कुछ ही क्षण पहले
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केंद्रीय कैबिनेट ने आज 14 अक्टूबर को IDBI बैंक के नए खरीदार के नाम पर मुहर लगा दी है। इस फैसले के तहत केंद्र सरकार और LIC मिलकर बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी ‘फेयरफैक्स’ को बेचेंगे।
यह सौदा ₹52,877 करोड़ में तय हुआ है। 2022 में टाटा ग्रुप को एअर इंडिया बेचे जाने के बाद, यह केंद्र सरकार का सबसे बड़ा विनिवेश है।
सरकार और LIC के पास रहेगी 34% हिस्सेदारी
केंद्र सरकार IDBI बैंक में अपनी 30.48% और LIC अपनी 30.24% हिस्सेदारी फेयरफैक्स कंपनी को बेचेगी। इस सौदे के बाद भी बैंक में सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% शेयर यानी कुल 34% बने रहेंगे।
IDBI बैंक में हिस्सेदारी
| शेयरहोल्डर | अभी हिस्सेदारी | डील के बाद |
| फेयरफैक्स | 0% | 60.72% (नया प्रमोटर) |
| LIC | 49.24% | 19.00% |
| केंद्र सरकार | 45.48% | 15.00% |
| पब्लिक/अन्य | 5.28% | 5.28% |
अनुमान से ₹5 ज्यादा बोली, इसलिए डील मंजूर
सरकार ने बैंक के एक शेयर की सही कीमत यानी फेयर वैल्यू तय करने के लिए दो स्वतंत्र एजेंसियों की मदद ली थी। इन एजेंसियों ने कैलकुलेशन के बाद बताया कि IDBI बैंक के एक शेयर की तय कीमत ₹75.99 होनी चाहिए।
कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स ने सरकार के तय किए गए इस बेस प्राइस से ज्यादा यानी ₹81 प्रति शेयर के हिसाब से बोली लगाई। चूंकि फेयरफैक्स की बोली सरकार के तय अनुमान से प्रति शेयर ₹5.01 ज्यादा थी, इसलिए सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया।
IDBI बैंक को बेचने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी
इसकी शुरुआत सबसे पहले 7 अक्टूबर 2022 को हुई थी, जब सरकार ने बैंक को खरीदने के इच्छुक खरीदारों से आवेदन मंगाए थे।
शुरुआत में 5 बड़ी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई। सरकार ने जब सभी के दस्तावेजों और नियमों की जांच की, तो इनमें से 4 कंपनियां ही योग्य पाई गईं।
इसके बाद आखिरी दौर में दो कंपनियों ने अपने तकनीकी कागजात और बोली जमा की। सबसे बेहतर बोली लगाकर कनाडाई कंपनी ने यह डील अपने नाम कर ली।
