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Pakistan Recruits Afghan Soldiers to Tackle Balochistan Insurgency


क्वेटा15 मिनट पहले

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बलूचिस्तान में बलूच विद्रोहियों के बढ़ते हमलों से पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा बलों पर दबाव बढ़ रहा है। इनसे निपटने के लिए पाकिस्तान ने 2,000 पूर्व अफगान सैनिकों और पुलिसकर्मियों को सुरक्षा बलों में भर्ती किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें ज्यादातर वे अफगान सैनिक हैं, जिन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के साथ तालिबान के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। तालिबान की वापसी के बाद पाकिस्तान पहुंचे कुछ पूर्व अफगान सैनिक भी इनमें शामिल हैं।

एक पूर्व अफगान सैनिक के मुताबिक, भर्ती हुए लोगों को हर महीने 40 हजार पाकिस्तानी रुपए, यानी करीब 13,807 भारतीय रुपए मिलते हैं।

62 दिनों में 172 हमले, 68 सुरक्षाकर्मी मारे गए

बलूचिस्तान में सुरक्षा ऑपरेशन चलाए जाने के बावजूद विद्रोही थानों, सरकारी दफ्तरों और हाईवे को निशाना बना रहे हैं।

शोध संस्था पीआईसीएसएस के मुताबिक, जुलाई और अगस्त के 62 दिनों में बलूचिस्तान में 172 हमले हुए। अकेले जुलाई में विद्रोही हमलों और सुरक्षा ऑपरेशन के दौरान 62 सुरक्षाकर्मी मारे गए।

हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नौश्की शहर में विद्रोहियों से नियंत्रण वापस लेने के लिए पाकिस्तानी सेना को हेलिकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल करना पड़ा।

तालिबान की वापसी के बाद नौकरी गई, आर्थिक तंगी ने भर्ती को मजबूर किया

  • अगस्त 2021 में तालिबान की वापसी के बाद कई पूर्व अफगान सैनिकों की तनख्वाह बंद हो गई। प्रतिशोध के डर से इनमें से कई पाकिस्तान पहुंच गए।
  • 2021 से 2023 के बीच पूर्व कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की 218 हत्याएं हुईं। ऐसे में उनके लिए अफगानिस्तान लौटना आसान विकल्प नहीं रहा।
  • पाकिस्तान में भी उन्हें रोजगार और कानूनी दर्जा नहीं मिला। इससे आर्थिक तंगी बढ़ी और इसी वजह से कई लोगों ने पाकिस्तान की सुरक्षा सेवाओं में भर्ती स्वीकार की।

पाकिस्तान को इन सैनिकों से क्या फायदा?

इन पूर्व अफगान सैनिकों को हथियार चलाने और लड़ाई का पहले से अनुभव है। वे तालिबान के खिलाफ लड़ चुके हैं और सीमावर्ती इलाकों में काम कर चुके हैं। इसलिए उन्हें सुरक्षा से जुड़े काम समझाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

पाकिस्तान के लिए इसका एक फायदा यह भी है कि इन लोगों को पहले से सैन्य ट्रेनिंग मिली हुई है। ऐसे में नए सिरे से उन्हें बेसिक ट्रेनिंग देने की जरूरत कम पड़ सकती है।

बलूचिस्तान जैसे इलाकों में, जहां लगातार हमले हो रहे हैं, पाकिस्तान इनकी ट्रेनिंग और पुराने युद्ध अनुभव का इस्तेमाल कर सकता है।

बलूचिस्तान के 27 जिलों में विद्रोही संगठनों की गतिविधियां

पाक इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल बलूचिस्तान में 254 हमले हुए।

इनमें बलूच विद्रोही संगठनों से जुड़े 225 हमले 27 जिलों में दर्ज किए गए। केच में 30 और क्वेटा में 26 हमले हुए।

वहीं, टीटीपी से जुड़े 28 हमले दर्ज किए गए। इनकी ज्यादा गतिविधियां उत्तरी पश्तून बहुल इलाकों में हुईं।

बलूच संगठन स्वायत्तता या आजादी की मांग करते हैं, जबकि टीटीपी इस्लामी शासन लागू करना चाहता है।

बलूचिस्तान में दो महीने में 450 से ज्यादा मौतें

कई शहरों में पुलिस की पकड़ कमजोर

लगातार हो रहे हमलों के कारण बलूचिस्तान के कई जिलों में पुलिस की पकड़ कमजोर हुई है। इससे कानून-व्यवस्था संभालने में भी मुश्किल आ रही है।

प्रशासन को रोजमर्रा के पुलिस कामों के लिए भी अर्धसैनिक बलों और सेना की मदद लेनी पड़ रही है। कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए सैन्य बलों पर निर्भरता बढ़ गई है।

विधानसभा में भी उठा पूर्व अफगान सैनिकों की भर्ती का मुद्दा

बलूचिस्तान में पूर्व अफगान सैनिकों की भर्ती का मुद्दा विधानसभा तक पहुंच गया है।

विपक्षी विधायक फजल कादिर ने सरकार से सवाल किया कि इन सैनिकों को उनके इलाके में क्यों तैनात किया गया है।

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