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भारत के स्पेस सेक्टर में सबसे बड़ी फंडिंग:स्पेस-टेक स्टार्टअप पिक्सल ने जुटाए ₹944 करोड़; सैटेलाइट नेटवर्क और AI प्लेटफॉर्म का विस्तार करेगी कंपनी




भारतीय स्पेस-टेक स्टार्टअप पिक्सेल ने 100 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹835 करोड़ जुटाए हैं। यह भारत के स्पेस टेक्नोलॉजी सेक्टर में किसी भी कंपनी की जुटाई गई अब तक की सबसे बड़ी सिंगल फंडिंग है। इस नए निवेश के साथ ही कंपनी की कुल फंडिंग बढ़कर 195 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹1840 करोड़ डॉलर पहुंच गई है। कंपनी इस फंड का इस्तेमाल अपने सैटेलाइट नेटवर्क को मजबूत करने और अर्थ इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म को डेवलप करने में करेगी। सिंगापुर की टेमासेक और सेराफिम ने राउंड को लीड किया पिक्सेल के इस फंडिंग राउंड को सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक और यूके की स्पेस-टेक वेंचर फर्म सेराफिम ने मिलकर लीड किया है। इसके अलावा कंपनी के पुराने इन्वेस्टर्स रेडिकल वेंचर्स और ग्रोएक्स वेंचर्स ने भी इसमें हिस्सा लिया। वहीं, 360 वन एसेट और आईएमएम इन्वेस्टमेंट जैसे नए निवेशक भी इस राउंड में शामिल हुए हैं। पिक्सेल को गूगल का भी सपोर्ट है। नए पैसों का क्या करेगी कंपनी? कंपनी के मुताबिक, जुटाए गए नए फंड का इस्तेमाल सेंसिंग कैपेबिलिटीज बढ़ाने और सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। 1. हनीबी नेटवर्क: अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स का जाल फैलाना जैसे शहर के हर कोने पर नजर रखने के लिए जगह-जगह CCTV कैमरे लगाए जाते हैं, वैसे ही पिक्सेल अंतरिक्ष में ‘हनीबी’ नाम के कई छोटे सैटेलाइट्स का एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर रही है। जितने ज्यादा सैटेलाइट होंगे, पृथ्वी के हर हिस्से की उतनी ही जल्दी और बार-बार ताजा तस्वीरें ली जा सकेंगी। 2. हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट्स: अंतरिक्ष से साफ और बारीक तस्वीरें लेना ये सैटेसाइट अंतरिक्ष से पृथ्वी की इतनी साफ और डिटेल फोटो खींचेंगे कि जमीन पर मौजूद फसलों की बीमारी, जंगलों में पेड़ों की स्थिति या पानी की कमी को ऊपर से ही साफ-साफ देखा जा सकेगा। 3. ऑरोरा प्लेटफॉर्म: स्पेस की तस्वीरों को काम की जानकारी में बदलना सैटेलाइट तो सिर्फ तस्वीरें और तकनीकी डेटा भेजते हैं, जिसे कोई आम इंसान या अधिकारी सीधे देखकर समझ नहीं सकता। ‘ऑरोरा’ कंपनी का एक ऐसा स्मार्ट कंप्यूटर सॉफ्टवेयर है, जो उस जटिल डेटा को प्रोसेस करता है और सीधे-साफ शब्दों में रिपोर्ट बनाकर देता है। जैसे किस इलाके में सूखा पड़ने वाला है, कहां गैस पाइपलाइन से रिसाव हो रहा है, या किस खेत में खाद की जरूरत है। भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए बड़ा माइलस्टोन यह फंडिंग राउंड भारत के तेजी से बढ़ते प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने के बाद से ही स्पेस स्टार्टअप्स में ग्लोबल इन्वेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। पिक्सेल उन चुनिंदा भारतीय स्टार्टअप्स में शामिल है, जो वैश्विक स्तर पर कॉमर्शियल स्पेस और अर्थ-ऑब्जर्वेशन मार्केट में अपनी मजबूत पकड़ बना रहे हैं।



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