7 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र
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माता-पिता चाहते थे कि श्रिया सरन पढ़ाई पूरी करने के बाद एक्टिंग में आएं, लेकिन एक म्यूजिक वीडियो ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। तेलुगु फिल्म ‘इष्टम’ से करियर शुरू करने वाली श्रिया ने साउथ की फिल्मों में पहचान बनाई, लेकिन बॉलीवुड में संघर्ष करना पड़ा। ‘तुझे मेरी कसम’, ‘शुक्रिया’ और ‘मिशन इस्तांबुल’ से उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
उन्होंने करियर में गलत फैसले लेने की बात भी स्वीकार की। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। रजनीकांत की ‘शिवाजी’, अजय देवगन की ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी और एसएस राजामौली की ‘आरआरआर’ ने उन्हें नई पहचान दी।
आज की सक्सेस स्टोरी में श्रिया सरन के करियर से जुड़ी खास बातें।

डांस टीचर की सलाह ने बदली जिंदगी, बिना प्लानिंग के फिल्मों में आईं
श्रिया सरन का फिल्मी सफर पारंपरिक तरीके से शुरू नहीं हुआ। उनके परिवार का फिल्मों से कोई संबंध नहीं था और न ही उन्होंने बचपन से अभिनेत्री बनने का सपना देखा था। उनका जन्म 11 सितंबर 1982 को हुआ। हरिद्वार में शुरुआती जीवन बिताने के बाद वह दिल्ली आईं। वहां उन्होंने लेडी श्रीराम कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई के साथ कथक की ट्रेनिंग भी ली।
कॉलेज के दिनों में म्यूजिक वीडियो में काम करने का मौका मिलने से श्रिया की जिंदगी बदल गई। उनकी डांस टीचर ने प्रोडक्शन कंपनी को उनका नाम सुझाया था। श्रिया ने इसे करियर बनाने की योजना के बजाय नया अनुभव माना और ऑडिशन देने पहुंच गईं।
इसके बाद वह ‘थिरकती क्यों हवा’ म्यूजिक वीडियो में नजर आईं, जिसने फिल्मों के दरवाजे खोले। उन्हें तेलुगु फिल्म ‘इष्टम’ का ऑफर मिला और 17 साल की उम्र में वह अभिनय की दुनिया में आ गईं।
माता-पिता की शर्त थी, पहले पूरी करो पढ़ाई
श्रिया के माता-पिता उनके एक्टिंग के फैसले से बहुत उत्साहित नहीं थे। उनके पिता इंजीनियर थे और मां स्कूल में केमिस्ट्री की टीचर थीं। परिवार चाहता था कि बेटी पहले पढ़ाई पूरी करे, फिर करियर का फैसला ले। श्रिया के सामने शर्त थी कि वह फिल्मों में काम करें, लेकिन पढ़ाई बीच में न छोड़ें। उन्हें दोनों जिम्मेदारियां साथ निभानी थीं।
तेलुगु फिल्म ‘इष्टम’ की शूटिंग के लिए उन्हें हैदराबाद जाना पड़ा। सेट पर काम सीखने के साथ कॉलेज की पढ़ाई भी जारी रखनी थी। भाषा की चुनौती भी थी, क्योंकि उन्हें तेलुगु नहीं आती थी। फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में श्रिया ने शूटिंग के शुरुआती दिनों का किस्सा सुनाया था। एक बार तेलुगु डायलॉग बोलते हुए वह अटक गईं।
निर्देशक ने कहा कि डायलॉग नहीं बोल पाईं तो उन्हें दिल्ली लौटना पड़ेगा। श्रिया ने तुरंत डायलॉग बोल दिया, क्योंकि वह कॉलेज लौटने के बजाय फिल्म की शूटिंग जारी रखना चाहती थीं।
साउथ में पहचान मिली, हिंदी फिल्मों में नहीं चला जादू
‘इष्टम’ के बाद श्रिया को तेलुगु फिल्मों में काम मिलने लगा। 2002 में आई ‘संतोषम’ उनके करियर की शुरुआती सफल फिल्मों में शामिल रही। इसके बाद उन्होंने तमिल-तेलुगु सिनेमा में लगातार काम किया। हिंदी फिल्मों में उनका सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने ‘तुझे मेरी कसम’, ‘शुक्रिया: टिल डेथ डू अस अपार्ट’ और ‘मिशन इस्तांबुल’ में काम किया, लेकिन उन्हें मनचाही पहचान नहीं मिली।
श्रिया ने इस नाकामी के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय अपनी गलतियों की जिम्मेदारी ली। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने माना था कि हिंदी फिल्मों के चुनाव में उनसे कुछ गलतियां हुई होंगी। उन्होंने कहा था कि असफलता का हमेशा कोई एक स्पष्ट कारण नहीं होता।

‘आवारापन’ से तारीफ मिली, फिर भी बॉलीवुड में मजबूत जगह नहीं बनी
श्रिया की हिंदी फिल्मों में ‘आवारापन’ का जिक्र जरूरी है। इमरान हाशमी के साथ आई इस फिल्म में उन्होंने ऐसी लड़की का किरदार निभाया, जिसकी जिंदगी में प्यार के साथ दर्द और संघर्ष भी है। रिलीज के समय फिल्म को बड़ी व्यावसायिक सफलता नहीं मिली, जिससे उनकी पहचान पर असर पड़ा। नामांकन मिलने के बावजूद उन्हें कुछ अवॉर्ड समारोहों में नहीं बुलाया गया। बाद के वर्षों में फिल्म को दर्शकों के बीच पहचान मिली। इमरान हाशमी के साथ श्रिया की जोड़ी और फिल्म का संगीत भी पसंद किया गया।
एक फिल्म से मिली तारीफ हिंदी सिनेमा में उन्हें लगातार बड़े मौके नहीं दिला सकी। उस दौर में अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों की पहुंच भी सीमित थी। श्रिया ने बाद के इंटरव्यू में बताया था कि वह दक्षिण भारतीय फिल्मों में बड़े सितारों के साथ काम कर रही थीं, लेकिन उनका काम हिंदी दर्शकों तक आसानी से नहीं पहुंचता था। उस समय ओटीटी प्लेटफॉर्म और पैन-इंडिया रिलीज का चलन आज जितना व्यापक नहीं था।
उन्होंने बताया था कि दिल्ली में कॉलेज के कुछ प्रोफेसरों को विश्वास नहीं होता था कि वह दक्षिण भारतीय फिल्मों में अभिनेत्री के तौर पर काम कर रही हैं। कम उपस्थिति के कारण परीक्षा देने में परेशानी हुई, तो उनके पिता को समझाना पड़ा कि उनकी बेटी फिल्मों में काम कर रही है।

फिल्म ‘शिवाजी: द बॉस’ पहले 15 जून 2007 को तमिल में रिलीज हुई थी। इसके बाद इसे हिंदी में डब करके 8 जनवरी 2010 को रिलीज किया गया।
रजनीकांत की ‘शिवाजी’ से बदली करियर की तस्वीर
श्रिया के करियर का बड़ा मोड़ 2007 में आया, जब वह रजनीकांत के साथ तमिल फिल्म ‘शिवाजी: द बॉस’ में नजर आईं। एस. शंकर के निर्देशन में बनी फिल्म में उन्होंने मुख्य महिला किरदार निभाया। फिल्म रिलीज होने के बाद उनकी लोकप्रियता बढ़ी। रजनीकांत के साथ काम करने का मौका महत्वपूर्ण साबित हुआ और उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
श्रिया ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म साइन करते समय उन्हें पता था कि इसका निर्देशन शंकर कर रहे हैं, लेकिन यह नहीं मालूम था कि इसमें कौन अभिनेता है। बाद में रजनीकांत के साथ काम करना उनके करियर का अहम अनुभव बना। यह फिल्म श्रिया के लिए अपनी पहचान व्यापक बनाने का मौका भी थी। इसके बाद उन्होंने तमिल और तेलुगु सिनेमा की कई चर्चित फिल्मों में काम किया।
अलग-अलग भाषाओं में काम, हर बार नया अनुभव
श्रिया का करियर कुछ बड़ी हिट फिल्मों तक सीमित नहीं है। उन्होंने हिंदी, तमिल और तेलुगु सहित कई भाषाओं की फिल्मों में काम किया है। उनके लिए अलग-अलग भाषाओं में काम करना चुनौती और सीखने का मौका दोनों था। हर इंडस्ट्री की कार्यशैली, दर्शकों की पसंद और कहानी कहने का तरीका अलग होता है। श्रिया को इनके साथ तालमेल बैठाना पड़ा।
उन्होंने कहा था कि उनकी करियर यात्रा कई उतार-चढ़ावों और फैसलों का नतीजा रही है। उनके मुताबिक, जिंदगी में सब कुछ पहले से तय नहीं किया जा सकता। हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।
शुरुआत में वह स्क्रिप्ट और करियर के फैसलों को लेकर ज्यादा भावुक थीं, लेकिन समय के साथ परिस्थितियों को समझना सीखा। फिल्मों के चुनाव में अनुभव से उनकी सोच बदली। यह बदलाव हर कलाकार के लिए जरूरी है। शुरुआत में सफलता का दबाव होता है, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए गलतियां पहचानना और नए अवसरों के लिए तैयार रहना पड़ता है।
‘दृश्यम’ में नंदिनी बनकर हिंदी दर्शकों के करीब पहुंचीं
2015 में आई ‘दृश्यम’ श्रिया के हिंदी करियर का अहम पड़ाव बनी। निशिकांत कामत के निर्देशन में बनी फिल्म में उन्होंने अजय देवगन की पत्नी नंदिनी सालगांवकर का किरदार निभाया था।
कहानी मुश्किल परिस्थितियों में फंसे एक परिवार की थी। नंदिनी मां और पत्नी के तौर पर अपने परिवार को बचाने की कोशिश करती है। इस भूमिका में श्रिया को ग्लैमरस उपस्थिति के बजाय भावनात्मक अभिनय का मौका मिला।
फिल्म की सफलता के बाद 2022 में ‘दृश्यम 2’ आई, जिसमें उन्होंने फिर नंदिनी का किरदार निभाया। दोनों फिल्मों से उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच मजबूत पहचान मिली। इस भूमिका में किरदार को कई बार शब्दों से ज्यादा चेहरे के भावों से घबराहट, डर और बेबसी दिखानी पड़ती थी। थ्रिलर में ऐसा अभिनय आसान नहीं होता, क्योंकि कलाकार को कहानी का रहस्य बनाए रखते हुए भावनाएं भी व्यक्त करनी होती हैं।
2026 में ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म पर श्रिया ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने लंबे समय तक नंदिनी की भूमिका निभाने और किरदार से भावनात्मक जुड़ाव की बात कही। उनके लिए यह सिर्फ फिल्मी किरदार नहीं, बल्कि कई वर्षों का अनुभव बन गया।
‘आरआरआर’ के ऑडिशन के लिए बीच में छोड़ी शादी
श्रिया के करियर का एक किस्सा एसएस राजामौली की ‘आरआरआर’ से जुड़ा है। टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि ऑडिशन के लिए उन्हें अपने कजिन की शादी बीच में छोड़कर हैदराबाद जाना पड़ा था। राजामौली के साथ दोबारा काम करने का मौका उनके लिए खास था। ऑडिशन का बुलावा मिलते ही उन्होंने हैदराबाद जाने का फैसला किया।
‘आरआरआर’ में श्रिया ने अजय देवगन के किरदार की पत्नी का रोल निभाया था। उनका किरदार स्क्रीन पर कम समय के लिए दिखाई देता है, लेकिन कहानी के भावनात्मक आधार में अहम है। फिल्म में राम चरण और जूनियर एनटीआर मुख्य भूमिकाओं में थे। इसकी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता ने भारतीय सिनेमा को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाया।

मां बनने के बाद भी काम जारी रखा, अभिनय को देखने का नजरिया बदला
अभिनय के अलावा श्रिया की निजी जिंदगी में भी कई बदलाव आए। 2018 में उन्होंने रूसी उद्यमी आंद्रेई कोशचीव से शादी की। बाद में उनकी बेटी राधा का जन्म हुआ। मां बनने के बाद काम और परिवार के बीच तालमेल बैठाना उनके लिए चुनौती थी। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘दृश्यम 2’ की शूटिंग के दौरान उनकी बेटी आठ महीने की थी। रीडिंग और शूटिंग का समय इस तरह तय किया गया कि वह बेटी की देखभाल भी कर सकें।
इस अनुभव ने उनके अभिनय को भी प्रभावित किया। लंबे समय तक मां के किरदार निभाने वाली श्रिया के लिए खुद मां बनने के बाद इन किरदारों की भावनाएं समझना अलग अनुभव रहा।
सफलता के बाद भी खुद को साबित करने का दबाव
करीब 25 साल के करियर में श्रिया ने बड़ी फिल्मों में काम किया, कई भाषाओं में पहचान बनाई और अलग-अलग किरदार निभाए। फिर भी उन्होंने माना है कि कलाकार को बार-बार खुद को साबित करना पड़ता है। 2026 में अपने 25 साल के फिल्मी सफर पर उन्होंने रचनात्मक काम के दबाव और महिलाओं से लगातार बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा पर भी चर्चा की।
उनकी कहानी का अहम पहलू यह है कि उन्होंने करियर को सिर्फ बॉलीवुड की सफलता या असफलता से नहीं आंका। हिंदी फिल्मों में संघर्ष के बावजूद उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में लगातार काम किया और नए अवसर अपनाए।

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मुंबई की एक स्कूल गर्ल ने 13-14 साल की उम्र में फिल्म साइन की थी। शायद उन्हें भी नहीं पता था कि कैमरे के सामने खड़े होने का यह फैसला उन्हें भारतीय सिनेमा की लंबे समय तक टिकने वाली अभिनेत्रियों में शामिल कर देगा।पूरी खबर पढ़ें..
