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ICICI बैंक का मुनाफा 16% बढ़कर ₹14,805 करोड़:पहली तिमाही में अनुमान से बेहतर रहे नतीजे, बैंक की एसेट क्वालिटी भी सुधरी




ICICI बैंक लिमिटेड ने अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 15.95% की बढ़त दर्ज की है। यह बढ़कर 14,804.5 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। बैंक का यह मुनाफा बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर रहा। इस निजी क्षेत्र के बड़े बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी उम्मीद से ज्यादा तेजी से बढ़ते हुए 12.7% की एनुअल ग्रोथ के साथ 24,384.35 करोड़ रुपए रही। बाजार के अनुमानों को पीछे छोड़ा CNBC-TV18 के एनालिस्ट पोल के अनुसार, बाजार को उम्मीद थी कि इस तिमाही में ICICI बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 9% की बढ़त के साथ 23,689 करोड़ रुपए रह सकती है। वहीं, नेट प्रॉफिट में पिछले साल के मुकाबले 7% की ग्रोथ का अनुमान था, जिसके तहत इसके 13,616 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद जताई गई थी। बैंक ने मुनाफे और इंटरेस्ट इनकम दोनों ही मामलों में इन अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। मार्जिन और एसेट क्वालिटी में सुधार जून तिमाही के दौरान बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में तिमाही और सालाना दोनों आधार पर सुधार देखने को मिला है। इस तिमाही में NIM 4.36% दर्ज किया गया। हालांकि, मार्च तिमाही में यह 4.32% और पिछले साल की समान अवधि में 4.34% के स्तर पर था। इसके साथ ही बैंक की एसेट क्वालिटी को भी और मजबूती मिली है। लोन बुक और डिपॉजिट में 14% की ग्रोथ 30 जून 2026 तक बैंक का कुल लोन पोर्टफोलियो सालाना आधार पर 19.6% की रफ्तार से बढ़कर 16,31,260 करोड़ रुपए हो गया। वहीं कुल डिपॉजिट में भी 14% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 18,33,586 करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इसी तरह औसत डिपॉजिट भी 14% बढ़कर 17,48,028 करोड़ रुपए रहा है, जबकि बैंक का एवरेज कासा (CASA) रेशियो 38.1% दर्ज किया गया है। बैंक को एनपीए के मोर्चे पर राहत मिली 30 जून 2026 तक बैंक का ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) रेशियो घटकर 1.38% पर आ गया है, जो मार्च के अंत में 1.40% और पिछले साल की समान अवधि में 1.67% था। वहीं बैंक का नेट एनपीए रेशियो की बात करें तो यह 0.35% रहा, जो पिछली तिमाही में 0.33% और एक साल पहले 0.41% के स्तर पर था। बैंक ने 2026 में अब तक 8.7% रिटर्न दिया शुक्रवार को ICICI बैंक के शेयर 1.84% की बढ़त के साथ 1,444.3 रुपए पर बंद हुए थे। साल 2026 में अब तक इस स्टॉक ने निवेशकों को 8.7% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में देखें तो इसी अवधि के दौरान शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स निफ्टी 50 में 6.9% की गिरावट दर्ज की गई है, यानी बैंक ने मार्केट के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। क्या होती है नेट इंटरेस्ट इनकम और नेट इंटरेस्ट मार्जिन? नेट इंटरेस्ट इनकम (NII): बैंक मुख्य रूप से दो काम करता है- जमा यानी डिपॉजिट स्वीकार करना और लोन देना। लोन देने पर बैंक को जो ब्याज मिलता है, उसमें से जमाकर्ताओं को दिए जाने वाले ब्याज को घटाने के बाद बची रकम को नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) कहते हैं। यह बैंक की मुख्य कमाई होती है। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM): यह किसी बैंक की वित्तीय सेहत को मापने का एक पैमाना है। बैंक अपनी कुल ब्याज कमाने वाली संपत्तियों (जैसे लोन) पर जितना ब्याज कमाता है और जमा राशि पर जितना ब्याज चुकाता है, उसके अंतर को प्रतिशत में व्यक्त करने पर इसे नेट इंटरेस्ट मार्जिन कहा जाता है। नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA क्या है? जब कोई व्यक्ति या संस्था किसी बैंक से लोन लेकर उसे वापस नहीं करती, तो उसे बैड लोन या नॉन परफॉर्मिंग एसेट या NPA कहा जाता है। यानी इन लोन्स की रिकवरी की उम्मीद काफी कम होती है। नतीजतन बैंकों का पैसा डूब जाता है और बैंक घाटे में चला जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, अगर किसी बैंक लोन की किस्त 90 दिनों तक यानी तीन महीने तक नहीं चुकाई जाती है, तो उस लोन को NPA घोषित कर दिया जाता है। अन्य वित्तीय संस्थाओं के मामले में यह सीमा 120 दिन की होती है। बुक को क्लियर करने के लिए बैंकों को ऐसा करना होता है।



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