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दुनिया का ब्यूटी हब बन रहा दक्षिण कोरिया:लोगों के आइडिया से तैयार प्रोडक्ट महज तीन माह में जमीन पर उतार रहीं मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां




जरा सोचिए, आपके पास किसी स्किनकेयर प्रोडक्ट का आइडिया हो और महज 3 महीने में वह लॉन्च हो जाए। न तो फैक्ट्री लगाने की जरूरत पड़ी और न ही रिसर्च लैब की। यही मॉडल दक्षिण कोरिया की ब्यूटी इंडस्ट्री (K-ब्यूटी) को ग्लोबल पावरहाउस बना रहा है। इसका कारोबारी ढांचा दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनी टीएसएमसी जैसा है। जैसे टीएसएमसी दूसरों (जैसे एपल) के डिजाइन पर चिप बनाती है, वैसे ही ओडीएम (ओरिजिनल डिजाइन मैन्युफैक्चरर) कंपनियां नए ब्रांड्स के आइडिया को प्रोडक्ट में बदल रही हैं। इस बिजनेस मॉडल के केंद्र में कोलमार कोरिया और कॉसमैक्स जैसी कंपनियां हैं, जो खुद का कोई कंज्यूमर ब्रांड नहीं बेचतीं। इनका काम रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित है। कोलमार ने 2024 में ऐसा सिस्टम बनाया, जिससे आइडिया को तैयार प्रोडक्ट में बदलने का समय 9-12 महीने से घटकर सिर्फ 3 महीने रह गया। इनके पास हमेशा 150 से अधिक सेमी-फिनिश्ड प्रोडक्ट्स का कैटलॉग रहता है, जिससे नए उद्यमियों के लिए शुरुआती लागत और रिस्क कम हो जाते हैं। अनोखे बिजनेस मॉडल की बदौलत दक्षिण कोरिया में बिना अपनी फैक्ट्री के कॉस्मेटिक्स बिजनेस करने वाली कंपनियों की संख्या 2025 में बढ़कर 28,412 हो गई। यह एक दशक पहले की तुलना में 4 गुना अधिक है। मैडेका क्रीम और मैन्यो जैसी हिट स्किनकेयर लाइन्स इसी मॉडल की देन हैं। उत्पादन की जिम्मेदारी बाहरी कंपनियों पर होने से नए ब्रांड्स पूरा फोकस सिर्फ मार्केटिंग, ब्रांडिंग और बिक्री पर कर पाते हैं। इस मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के दम पर दक्षिण कोरिया में कॉस्मेटिक्स उत्पादन 17.9 ट्रिलियन वॉन (1.19 लाख करोड़ रुपए) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 2025 में दक्षिण कोरिया का कॉस्मेटिक्स निर्यात 12% बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपए से ऊपर निकल गया। इससे दक्षिण कोरिया अमेरिका को पछाड़कर फ्रांस के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ब्यूटी प्रोडक्ट निर्यातक बन गया। हालांकि, ‘के-ब्यूटी’ की इस जबरदस्त सफलता पर अब ‘सी-ब्यूटी’ का खतरा मंडराने लगा है। चीन की कंपनियां दक्षिण कोरिया का ही कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल अपनाकर तेजी से नए ब्रांड्स लॉन्च कर रही हैं। जिस फॉर्मूले से कोरिया ग्लोबल लीडर बना, अब उसी फॉर्मूले की नकल करके चीन उसके सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश कर रहा है। सरकार की मदद से विस्तार की राह भी आसान सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, दक्षिण कोरिया के सीजे ओलिव यंग जैसे रिटेल नेटवर्क्स ने भी नए ब्रांड्स को वैश्विक प्लेटफॉर्म दिया। इसके 1,400 से अधिक स्टोर्स पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं, जबकि इसका ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 60 देशों में सर्विस दे रहा है। कोरियाई सरकार भी 2020 से कॉस्मेटिक्स को सेमीकंडक्टर और एंटरटेनमेंट की तरह प्रमुख एक्सपोर्ट सेक्टर मानकर सब्सिडी और लोन दे रही है। इससे इस सेक्टर के लिए विस्तार की राह असान हो गई है।



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