर पेंटागन के नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अभी राष्ट्रपति के पास या तो बड़े परमाणु हमले का विकल्प है या फिर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं करने का। नई रणनीति में बीच का रास्ता निकाला जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर छोटे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर दुश्मन को रोका जा सके। अमेरिका नीति क्यों बदल रहा है? अमेरिका का मानना है कि अगर भविष्य में चीन या रूस से टकराव हुआ, तो राष्ट्रपति के पास सिर्फ बड़े परमाणु हमले का ही नहीं, छोटे एटम बम इस्तेमाल करने का भी विकल्प होना चाहिए। इससे दुश्मन पर दबाव बनाया जा सकेगा और अमेरिका के सहयोगी देशों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। इस पर चिंता क्यों जताई जा रही है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर छोटे एटम बम सैन्य योजना का हिस्सा बन गए, तो उनके इस्तेमाल की आशंका भी बढ़ जाएगी। इससे कोई भी सामान्य युद्ध परमाणु युद्ध में बदल सकता है। छोटे एटम बम क्या होते हैं? इन्हें टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियार कहा जाता है। ये बड़े परमाणु बमों से कम ताकतवर होते हैं और इन्हें पूरे शहर नहीं, बल्कि दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस या युद्ध के मैदान में सीमित निशानों पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया जाता है। दुनिया में आखिरी बार 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए गए थे। तब से किसी देश ने इनका इस्तेमाल नहीं किया है।
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अमेरिका परमाणु नीति बदल रहा:न्यूक्लियर वेपन सिर्फ डराने के लिए नहीं, रूस-चीन से जंग हुई तो छोटे एटम बम इस्तेमाल होंगे