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होम अलोन और लव एक्चुअली से प्रेरित होकर बनी फिल्म:मीठे में क्या है की स्टारकास्ट ने बताया असल जिंदगी का तरीका




दिवाली पर परिवार और रिश्तों को लेकर बनी फिल्म ‘मीठे में क्या है’ आज, यानी 30 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। इसका निर्देशन राधिका बंसल ने किया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में राधिका, आयशा रजा मिश्रा, रोहिणी हट्टंगड़ी और ऋत्विक भौमिक ने फिल्म, किरदारों और परिवार से जुड़ी यादों पर बात की। राधिका ने बताया कि फिल्म का विचार क्रिसमस फिल्मों से आया। रोहिणी ने कहा कि कलाकारों को इस फिल्म में किरदार निभाने के बजाय उन्हें जीना था। सवाल: ‘मीठे में क्या है?’ में दर्शकों को क्या खास देखने को मिलेगा? जवाब/राधिका बंसल: फिल्म में बहुत सारा मसाला है। यह खट्टी-मीठी कहानी है, जिसमें ड्रामा, हास्य, रिश्तों की उलझनें और कई सरप्राइज हैं। यह एक मिक्स बॉक्स की तरह है। सवाल: फिल्म बनाने का विचार कैसे आया? जवाब/राधिका: हमारा परिवार हर साल क्रिसमस पर ‘होम अलोन’ और ‘लव एक्चुअली’ जैसी फिल्में देखता है। मुझे लगा कि दिवाली पर भी ऐसी फिल्म होनी चाहिए, जिसे पूरा परिवार साथ बैठकर देख सके। दिवाली घर लौटने और परिवार के साथ वक्त बिताने का त्योहार है। इसी विचार से फिल्म की कहानी आगे बढ़ी। सवाल: पहली फिल्म में इतनी शानदार स्टारकास्ट कैसे मिली? जवाब/राधिका: यह मेरी पहली फिल्म है। मैं पहले कभी फिल्म के सेट पर भी नहीं गई थी, इसलिए शुरुआत में उम्मीदें कम रखी थीं। मैं कहानी को नानी के किरदार के इर्द-गिर्द बनाना चाहती थी। रोहिणी हट्टंगड़ी मेरी ड्रीम कास्ट थीं। मैंने सोचा कि पूछने में क्या हर्ज है। उन्होंने हां कहा, तो लगा कि शायद अच्छी फिल्म बन जाएगी। फिर आयशा रजा मिश्रा और ऋत्विक भौमिक भी जुड़ गए। खास बात यह है कि किसी ने भी फिल्म के लिए मना नहीं किया। सवाल: आयशा जी, निर्देशक राधिका के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/आयशा रजा मिश्रा: राधिका अपने किरदारों को लेकर बहुत स्पष्ट थीं। शुरुआत में मुझे कुछ निर्देश गलत भी लगे, लेकिन जब सीन शूट हुए तो समझ आया कि वह सही थीं। एक कलाकार के तौर पर किरदार को समझने और उसे नए तरीके से खोजने में मजा आया। फिल्म में मां-बेटी, मां-बेटे और परिवार के दूसरे रिश्तों को खूबसूरती से दिखाया गया है। सवाल: रोहिणी जी, फिल्म में ऐसा क्या खास लगा कि आपने तुरंत हां कह दी? जवाब/रोहिणी हट्टंगड़ी: जब राधिका ने कहानी सुनाई, तभी लगा कि यह एक छोटी, खूबसूरत पारिवारिक फिल्म बनने वाली है। इसमें बड़े-बड़े इमोशनल सीन दिखाने के बजाय रिश्तों को सहज तरीके से पेश किया गया है। ऐसे किरदार निभाना मुश्किल होता है, क्योंकि उनमें अभिनय दिखाने के बजाय उन्हें जीना पड़ता है। फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़कर भी लगा था कि यह एक अच्छा अनुभव होगा। हमने पूरी फिल्म एक महीने में शूट की। साथ रहने और काम करने से कलाकारों के बीच भी पारिवारिक रिश्ता बन गया। इसका असर पर्दे पर भी दिखेगा। निर्देशक को अपने किरदारों की समझ थी, इसलिए काम करना आसान रहा। सवाल: ऋत्विक, आपने फिल्म के लिए हां क्यों कहा? जवाब/ऋत्विक भौमिक: पहली बार राधिका से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। उन्होंने कुछ सीन भेजे और बताया कि वह कैसी फिल्म बनाना चाहती हैं। उनकी बातों में कहानी को लेकर सच्चाई और अपनापन था। उनका उत्साह देखकर लगा कि मैं भी इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहता हूं। मैं जय अग्रवाल का किरदार निभा रहा हूं। वह परिवार की नई पीढ़ी का सबसे बड़ा बेटा है और अपनी जिंदगी के एक खास अनुभव से गुजर रहा है। इस किरदार के जरिए मुझे दुख और उससे जुड़े इमोशंस को एक नए तरीके से समझने का मौका मिला। सवाल: सेट पर कोई ऐसा अनुभव रहा, जब एक सीन बार-बार शूट करना पड़ा? जवाब/राधिका: एक सूटकेस वाला लंबा सीन था, जिसमें रात के समय अलग-अलग जगहों पर जाना था। उसे कई बार शूट करना पड़ा। लाइटिंग और सीन की जरूरतों के कारण काफी रीटेक हुए। सवाल: लखनऊ में शूटिंग के दौरान वहां की मिठाइयों का कितना आनंद लिया? जवाब/रोहिणी: लखनऊ की रबड़ी और जलेबी सभी को बहुत पसंद आई। राम आसरे और छप्पन भोग जैसी जगहों की मिठाइयां भी खाईं। सेट पर तो हमने खूब दावत की। सवाल: ऋत्विक, मीठा खाने से परहेज करने वालों से आप क्या कहेंगे? जवाब/ऋत्विक: मैं अपने मन की सुनता हूं। जब मीठा खाने का मन करता है, तो खा लेता हूं। बाद में जिम में मेहनत कर लेंगे। लेकिन खाने का मजा भी जरूरी है। दिवाली पर तो खास तौर पर मनपसंद मिठाई खानी चाहिए। बस, ध्यान रखकर खाना चाहिए। सवाल: फिल्म देखने के बाद दर्शकों के मन में क्या संदेश रहना चाहिए? जवाब/राधिका: मैं चाहती हूं कि फिल्म देखने के बाद लोगों को अपने परिवार की याद आए। उन्हें लगे कि कई दिनों से नानी, चाचा या किसी कजिन से बात नहीं हुई है, तो उन्हें फोन कर लेना चाहिए। अगर फिल्म किसी को अपने परिवार से दोबारा जुड़ने के लिए प्रेरित कर सके, तो मेरे लिए यही सबसे बड़ी खुशी होगी। सवाल: आपकी नानी से जुड़ी कोई खास याद, जिसने फिल्म को प्रेरित किया? जवाब/राधिका: यह फिल्म मेरी नानी को समर्पित है और उनसे प्रेरित है। शूटिंग शुरू होने से तीन महीने पहले उनका निधन हो गया था। मुझे बहुत दुख हुआ कि वह फिल्म नहीं देख सकीं। लेकिन मुझे लगता है कि उनका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ है। उनसे जुड़ी बहुत सारी यादें हैं, लेकिन आज भी लगता है कि काश, उनसे थोड़ी और बात कर ली होती और उन्हें थोड़ा और फोन किया होता। सवाल: आयशा जी, नानी-दादी से जुड़ी कोई याद या कहानी? जवाब/आयशा: मेरी नानी स्वतंत्रता सेनानी और कम्युनिस्ट थीं, जबकि मेरी दादी न्यूज रीडर थीं। दोनों कामकाजी महिलाएं थीं। मेरे परिवार में किसी को खाना बनाने का शौक नहीं था। मैं शायद अपने परिवार की पहली ऐसी महिला हूं, जो पूरे मन से खाना बनाती है। मैंने खाना बनाना इसलिए सीखा, ताकि अपने बेटे के लिए उसकी पसंद का खाना बना सकूं। सवाल: रोहिणी जी, नानी-दादी से जुड़ी कौन-सी याद सबसे खास है? जवाब/रोहिणी: मैंने अपनी दादी को कभी नहीं देखा। नानी कुछ समय हमारे साथ रही थीं। मेरा ननिहाल वडोदरा में था और वहां जाना मुझे बहुत अच्छा लगता था। घर के हर कमरे में झूला हुआ करता था। मुझे चाय बनाना भी अपनी नानी से ही सीखने को मिला था। खाना बनाना सीखने की मेरी पहली याद वही है। सवाल: ऋत्विक, परिवार के साथ बिताए बचपन की कोई खास याद? जवाब/ऋत्विक: मेरे दादा-दादी और नाना-नानी कोलकाता में रहते थे, जबकि मैं कभी बेंगलुरु तो कभी मुंबई में बड़ा हुआ। इसलिए उनके साथ ज्यादा वक्त नहीं बिता पाया। हालांकि, मुझे परिवार के हर सदस्य से बहुत प्यार मिला। मैं अपनी मां और पिता, दोनों की तरफ से परिवार में इकलौता लड़का हूं। इसलिए मुझे हर पीढ़ी से खूब प्यार मिला है। सवाल: फिल्म में परिवार की नोकझोंक और झगड़े दिखेंगे। असल जिंदगी में ऐसी स्थिति आए, तो आप क्या करेंगी? जवाब/आयशा रजा मिश्रा: मेरे पड़ोसी की भी कोई समस्या हो, तो मैं उसे सुलझाने लगती हूं। मैं तो पैदा ही समस्याएं सुलझाने के लिए हुई हूं। मुझे लगता है कि ज्यादातर भारतीय महिलाओं के डीएनए में ही समस्या सुलझाने की आदत होती है। घर में कोई महिला काम करती हो, तब भी लोग अपनी समस्याएं लेकर उसी के पास पहुंच जाते हैं। कई बार महिलाएं चाहें या न चाहें, उन्हें सबके मामले सुलझाने पड़ते हैं। मेरे पास तो आज तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई, जिसमें मैं कह सकूं कि मैं इससे दूर भाग रही हूं।



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