Headlines

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गिस्तान में SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव




पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गिस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। उज्बेकिस्तान से जुड़ी 5 खास बातें 1. डबल-लैंडलॉक्ड देश
उज्बेकिस्तान समुद्र से पूरी तरह कटा हुआ है। इसके सभी पड़ोसी देश भी लैंडलॉक्ड हैं। दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बहुत कम है। 2. समरकंद का गौरवशाली इतिहास
करीब 2700 साल पुराना समरकंद कभी सिल्क रूट का प्रमुख शहर था। एशिया और यूरोप के बीच व्यापार करने वाले यहां से गुजरते थे। 3. सोने का बड़ा उत्पादक
उज्बेकिस्तान दुनिया का 10वां सबसे बड़ा सोने का उत्पादक देश है। यहां स्थित मुरुंतौ (Muruntau) दुनिया की सबसे बड़ी ओपन-पिट सोने की खदानों में से एक है। 4. बाबर की जन्मभूमि
मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का जन्म 1483 में अंदीजान शहर में हुआ था। बाबर बाद में काबुल होते हुए भारत आया और 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई जीतकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। ———————————-



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *