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पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रेग चैपल ने 20 अन्य पूर्व इंटरनेशनल कप्तानों के साथ पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और वर्ल्ड कप विजेता कप्तान इमरान खान को सही मेडिकल इलाज देने की मांग रखी है। शाहबाज शरीफ सरकार को 23 अगस्त को लिखे गए पत्र में इमरान खान के साथ मानवीय व्यवहार करने को कहा गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इमरान की स्वतंत्र मेडिकल जांच पूरी कराने की मांग रखी है। पूर्व कप्तानों ने दूसरी बार पत्र लिखा इस पत्र में कहा गया है- ‘छह महीने पहले 14 पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेट कप्तानों ने आपको और पाकिस्तान सरकार को इमरान खान के साथ मानवीय व्यवहार और सही मेडिकल इलाज की अपील की थी। हमने तब राजनेताओं के तौर पर नहीं, बल्कि पूर्व साथियों के तौर पर लिखा था।’ उन्होंने कहा- ‘क्रिकेट मैदान पर बना यह रिश्ता उन सीमाओं और मतभेदों से ऊपर है, जो अक्सर देशों को बांटते हैं। अब हम फिर लिख रहे हैं और इस बार 7 अन्य पूर्व कप्तान भी हमारे साथ हैं।’ निजी डॉक्टरों को जांंच में शामिल करने को कहा पत्र के मुताबिक, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को मेडिकल बोर्ड से जांच के लिए अस्पताल भेजने का आदेश दिया था। इस बोर्ड में उनके निजी डॉक्टरों और उनकी बहन डॉ. उजमा खान को शामिल किया जाना था। कोर्ट ने परिवार से हर हफ्ते मुलाकात का अधिकार भी बहाल किया था। पत्र में कहा गया कि ये कदम स्वागत योग्य थे, लेकिन इमरान अस्पताल में कुछ ही घंटे रहे। कोर्ट के आदेश वाले बोर्ड के बजाय राज्य की ओर से नियुक्त टीम ने उनकी जांच की, उन्हें ‘मेडिकली फिट’ बताया और बोर्ड का काम पूरा होने से पहले उन्हें अदियाला जेल वापस भेज दिया। इमरान के परिवार और कानूनी टीम का कहना है कि यह कोर्ट के आदेश के मुताबिक नहीं हुआ। पूर्व कप्तानों ने कहा कि वे पाकिस्तान की घरेलू कानूनी प्रक्रिया पर फैसला नहीं दे रहे हैं, लेकिन मेडिकल बोर्ड को अपनी पूरी और स्वतंत्र जांच करने की अनुमति देने की अपील कर रहे हैं। जैक गोल्डस्मिथ ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री को पत्र लिखा यह विवाद ब्रिटेन तक भी पहुंच गया है। कंजरवेटिव पार्टी के सदस्य और इमरान के पूर्व बहनोई जैक गोल्डस्मिथ ने 21 अगस्त को ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड को पत्र लिखा। उन्होंने ब्रिटेन के विदेश मंत्री से इमरान के इलाज को लेकर पाकिस्तान सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की। गोल्डस्मिथ ने आरोप लगाया- ‘अगर सार्थक हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो पाकिस्तानी सरकार इमरान खान को सिर्फ इसलिए खत्म कर देगी, क्योंकि जब तक वह जिंदा हैं, वे उनकी सत्ता और भ्रष्टाचार के लिए खतरा हैं।’ गोल्डस्मिथ पहले भी ब्रिटेन की संसद में इमरान की जेल का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने इस्लामाबाद पर ज्यादा कूटनीतिक दबाव बनाने की मांग की थी। ब्रिटेन के मंत्रियों ने कहा है कि पाकिस्तान को बुनियादी आजादी, जेल में मानवीय व्यवहार और उचित मेडिकल इलाज तक पहुंच का सम्मान करना चाहिए। इमरान के इलाज को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक विवाद जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और सरकार के बीच उनके स्वास्थ्य और इलाज को लेकर विवाद चल रहा है। यह मामला अब मानवीय चिंता का विषय बन गया है। हालिया तनाव तब बढ़ा, जब इमरान को कोर्ट के आदेश के बावजूद निजी शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने के बजाय इस्लामाबाद के सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। PTI और पाकिस्तान सरकार ने एक-दूसरे पर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। दाहिनी आंख की 85% रोशनी जाने का दावा इमरान के स्वास्थ्य में गिरावट के दावों के बीच उनके वकीलों ने फरवरी में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उनकी दाहिनी आंख की 85% रोशनी जा चुकी है। इमरान ने अक्टूबर 2025 से आंख की समस्या की शिकायत की थी, लेकिन वकीलों के मुताबिक जेल अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया। पाकिस्तान सरकार ने उनकी हालत की गंभीरता पर सवाल उठाया है। इमरान के परिवार और वकीलों ने उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान से मिलने और इलाज में उन्हें शामिल करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने 48 घंटे में अस्पताल भेजने को कहा था सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को इमरान खान को 48 घंटे में अदियाला जेल से निजी शिफा अस्पताल भेजने, विशेषज्ञ व निजी डॉक्टरों से इलाज कराने और परिवार से संपर्क की अनुमति दी थी। हालांकि, सरकार ने निजी अस्पताल में इलाज का विरोध करते हुए आदेश को चुनौती दी। 22 अगस्त को आदेश के खिलाफ जाकर सरकार इमरान को निजी के बजाय सरकारी ‘पिम्स’ (PIMS) अस्पताल ले गई। वहां भर्ती किए बिना महज कुछ घंटे की जांच के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया, जिस पर PTI ने सख्त ऐतराज जताया है। PTI और बहन ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया PTI ने इमरान खान को निजी अस्पताल न भेजने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर प्रधानमंत्री व मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई और तय अस्पताल में इलाज की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। उधर, अस्पताल में मिलीं बहन उजमा खान के अनुसार इमरान शारीरिक रूप से ठीक हैं और आंखों की नजर में सुधार हुआ है। हालांकि, इमरान ने 10 महीने से टीवी, किताबें न मिलने और जेल में यातना दिए जाने का दावा किया है। सरकार ने PTI पर आरोप लगाया पाकिस्तान सरकार ने शनिवार, 22 अगस्त को कहा कि PTI के सदस्यों की भारी मौजूदगी के कारण इमरान को कोर्ट के आदेश वाले निजी अस्पताल के बजाय सरकारी अस्पताल ले जाना पड़ा। सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा, “कोर्ट की अवमानना निश्चित तौर पर हुई है। क्या यह PTI नहीं था जिसने ऐसा किया? क्या उन्होंने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं किया?” प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “अगर किसी ने कोर्ट की अवमानना की है, तो वह इमरान खान की बहन और उनकी पार्टी है। कैदी का परिवार कोर्ट की अवमानना कर रहा था। उनकी पार्टी लोगों को इकट्ठा करके और अधिकारियों के लिए समस्याएं खड़ी करके कोर्ट की अवमानना कर रही थी।” तरार ने कहा कि सरकार ने इमरान को उनकी बहन और शिफा अस्पताल के डॉक्टरों की मौजूदगी में मेडिकल जांच के लिए ले जाकर कोर्ट के आदेश का पालन किया।
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21 पूर्व क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान सरकार को चिट्टी लिखी:पूर्व पीएम इमरान खान के लिए सही इलाज की मांग की