इस्लामाबाद5 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हंगू जिले में एक पुलिस चेकपोस्ट की छत पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा हुआ है।
पाकिस्तान में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है।
अल जजीरा के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर ये जाल लगाए जा रहे हैं।
पाकिस्तानी पुलिस का दावा है कि हमलावर ड्रोन जाल में फंस सकते हैं। इससे संभावित नुकसान 40 से 50% तक कम हो सकता है। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह भरोसेमंद तरीका मानने से इनकार किया है।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बारा में सुरक्षाकर्मी पुलिस चौकी के ऊपर जाल लगाते हुए।
दावा- आतंकी गोलीबारी से ज्यादा ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे
पुलिस के मुताबिक, जाल लगाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि सशस्त्र संगठनों ने हमले का तरीका बदल दिया है। अब वे गोलीबारी और मोर्टार के साथ ड्रोन और क्वाडकॉप्टर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
पाकिस्तान में पिछले कुछ सालों में सशस्त्र हमले बढ़े हैं। इसमें पुलिस और सेना को खास तौर पर निशाना बनाया गया है। इनमें कई हमलों की जिम्मेदारी पाकिस्तानी तालिबान यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ली है।
खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में सबसे घातक हमला 29 जुलाई को हुआ था। बम से लैस क्वाडकॉप्टर ने पुलिस चौकी पर हमला किया, जिसमें 11 पुलिसकर्मी मारे गए और 28 घायल हुए। कई घंटे चली मुठभेड़ में 15 हमलावर भी मारे गए।
इसके बाद 19 सितंबर को हंगू में एक और मुठभेड़ हुई। पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, इसमें 6 सैनिक और 8 हमलावर मारे गए।

कोहाट पुलिस लाइन में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ का वीडियो। सिक्योरिटी फोर्स सीढ़ियों और दीवार के सहारे छिपकर आतंकियों पर गोलियां चला रही है।
लगातार हमलों के बीच जाल का इस्तेमाल
पुलिस के मुताबिक, इस साल खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में कम से कम 16 हमले हो चुके हैं। इसी वजह से यह जिला प्रांत के सबसे संवेदनशील इलाकों में शामिल है।
ऐसे हमलों से बचने के लिए हंगू पुलिस ने कम लागत वाला तरीका अपनाया। पुलिस चौकी की छत और चारदीवारी के बीच कई मीटर ऊपर मछली पकड़ने वाले जाल लगाए गए। इससे चौकी के ऊपर एक तरह की जालीदार छत बन गई।
पुलिस के मुताबिक, ये जाल करीब दो महीने पहले लगाए गए थे। इंस्पेक्टर फैयाज खान ने बताया कि चौकी के ऊपर आया ड्रोन जाल में फंसकर रुक सकता है।
अगर ड्रोन ऊपर ही फट जाए तो विस्फोट के टुकड़े हवा में फैलेंगे जिससे जमीन पर मौजूद पुलिसकर्मियों को कम नुकसान होने की उम्मीद है।

हंगू में पुलिस चेकपॉइंट पर सुरक्षा के लिए मछली पकड़ने वाला जाल लगाया गया है।
एक चेकपोस्ट पर करीब 1 लाख रुपए खर्च
हंगू के जिला पुलिस अधिकारी तारिक हबीब के मुताबिक, एक सामान्य पुलिस चेकपोस्ट को इस तरह के जाल से ढकने में करीब 1.4 लाख रुपए होते हैं।
खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक, हंगू के अलावा कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे कम से कम 5 और संवेदनशील जिलों में भी पुलिस चौकियों और चेकपोस्ट पर ये जाल लगाए गए हैं।
प्रांत के कुछ इलाकों में सेना के ठिकानों पर भी ‘एंटी-ड्रोन जाल’ लगाए गए हैं। पुलिस ने इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रांतीय सरकार से अतिरिक्त पैसे भी मांगे हैं।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बारा में, एक पुलिस चौकी के चारों ओर जालीदार बैरियर लगाकर बाउंड्री वॉल बनाई जा रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों को इस तरीके पर भरोसा नहीं
इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के कार्यकारी निदेशक इम्तियाज गुल ने इसे नासमझी वाला सस्ता तरीका बताया।
उनके मुताबिक, आतंकियों का निशाना हमेशा पुलिस स्टेशन या चेकपोस्ट ही नहीं होते। ड्रोन का इस्तेमाल बड़े और जरूरी ठिकानों पर हमला करने के लिए किया जाता है, ताकि हमले का असर ज्यादा दिखाई दे और लोगों में डर पैदा हो।
उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन के हवा में उठते ही उसे रोकने की क्षमता रखती हैं।
यूक्रेन में भी इस्तेमाल हुआ है ऐसा तरीका
पेशावर के आतंकवाद और सुरक्षा विशेषज्ञ फिदा अदील ने बताया कि मछली पकड़ने वाले जाल से ड्रोन रोकना कोई नया तरीका नहीं है।
सेना पहले से ही सामान और ठिकानों को छिपाने के लिए ऐसे जाल इस्तेमाल करती रही है। यूक्रेन में भी रूसी ड्रोन को रोकने के लिए इनका इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि, अदील के मुताबिक, विस्फोटक से भरे ड्रोन के खिलाफ जाल कितना काम करेगा, यह उसके डिजाइन और उसे लगाने के तरीके पर निर्भर करता है।
उन्होंने पुलिस के 40 से 50% नुकसान कम होने के दावे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि असली हमले या सही परीक्षण के बिना इस आंकड़े की पुष्टि नहीं हो सकती।
———————
यह खबर भी पढ़ें…
सऊदी अरब में तैनात होंगी पाकिस्तान-तुर्किये की फौज

लाल सागर में हूती विद्रोहियों की बढ़ती ताकत ने अब सऊदी अरब को सीधे सैन्य कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। सऊदी समर्थित यमनी सेना ने हूतियों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है। इसी बीच पाकिस्तान और तुर्किये भी सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपने सैन्य बल तैनात करने की तैयारी में हैं। पूरी खबर पढ़ें…
