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FSSAI Bans Dabur Honey And Ghee Over Misleading 100% Claims


4 मिनट पहले

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फूड रेगुलेटर FSSAI ने डाबर इंडिया पर भ्रामक और ‘100%’ दावों के साथ अपने कई खाद्य प्रोडक्ट्स को बेचने पर रोक लगा दी है। इसमें डाबर का शहद और गाय का घी भी शामिल हैं।

FSSAI ने इन दावों को गुमराह करने वाला बताया है और कंपनी को तुरंत इन चिन्हित सामानों की बिक्री बंद करने का निर्देश दिया है। FSSAI ने डाबर से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।

किन-किन प्रोडक्ट्स पर लगी रोक?

  • शहद और ऑर्गेनिक हनी
  • गाय का घी
  • सेब का सिरका
  • वर्जिन कोकोनट ऑयल और तिल का तेल
  • नारियल पानी और नारियल दूध

FSSAI की जांच में क्या पता चला

FSSAI के अनुसार, कंपनी की वेबसाइट पर बेचे जा रहे खाद्य पदार्थों पर कई प्रकार के भ्रामक ‘100%’ दावे पाए गए थे। इनमें ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्यूरिटी गारंटिड’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे लेबल शामिल थे।

रेगुलेटर का कहना है कि ‘100 प्रतिशत’ दावों का यह उपयोग FSS (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018 का उल्लंघन करता है। ये दावे अस्पष्ट, असत्यापित और आम उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं।

नियमों के अन्य बड़े उल्लंघन

  • ‘जैविक भारत’ लोगो: डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर बिना किसी वैध FSSAI ऑर्गेनिक एंडोर्समेंट के ‘जैविक भारत’ लोगो पाया गया।
  • कंपाउंड फूड्स पर गलत दावा: डाबर होममेड कोकोनट मिल्क को “100% Purity” के दावे के साथ मार्केट किया जा रहा था। FSS नियम, 2018 के तहत कंपाउंड फूड्स (मिश्रित खाद्य पदार्थों) के लिए ऐसा दावा करने की अनुमति बिल्कुल नहीं है।

पहले भी दिया गया था नोटिस, कार्रवाई न होने पर लिया फैसला

FSSAI ने बताया कि उसने पहले भी डाबर को नोटिस जारी कर इस प्रकार के भ्रामक “100%” दावों को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कंपनी की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया, जिसके बाद FSSAI को यह कड़ा प्रोहिबिशन (बैन) ऑर्डर जारी करना पड़ा। अब डाबर को 15 दिनों के अंदर यह बताना होगा कि उन्होंने FSSAI के आदेश के बाद क्या कदम उठाए हैं।

नॉलेज बॉक्स: 100% दावे पर रोक क्यों?

खाद्य विज्ञान के अनुसार, लगभग किसी भी प्रोसेस्ड या पैक किए गए खाद्य पदार्थ में प्राकृतिक नमी, हवा या प्रोसेसिंग घटकों के कारण ‘100% शुद्ध’ होना वैज्ञानिक रूप से साबित करना लगभग असंभव होता है। इसलिए बिना पुख्ता लैबोरेटरी सबूत के यह लिखना कानूनन अपराध है।



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