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- Ashwini Vaishnaw On IPhone PLI Controversy | India Tax Revenue Statement
9 मिनट पहले
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अश्विनी वैष्णव-फाइल फोटो
भारत के आईफोन मैन्युफैक्चरिंग बूम और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI स्कीम को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आंकड़ों के साथ आलोचकों को जवाब दिया है। ब्लूमबर्ग की एक वीडियो रिपोर्ट में भारत की आईफोन असेंबलिंग और सरकारी सब्सिडी पर सवाल उठाए गए थे।
इसके जवाब में वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक आंकड़े शेयर करते हुए बताया कि सरकार ने मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग इंसेंटिव के तहत 19,000 करोड़ रुपए दिए हैं, जबकि बदले में 25,000 करोड़ रुपए का डायरेक्ट टैक्स और 3 लाख करोड़ रुपए का GST मिला है। वैष्णव ने योजना के आलोचकों पर चुटकी लेते हुए लिखा- “Cope Harder!!” यानी और जलते रहो/सहन करो।
वैष्णव ने सोशल मीडिया पर आंकड़े जारी कर दिया जवाब
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर देश में बड़े पैमाने पर रोजगार दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार इस सेक्टर में 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिनमें से अकेले 12 लाख लोग मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में काम कर रहे हैं।
वैष्णव का यह बयान ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि भारत टैक्सपेयर्स के पैसे से कंपनियों को इंसेंटिव तो दे रहा है, लेकिन आईफोन के सबसे महंगे और मुख्य पार्ट्स (कम्पोनेंट्स) अब भी विदेश से ही मंगवाए जा रहे हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में क्या सवाल उठाए?
ब्लूमबर्ग ओपिनियन के कॉलमनिस्ट एंडी मुखर्जी ने हांगकांग के शम शुई पो जिले में एक आईफोन को खोलकर यानी डिसमेंटल करके उसके पार्ट्स का अध्ययन किया। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में चीन की सफलता की नकल करने की कोशिश करनी चाहिए या नहीं।
हालांकि रिपोर्ट में माना कि भारत ने मैन्युफैक्चरिंग में डेवलपमेंट हुआ है। पहले जहां पूरी तरह से बने हुए मेनबोर्ड आयात होते थे, वहीं अब भारत में खाली सर्किट बोर्ड आयात करके पार्ट्स स्थानीय स्तर पर जोड़े जा रहे हैं। इससे एक साल में भारत के मोबाइल ट्रेड बैलेंस में 2.1 अरब डॉलर यानी करीब 17,500 करोड़ रुपए का सुधार आया है। आज दुनिया में बनने वाला हर 4 में से 1 आईफोन भारत में बन रहा है।
महंगे पार्ट्स अब भी इंपोर्ट, सब्सिडी पर जताई चिंता
इसके बावजूद ब्लूमबर्ग रिपोर्ट का तर्क है कि मेमोरी चिप्स, प्रोसेसर, डिस्प्ले, कैमरा लेंस और बैटरी जैसे महंगे कंपोनेंट्स के लिए भारत अभी भी पूरी तरह से विदेशी आयात पर निर्भर है। एंडी मुखर्जी के अनुसार, तैयार हैंडसेट के निर्यात से भारत जितना कमाता है, उससे कहीं अधिक पैसा कंपोनेंट्स के आयात पर खर्च हो जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया कि अगर मैन्युफैक्चरिंग लागत ज्यादा बनी रहती है, तो सरकार को फैक्ट्री वर्करों को मिलने वाली एक्स्ट्रा मजदूरी से ज्यादा पैसा इंसेंटिव में देना पड़ सकता है।
रघुराम राजन भी उठा चुके हैं सेमीकंडक्टर और PLI पर सवाल
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट ने सेमीकंडक्टर पर भी सवाल उठाया और कहा कि अरबों डॉलर की सब्सिडी देने के बाद भी भारत अभी सिर्फ टेस्टिंग और पैकेजिंग तक ही पहुंच सका है। असली हाई-एंड चिप फैब्रिकेशन में अभी बरसों लगेंगे। भारत को अपनी ताकत यानी इंजीनियरिंग और डिजाइन पर ध्यान देना चाहिए और कपड़ा-जूता जैसे उद्योगों में निवेश करना चाहिए, जहां करोड़ों लोगों को रोजगार मिल सकता है।
