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1 घंटे पहले
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नई दिल्ली में आज से बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप शुरू हो रही है। भारत 17 साल बाद इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहा है। 23 अगस्त तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के मुकाबले इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में होंगे।
7 दिन चलने वाली इस प्रतियोगिता में पीवी सिंधु के पास अपना छठा मेडल जीतने का मौका है। वहीं, सात्विक-चिराग लगातार दूसरी बार मेडल जीतने के इरादे से उतरेंगे।
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप के बारे में सब कुछ जानिए…
बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप क्या है?
बैडमिंटन का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है। जो ओलिंपिक इयर को छोड़कर हर साल होता है। इसका आयोजन बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) करता है। यहां जीतने वाले खिलाड़ी को अपने इवेंट का वर्ल्ड चैंपियन माना जाता है।
पहली बार वर्ल्ड चैंपियनशिप 1977 में स्वीडन में हुई थी। शुरुआत में यह हर तीन साल में होती थी। 1983 के बाद 2 साल के अंतराल पर होने लगी। 2005 से यह ओलिंपिक इयर को छोड़कर हर साल आयोजित की जाती है।
अब तक कितनी बार आयोजित हुआ है?
नई दिल्ली में इस चैंपियनशिप का 30वां एडिशन है। पिछला आयोजन 2025 में पेरिस में हुआ था। डेनमार्क ने सबसे ज्यादा 5 बार इस टूर्नामेंट की मेजबानी की है। स्पेन, चीन, इंडोनेशिया और इंग्लैंड 3-3 बार होस्ट कर चुके हैं। पिछला मेजबान फ्रांस था।

कितनी कैटेगरी में मुकाबले होते हैं?
5 कैटेगरी में मैच होते हैं। इनमें पुरुष सिंगल्स, महिला सिंगल्स, पुरुष डबल्स, महिला डबल्स और मिक्स्ड डबल्स शामिल हैं।
हर कैटेगरी के विजेता को गोल्ड मेडल मिलता है। उसे अगले एडिशन तक वर्ल्ड चैंपियन का खिताब भी मिलता है। दोनों सेमीफाइनल हारने वाले खिलाड़ियों और जोड़ियों को ब्रॉन्ज दिया जाता है।
सबसे ज्यादा गोल्ड किसने जीते?
सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल चीन ने जीते हैं। वहां लिन डैन सबसे ज्यादा इंडिविजुअल गोल्ड जीतने वाले प्लेयर हैं। वे 5 बार वर्ल्ड चैंपियन का टाइटल अपने नाम कर चुके हैं। विमेंस कैटेगरी में जापान की अकाने यामागुची और स्पेन की कैरोलिना मारिन 3-3 बार वर्ल्ड चैंपियन बनी हैं।

भारत ने अब तक कितने मेडल जीते
भारत ने अब तक 15 मेडल जीते हैं। इनमें एक गोल्ड, 4 सिल्वर और 10 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इस टूर्नामेंट में भारत को पहला मेडल प्रकाश पादुकोण ने 1983 ने दिलाया था। जबकि, एकलौता गोल्ड पीवी सिंधु ने दिलाया है।
2011 के बाद से भारत ने हर एडिशन में कम से कम एक मेडल जीता है। अब तक भारत के 11 खिलाड़ी इस चैंपियनशिप में मेडल जीत चुके हैं। पीवी सिंधु, साइना नेहवाल और सात्विक-चिराग की जोड़ी अलग-अलग एडिशन में मेडल जीत चुकी है।

इस बार किस कैटेगरी में भारत के क्या चांसेज हैं?
सबसे ज्यादा चांस विमेंस सिंगल्स कैटेगरी में हैं। 15 में से 7 मेडल इसी कैटेगरी में आए हैं। पीवी सिंधु अच्छी लय में दिख रही हैं। उन्होंने पिछले महीने जापान ओपन भी जीता था। वे अब तक 5 मेडल जीत चुकी हैं। उन्हें 9वीं सीडिंग मिली है। वहीं, सात्विक-चिराग की जोड़ी ने पिछले साल ब्रॉन्ज दिलाया था।

भारत के कितने खिलाड़ी खेल रहे हैं?
भारत के 10 खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। उसे सभी 5 कैटेगरी में दो-दो एंट्री मिली हैं। आगे भारतीय टीम देखिए…
पुरुष एकल: लक्ष्य सेन, आयुष शेट्टी। महिला एकल: पीवी सिंधु, उन्नति हुडा।
पुरुष युगल: सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी-चिराग शेट्टी, हरिहरन अम्सकरुनन-एमआर अर्जुन।
महिला युगल: त्रिशा जॉली-गायत्री गोपीचंद, कविप्रिया सेल्वम-सिमरन सिंघी।
मिश्रित युगल: ध्रुव कपिला-तनीषा क्रास्टो, रोहन कपूर-रुथविका गद्दे, आशिथ सूर्या-अमृता प्रमुथेश।
पहले मैच में कौन किससे खेलेगा?



भारत ने पहले कब-कब मेजबानी की?
भारत ने इससे पहले सिर्फ एक बार 2009 में वर्ल्ड चैंपियनशिप की मेजबानी की थी। तब सभी मुकाबले हैदराबाद हैदराबाद के गाचीबोवली इंडोर स्टेडियम में खेले गए थे।
चीन के लिन डैन ने पुरुष सिंगल्स का खिताब जीता था। उसी के साथ उन्होंने लगातार तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाया था।
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