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Hrishikesh Mukherjee Birth Anniversary | Amitabh Bachchan Rajesh Khanna Story


11 मिनट पहलेलेखक: अभय पांडेय

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भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए ऋषिकेश मुखर्जी को दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1999) और पद्म विभूषण (2001) से सम्मानित किया गया। - Dainik Bhaskar

भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए ऋषिकेश मुखर्जी को दादा साहब फाल्के पुरस्कार (1999) और पद्म विभूषण (2001) से सम्मानित किया गया।

साल 1973 के आसपास का समय था। फिल्म ‘नमक हराम’ की शूटिंग चल रही थी। सेट पर एक गाना फिल्माया जा रहा था। सेट पर हिंदी सिनेमा के दो बड़े एक्टर अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना मौजूद थे, लेकिन शूटिंग के बीच दोनों टेलीफोन पर बात करने में व्यस्त हो गए।

डायरेक्टर को यह बात पता चली तो उन्होंने कहा- “अच्छा! अभी मैं दोनों को देखता हूं।” इसके बाद उन्होंने दोनों को बुलाया, सामने बैठाया और डांटते हुए कहा- “तुम यहां काम करने आए हो या फोन करने के लिए?”

इसके बाद डायरेक्टर ने चौकीदार को बुलाया और स्टूडियो का गेट बंद करवा दिया। साफ कह दिया गया कि जब तक गाने की शूटिंग पूरी नहीं होगी, कोई बाहर नहीं जाएगा।

रात करीब साढ़े 12 बजे तक गाने की शूटिंग चलती रही। न कोई बाहर गया और न ही किसी को अंदर आने दिया गया।

हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर ऋषिकेश मुखर्जी की। आज उनकी 104वीं बर्थ एनिवर्सरी पर जानते हैं उनकी जिंदगी और फिल्मों से जुड़े कुछ ऐसे ही किस्से।

मैथ्स-साइंस पढ़ाया, फिर फिल्म एडिटर बने ऋषिकेश मुखर्जी का जन्म 30 सितंबर 1922 को तत्कालीन कलकत्ता में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन किया। फिल्मों में आने से पहले कुछ समय तक उन्होंने गणित और विज्ञान भी पढ़ाया।

फिल्मों की तरफ झुकाव उन्हें कलकत्ता के न्यू थिएटर्स तक ले गया। यहां उन्होंने कैमरा और एडिटिंग का काम सीखा। इसके बाद 1951 में मुंबई पहुंचे और बिमल रॉय के साथ फिल्म एडिटर और असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म ‘पहला आदमी’, ‘मां’ और ‘दो बीघा जमीन’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था।

ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म ‘पहला आदमी’, ‘मां’ और ‘दो बीघा जमीन’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था।

पहली फिल्म फ्लॉप, दूसरी फिल्म ने पहचान बना दी

ऋषिकेश मुखर्जी ने 1957 में ‘मुसाफिर’ से बतौर निर्देशक शुरुआत की। फिल्म सफल नहीं रही। 1959 में आई फिल्म ‘अनाड़ी’ ने उन्हें पहचान दिलाई। फिल्म को पांच फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले और ऋषिकेश मुखर्जी खुद बेस्ट डायरेक्टर की दौड़ में थे, लेकिन यह पुरस्कार उनके गुरु बिमल रॉय को उनकी फिल्म ‘सुजाता’ के लिए मिला।

इसके बाद ऋषि दा ने लगातार ऐसी फिल्में बनाईं जिनमें न तो कहानी के लिए बड़े-बड़े सेट जरूरी थे और न ही हर सीन में स्टार का दबदबा। उनके सिनेमा को अक्सर भारतीय मिडिल क्लास की बदलती जिंदगी से जोड़कर देखा गया। उनकी कहानियों में बड़े सामाजिक मुद्दे भी आए, लेकिन उनका तरीका बेहद सामान्य और घरेलू रहा।

उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘अनुराधा’, ‘छाया’, ‘असली-नकली’, ‘अनुपमा’, ‘आशीर्वाद’, ‘सत्यकाम’, ‘गुड्डी’, ‘आनंद’, ‘बावर्ची’, ‘अभिमान’, ‘नमक हराम’, ‘मिली’, ‘चुपके-चुपके’, ‘गोलमाल’ और ‘खूबसूरत’ शामिल हैं।

‘आनंद’ में किशोर कुमार को लेना चाहते थे ऋषि दा फिल्म ‘आनंद’ में राजेश खन्ना के किरदार को आज हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में गिना जाता है। हालांकि, इस भूमिका के लिए शुरुआत में किशोर कुमार का नाम सामने आया था, लेकिन किशोर कुमार फिल्म का हिस्सा क्यों नहीं बने, इसे लेकर दो अलग-अलग किस्से मिलते हैं।

पहला किस्सा किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने विक्की लालवानी के साथ बातचीत में बताया था कि किशोर कुमार का एक बंगाली इवेंट मैनेजर से पैसों को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद उन्होंने अपने गार्ड को निर्देश दिया था कि किसी भी बंगाली व्यक्ति को अंदर न आने दिया जाए।

ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म ‘पहला आदमी’, ‘मां’ और ‘दो बीघा जमीन’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था।

ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म ‘पहला आदमी’, ‘मां’ और ‘दो बीघा जमीन’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया था।

इसी दौरान ऋषिकेश मुखर्जी किशोर कुमार से मिलने उनके घर पहुंचे। ऋषि दा खुद बंगाली थे। गार्ड ने उन्हें उसी इवेंट मैनेजर का व्यक्ति समझ लिया और गेट पर ही रोक दिया। जिसके चलते ऋषि दा किशोर कुमार से मिल नहीं पाए और लौट गए। वहीं, इसको लेकर एक दूसरा वर्जन भी है।

गीतकार गुलजार ने अपनी किताब ‘एक्चुअली… आई मेट देम: ए मेमॉयर’ में लिखा था कि ‘आनंद’ में किशोर कुमार को लेकर बातचीत लगभग तय हो चुकी थी, लेकिन किशोर कुमार शायद यह गंभीर किरदार निभाने के मूड में नहीं थे। गुलजार के मुताबिक, शूटिंग से कुछ दिन पहले किशोर कुमार अचानक पूरी तरह गंजे होकर ऑफिस पहुंचे।

वह वहां ऋषिकेश मुखर्जी को चिढ़ाते हुए नाचने-गाने लगे और कहने लगे- “अब क्या करोगे ऋषि?”

ऐसे हुई ‘आनंद’ में राजेश खन्ना की एंट्री

किशोर कुमार के साथ बात नहीं बन पाई तो ऋषिकेश मुखर्जी ने अगला विचार शशि कपूर को लेकर किया, लेकिन शशि कपूर के पास उस वक्त फिल्म के लिए जरूरी डेट्स नहीं थीं।

ऋषि दा के सामने फिर सवाल था कि अब ‘आनंद’ का किरदार किसे दिया जाए। इसी दौरान एक दिन राजेश खन्ना उनके पास पहुंचे। उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी से कहा कि सुना है आप एक बहुत शानदार कहानी पर फिल्म बना रहे हैं और वह कहानी सुनना चाहते हैं।

साल 1971 में आई फिल्म ‘आनंद’ में राजेश खन्ना ने आनंद सहगल का मुख्य किरदार निभाया था।

साल 1971 में आई फिल्म ‘आनंद’ में राजेश खन्ना ने आनंद सहगल का मुख्य किरदार निभाया था।

ऋषि दा ने साफ कहा कि वह अपनी फिल्मों की कहानी किसी को नहीं सुनाते, लेकिन फिर एक शर्त रखी कि अगर राजेश खन्ना फिल्म के लिए लगातार और पर्याप्त डेट्स दे सकते हैं, तो वह उन्हें कहानी सुनाने के लिए तैयार हैं। राजेश खन्ना ने हामी भर दी। जैसे ही उन्होंने कहानी सुनी, उन्हें किरदार पसंद आया और राजेश खन्ना फिल्म करने के लिए तैयार हो गए।

बता दें कि राजेश खन्ना फिल्म के लिए अपनी सामान्य फीस लेने के बजाय कथित तौर पर मुंबई क्षेत्र के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स लिए।

धर्मेंद्र ने शराब पीकर रातभर फोन किया

निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने फिल्म आनंद में धर्मेंद्र को भी रोल ऑफर किया था। फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा खुद धर्मेंद्र ने कपिल शर्मा के शो में सुनाया था।

धर्मेंद्र के मुताबिक, ऋषिकेश मुखर्जी ने एक फ्लाइट में उन्हें ‘आनंद’ की कहानी सुनाई थी। ऋषि दा ने उन्हें बताया था कि फिल्म में क्या होगा और उनके किरदार को किस तरह निभाया जाएगा। धर्मेंद्र को लगा था कि वह इस फिल्म का हिस्सा बनने वाले हैं। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि फिल्म राजेश खन्ना के साथ शुरू हो गई है।

ऋषिकेश मुखर्जी और धर्मेंद्र ने ‘अनुपमा’, ‘मझली दीदी’, ‘सत्यकाम’, ‘गुड्डी’, ‘चुपके चुपके’ और ‘चैताली’ समेत मुख्य रूप से 6 फिल्मों में एक साथ काम किया था।

ऋषिकेश मुखर्जी और धर्मेंद्र ने ‘अनुपमा’, ‘मझली दीदी’, ‘सत्यकाम’, ‘गुड्डी’, ‘चुपके चुपके’ और ‘चैताली’ समेत मुख्य रूप से 6 फिल्मों में एक साथ काम किया था।

धर्मेंद्र इस फैसले से इतने नाराज हुए कि उन्होंने शराब पीने के बाद ऋषिकेश मुखर्जी को रातभर फोन किए। वह बार-बार पूछ रहे थे कि जब उन्हें कहानी सुनाई गई थी और भूमिका के बारे में बताया गया था, तो फिल्म राजेश खन्ना को क्यों दे दी गई।

धर्मेंद्र ने बताया कि ऋषि दा फोन पर उनसे कहते रहे- ‘धरम, सो जा, सुबह बात करेंगे।’ लेकिन फोन कटते ही वह दोबारा कॉल कर देते थे और फिर वही सवाल पूछते थे।

दिलचस्प बात यह है कि इस घटना के बाद दोनों के पेशेवर रिश्ते खराब नहीं हुए। धर्मेंद्र ने आगे चलकर ऋषिकेश मुखर्जी के साथ ‘गुड्डी’, ‘चुपके-चुपके’ जैसी फिल्मों में काम किया।

‘गुड्डी’ से 10 दिन बाद अमिताभ बच्चन को निकाल दिया

ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘गुड्डी’ (1971) जया भादुड़ी (जया बच्चन) की बतौर मुख्य अभिनेत्री पहली फिल्म थी इस फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा खुद अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के मंच पर सुनाया था।

अमिताभ ने बताया था कि उन्हें ‘गुड्डी’ में जया भादुड़ी के साथ हीरो के तौर पर कास्ट किया गया था। उन्होंने फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर दी थी, लेकिन करीब 10 दिन बाद ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें फिल्म से हटा दिया।

अमिताभ के मुताबिक, उस समय ‘गुड्डी’ के साथ-साथ ‘आनंद’ पर भी काम चल रहा था। ‘आनंद’ में राजेश खन्ना मुख्य भूमिका में थे और ऋषि दा को उम्मीद थी कि फिल्म बड़ी हिट साबित होगी।

‘गुड्डी’ (1971) में दिलीप कुमार, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना और प्राण ने कैमियो अपीयरेंस किए थे।

‘गुड्डी’ (1971) में दिलीप कुमार, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना और प्राण ने कैमियो अपीयरेंस किए थे।

‘गुड्डी’ में जया का किरदार धर्मेंद्र का बहुत बड़ा फैन था। अमिताभ ने बताया कि ऋषिकेश मुखर्जी नहीं चाहते थे कि उनके सामने कोई ऐसा जाना-पहचाना चेहरा हो, जिसकी अपनी स्टार पहचान हो। उन्हें डर था कि इससे जया के किरदार की मासूमियत और उसके धर्मेंद्र-फैन होने वाली कहानी प्रभावित हो सकती है।

इसलिए शूटिंग के करीब 10 दिन बाद ऋषि दा ने अमिताभ से कहा कि वह फिल्म छोड़ दें। साथ ही उन्होंने भरोसा दिया कि आगे वह उनके साथ जरूर काम करेंगे। बाद में अमिताभ की जगह समित भंजा को कास्ट किया गया।

बिग बी और राजेश खन्ना को सेट पर बंद कर दिया इसी फिल्म की शूटिंग से जुड़ा एक और किस्सा ऋषिकेश मुखर्जी के सख्त कामकाजी अंदाज को दिखाता है। अभिनेता रजा मुराद ने बताया था कि ‘सूनी रे सेजरिया’ की शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन फोन कॉल में व्यस्त हो गए थे। ऋषि दा ने दोनों को बुलाकर डांटा।

इसके बाद उन्होंने चौकीदार को बुलाया और स्टूडियो का गेट लॉक करवा दिया। कहा गया कि जब तक गाना पूरा नहीं होगा, कोई सेट से बाहर नहीं जाएगा। रात करीब 12:30 बजे शूटिंग खत्म होने के बाद ही गेट खोला गया।

‘गोलमाल’ अपने ही घर में सिर्फ 40 दिन में बना दी 1979 की ‘गोलमाल’ आज भी हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय कॉमेडी फिल्मों में शामिल है। अमोल पालेकर, उत्पल दत्त, बिंदिया गोस्वामी और दीना पाठक जैसे कलाकारों वाली इस फिल्म को ऋषिकेश मुखर्जी ने बेहद सीमित संसाधनों में बनाया।

फिल्म का लगभग पूरा हिस्सा ऋषिकेश मुखर्जी के बांद्रा स्थित बंगले ‘अनुपमा’ में शूट हुआ। घर के हॉल को भवानी शंकर के ऑफिस में बदला गया, ड्रॉइंग रूम को राम प्रसाद के घर की तरह इस्तेमाल किया गया और गार्डन में पार्टी का सीन फिल्माया गया।

सबसे दिलचस्प बात यह कि फिल्म सिर्फ 40 दिनों में पूरी हो गई थी। ऋषिकेश मुखर्जी ने खुद बताया था कि वह बजट और कलाकारों की तारीखों को लेकर अनुशासन रखते थे, क्योंकि वह किसी और के पैसे से फिल्म बना रहे होते थे।

व्हीलचेयर पर बैठकर दो फिल्में डायरेक्ट कीं ऋषिकेश मुखर्जी की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब बीमारी ने उनकी शारीरिक क्षमता को प्रभावित किया। 1961 में उन्हें गंभीर आर्थराइटिस अटैक आया।

इसके बावजूद उन्होंने काम नहीं छोड़ा। उन्होंने ‘अनुपमा’ और ‘असली-नकली’ का निर्देशन व्हीलचेयर से किया।

अमिताभ-जया की शादी की खबर सबसे पहले मिली अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी का रिश्ता भी ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों से जुड़ा हुआ है। दोनों पहली बार ‘गुड्डी’ के दौरान मिले थे। अमिताभ बच्चन ने बाद में अपने ब्लॉग में बताया था कि जब उन्होंने और जया ने शादी करने का फैसला किया, तो अपने माता-पिता के बाद जिन लोगों को यह खबर दी, उनमें ऋषिकेश मुखर्जी भी शामिल थे।

अमिताभ ने ऋषि दा को अपने बेटे जैसा माना और ऋषि दा ने भी उन्हें परिवार का हिस्सा समझा।

अमिताभ ने ऋषि दा को अपने बेटे जैसा माना और ऋषि दा ने भी उन्हें परिवार का हिस्सा समझा।

राज कपूर और ऋषिकेश मुखर्जी की दोस्ती

ऋषिकेश मुखर्जी और राज कपूर बहुत खास दोस्त थे। दोनों सोवियत संघ के दौरे के दौरान करीब आए थे। ऋषि दा के मुताबिक, वे वहां रातभर साथ बैठकर शतरंज खेला करते थे।

ऋषिकेश मुखर्जी की पहली फिल्म ‘मुसाफिर’ सफल नहीं रही थी। इसके बाद उन्हें काम मिलने में परेशानी हो रही थी। ऐसे समय में राज कपूर और देव आनंद ने फिल्म निर्माता एल.बी. लछमन से ऋषिकेश को मौका देने की बात कही, जिसके बाद उन्हें ‘अनाड़ी’ निर्देशित करने का अवसर मिला।

राज कपूर से जुड़ा एक और किस्सा ऋषिकेश मुखर्जी ने बताया था। लंदन में शूटिंग के दौरान जब राज को पता चला कि ऋषि दा होटल में ठहरे हैं, तो वे रात में उनसे मिलने पहुंचे। राज ने उन्हें अपने घर चलने को कहा। उस समय ऋषिकेश गंभीर गठिया से परेशान थे। राज कपूर ने कई दिनों तक उनकी देखभाल की, कंबल ओढ़ाया, दूध दिया और उनके साथ वक्त बिताया।

राज कपूर और ऋषिकेश मुखर्जी ने तीन फिल्मों—‘अनाड़ी’ (1959), ‘आशिक’ (1962) और ‘नौकरी’ (1978) में साथ काम किया।

राज कपूर और ऋषिकेश मुखर्जी ने तीन फिल्मों—‘अनाड़ी’ (1959), ‘आशिक’ (1962) और ‘नौकरी’ (1978) में साथ काम किया।

बता दें कि ‘आनंद’ ऋषिकेश मुखर्जी और राज कपूर की गहरी दोस्ती से प्रेरित थी। राज कपूर की गंभीर बीमारी के दौरान ऋषि दा को अपने दोस्त को खोने का डर सताने लगा। इसी भाव से उन्होंने फिल्म की कहानी लिखी। राजेश खन्ना का आनंद सहगल किरदार राज कपूर के जिंदादिल स्वभाव पर आधारित था, जो बीमारी में भी दूसरों को हंसाते थे। वहीं, अमिताभ बच्चन का डॉ. भास्कर बनर्जी किरदार ऋषिकेश मुखर्जी से प्रेरित था।

बीमारी के दौरान इंदिरा गांधी ने उनके घर बैठक रखी

ऋषिकेश मुखर्जी सिर्फ बेहतरीन फिल्म निर्देशक ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री की योजना और नीतियों से भी जुड़े रहे। वे सेंसर बोर्ड यानी CBFC के चेयरमैन और नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) के चेयरमैन भी रहे।

एक्टर अंजन श्रीवास्तव ने बताया था कि ऋषि दा प्लानिंग से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी थे। एक बार बीमार पड़ने पर इंदिरा गांधी ने उनके घर पर ही बैठक रखी, क्योंकि उनका शामिल होना जरूरी माना गया।

टीवी शो ‘यस बॉस’ के बड़े फैन थे

अभिनेता राकेश बेदी ने वरिंदर चावला के यूट्यूब चैनल पर ऋषिकेश मुखर्जी से जुड़ा भावुक किस्सा सुनाया था। उन्होंने बताया था कि ऋषि दा उनके टीवी शो ‘यस बॉस’ के बड़े फैन थे और हर दो महीने में उन्हें फोन कर शो की तारीफ करते थे।

बीमारी के दौरान जब वह बिस्तर पर थे, तब भी टीवी पर ‘यस बॉस’ देखते और राकेश को फोन करते थे। आखिरी दिनों में उन्होंने राकेश को फोन कर कहा था कि यह शो रात 9 से 9:30 बजे आता है और मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मुझे आधा घंटा नहीं उठाना, लेकर जाना तो इस आधे घंटे के बाद लेकर जाना। यह बात सुनकर राकेश बेदी पूरी रात रोए थे।

ऋषिकेश मुखर्जी ने चार दशक से ज्यादा के करियर में उन्होंने 42 फिल्मों का निर्देशन किया। 27 अगस्त 2006 को मुंबई में 83 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था।

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