नई दिल्ली6 मिनट पहले
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लोन लेने के प्लान बना रहे ग्राहकों के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि बैंक या वित्तीय संस्थान उनके आवेदन का मूल्यांकन किस आधार पर करते हैं। किसी भी लोन को मंजूरी देने से पहले लेंडर्स (ऋणदाता) आपकी लोन चुकाने की क्षमता और आपकी नीयत का पूरी तरह से जोखिम मूल्यांकन (रिस्क असेसमेंट) करते हैं। इस रिपोर्ट में जानिए कि लोन अप्रूवल से जुड़े सभी अहम पहलू क्या हैं और अपनी पात्रता कैसे बढ़ाएं।
Q1. बैंक किसी भी लोन एप्लीकेशन को मंजूर या रिजेक्ट करने का फैसला कैसे लेते हैं?
उत्तर: लेंडर्स मुख्य रूप से दो प्रमुख बातों पर ध्यान केंद्रित करते हैं—आपकी भुगतान करने की क्षमता (ability to pay) और भुगतान करने की आपकी नीयत (intention to pay)। इसके लिए बैंक आपकी मासिक आय, क्रेडिट हिस्ट्री, वर्तमान वित्तीय देनदारियां, आय में स्थिरता, नियोक्ता की प्रोफाइल और कुल कर्ज जैसी चीजों का गहन विश्लेषण करते हैं। यदि अतीत का क्रेडिट व्यवहार जिम्मेदार रहा है और नया जोखिम बैंक की क्रेडिट पॉलिसी के अनुसार फिट बैठता है, तभी लोन अप्रूव किया जाता है।
Q2. क्या केवल ज्यादा सैलरी होने से बड़ा लोन आसानी से मिल जाता है?
उत्तर: नहीं, केवल आपकी ग्रॉस इनकम (कुल आय) ज्यादा होना ही लोन की गारंटी नहीं है। लेंडर्स आपकी आय की स्थिरता, निरंतरता, आपके एम्प्लॉयर की स्थिति और एम्प्लॉयमेंट टाइप (सरकारी, प्राइवेट या सेल्फ-एम्प्लॉयड) को भी देखते हैं। इसके अलावा आवेदक की उम्र, मांगी गई लोन राशि और लोन की अवधि (Tenure) भी अंतिम फैसले को प्रभावित करती है। हालांकि, अधिक आय आपकी पात्रता को बढ़ाती जरूर है, लेकिन यह एकमात्र पैमाना नहीं है।
Q3. मौजूदा कर्ज या EMI का लोन अप्रूवल पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर: बैंक आपकी कमाई के साथ-साथ यह भी देखते हैं कि आप पर पहले से कितना कर्ज है। इसे मापने के लिए FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) का उपयोग किया जाता है। नियम के मुताबिक, आपकी पुरानी EMI और नए लोन की प्रस्तावित EMI मिलाकर आपकी नेट मंथली इनकम के 55% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
उदाहरण के तौर पर:
₹1 लाख प्रति माह कमाने वाले दो व्यक्तियों ‘A’ और ‘B’ का क्रेडिट स्कोर समान है।
‘A’ की मौजूदा EMI ₹15,000 है, इसलिए वह आसानी से ₹40,000 तक की नई EMI का लोन ले सकता है।
वहीं ‘B’ की मौजूदा EMI पहले से ही ₹55,000 है। ऐसी स्थिति में ‘B’ की अतिरिक्त लोन लेने की क्षमता सीमित हो जाती है और उसका आवेदन रिजेक्ट हो सकता है।
Q4. आय का जरिया (Source of Income) लोन अप्रूवल को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: लेंडर्स यह देखते हैं कि आपकी आय टिकाऊ, पर्याप्त और स्पष्ट रूप से कागजों में दर्ज है या नहीं:
सैलरीड (नौकरीपेशा): इन्हें सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलती है क्योंकि इनकी आय का पैटर्न तय और डॉक्यूमेंटेड होता है। सरकारी कर्मचारियों और बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) में कार्यरत लोगों का लोन अप्रूवल रेट सबसे अधिक होता है।
स्टार्टअप या रिस्की सेक्टर: अगर आपकी कंपनी बहुत नई है (जैसे स्टार्टअप) या ऐसे सेक्टर में है जहां भविष्य में अनिश्चितता हो सकती है, तो उच्च आय के बावजूद आवेदन खारिज हो सकता है।
सेल्फ-एम्प्लॉयड / बिजनेस ओनर: इनकी जांच फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, बैंकिंग बिहेवियर और बिजनेस मॉडल के आधार पर होती है। अगर आय में निरंतरता नहीं है, तो अप्रूवल में दिक्कत आ सकती है।
प्रोफेशनल्स (डॉक्टर, वकील, CA) व फ्रीलांसर्स: प्रोफेशनल्स और फ्रीलांसर्स की आय में उतार-चढ़ाव (Variable Income) के कारण बैंक इनके दस्तावेजों और वित्तीय स्थिति की अधिक सख्ती से जांच करते हैं।
Q5. क्या अच्छा क्रेडिट स्कोर (Credit Score) होने से लोन मिलना शत-प्रतिशत तय है?
उत्तर: एक मजबूत क्रेडिट स्कोर यह दर्शाता है कि आप अनुशासित कर्जदार रहे हैं और डिफॉल्ट का जोखिम कम है। हालांकि, सिर्फ क्रेडिट स्कोर अच्छा होना ही काफी नहीं है; बैंक को आपकी आय और मौजूदा देनदारियों का संतुलन भी देखना पड़ता है।
दूसरी तरफ, यदि आपका क्रेडिट स्कोर खराब है, तो बाकी पात्रता शर्तें पूरी करने के बावजूद लोन मिलने की संभावना न के बराबर होती है। पुराने बकाया, देरी से भुगतान या डिफॉल्ट आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।
Q6. अगर एक बैंक लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट कर दे, तो आवेदक के पास क्या विकल्प हैं?
उत्तर: हर लेंडर की अपनी रिस्क एपेटाइट (जोखिम लेने की क्षमता) और क्रेडिट नीतियां होती हैं। यदि एक बैंक आपकी मौजूदा वित्तीय स्थिति के कारण लोन देने से मना करता है, तो संभव है कि दूसरा लेंडर अपनी नीतियों के तहत आपको लोन दे दे।
ऐसे में वित्तीय मार्केटप्लेस (Financial Marketplaces) काफी मददगार साबित होते हैं। ग्राहक विभिन्न लेंडर्स के ऑफर्स की तुलना कर सकते हैं और यह जान सकते हैं कि उनकी वित्तीय स्थिति और क्रेडिटवर्दीनेस के हिसाब से किस लेंडर के पास अप्रूवल की संभावना सबसे अधिक है।
Q7. किसी भी लोन आवेदन से पहले आवेदक को किन बातों का संतुलन बनाना चाहिए?
उत्तर: लोन लेने के लिए किसी एक पैमाने (जैसे केवल क्रेडिट स्कोर या केवल आय) को बेहतर बनाने के बजाय पूरे वित्तीय प्रोफाइल को संतुलित करना चाहिए:
आय: पुनर्भुगतान की क्षमता (Repayment Capacity) दर्शाती है।
क्रेडिट हिस्ट्री: अतीत के क्रेडिट व्यवहार का प्रमाण देती है।
मौजूदा देनदारियां: यह तय करती हैं कि आप कितना अतिरिक्त कर्ज सह सकते हैं।
लेंडर्स इन तीनों का कुल जोखिम आंकते हैं। इसलिए वही लोन चुनें जिसे आप लंबी अवधि तक बिना वित्तीय तनाव के आसानी से चुका सकें।
फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो (FOIR)
यह एक वित्तीय पैमाना है जो बैंक यह जांचने के लिए इस्तेमाल करते हैं कि आपकी कमाई का कितना प्रतिशत हिस्सा पहले से तय खर्चों (जैसे मकान का किराया, पुरानी लोन EMI) में जा रहा है।
आमतौर पर बैंकों का मानना होता है कि व्यक्ति को अपनी आय का 45% से 50% हिस्सा व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों के लिए रखना चाहिए, इसलिए 55% से अधिक का FOIR जोखिम भरा माना जाता है।
