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“संविधान सिर्फ रूल बुक नहीं, जनता के बीच हुआ एक एग्रीमेंट है” — संविधान तज्ञ कुलदीप कीर्तिराजन

Kuldeep Kirtirajan

 मुंबई | विशेष रिपोर्ट

संविधान को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर संविधान तज्ञ कुलदीप कीर्तिराजन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत का संविधान केवल एक “रूल बुक” नहीं है, बल्कि यह देश की जनता के बीच हुआ एक व्यापक एग्रीमेंट और सेटलमेंट डॉक्यूमेंट है।

कुलदीप कीर्तिराजन ने कहा कि समाज में दो प्रकार के लोग संविधान के बारे में गलत जानकारी फैलाते हैं—एक मूर्ख और दूसरे धूर्त। उनके अनुसार, ये लोग यह प्रचार करते हैं कि संविधान “कॉपी-पेस्ट” है या इसमें “लूपहोल्स” हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

उन्होंने आगे बताया कि संविधान का निर्माण लंबी बहसों, चर्चाओं और आपसी सहमति के बाद हुआ। यह दस्तावेज देश के विभिन्न सामाजिक समूहों और सैकड़ों रियासतों के बीच अधिकारों और जिम्मेदारियों का संतुलित समझौता है। इसलिए इसे सिर्फ नियमों की किताब मानना इसकी मूल भावना को समझने में बड़ी भूल है।

संविधान निर्माण पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए कीर्तिराजन ने कहा कि कुछ लोग बी.एन. राव को संविधान निर्माता बताते हैं, जबकि वे उस समय संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि थे और संविधान सभा का हिस्सा नहीं थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान सभा में मौजूद और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों ने ही संविधान का निर्माण किया।

इस संदर्भ में उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की भूमिका को निर्णायक बताया। उनके अनुसार, आंबेडकर न केवल संविधान सभा के प्रमुख सदस्य थे, बल्कि वे देश की सबसे बड़ी आबादी—SC, ST और OBC वर्गों—का प्रतिनिधित्व भी कर रहे थे। संविधान सभा ने भी उन्हें संविधान निर्माता के रूप में मान्यता दी।

“जब कोई एग्रीमेंट होता है, तो संबंधित पक्षों की मौजूदगी और सहमति जरूरी होती है। भारत का संविधान भी इसी सिद्धांत पर बना है,” उन्होंने कहा।

अंत में Kuldeep Kirtirajan ने कहा कि संविधान को “कॉपी-पेस्ट” या “लूपहोल्स से भरा” बताना न केवल गलत है, बल्कि यह संविधान की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे संविधान को समझें और उसके वास्तविक स्वरूप को पहचानें।

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