24 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र
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पहली फिल्म के रुकने से लेकर ‘शेरशाह’ की सफलता तक, सिद्धार्थ मल्होत्रा ने मुश्किलों के बीच अपनी पहचान बनाई।
दिल्ली के मिडिल क्लास, आर्मी-मर्चेंट नेवी बैकग्राउंड वाले परिवार से निकले सिद्धार्थ मल्होत्रा ने कभी खुलकर नहीं कहा था कि उन्हें एक्टर बनना है। स्कूल-कॉलेज में एमबीए और कॉर्पोरेट नौकरी का प्लान था, लेकिन अंदर छिपा एक्टर मॉडलिंग के रास्ते सामने आया। 21 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे तो फिल्म साइन होने के बावजूद प्रोजेक्ट बंद हो गया।
घर ढूंढने, ऑडिशन देने और पैसों की तंगी जैसी कई मुश्किलें आईं। फिर मनीष मल्होत्रा के जरिए करण जौहर तक पहुंचे, ‘माय नेम इज खान’ में असिस्टेंट डायरेक्टर बने और ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से लॉन्च हुए। बाद में फ्लॉप फिल्मों के दौर से गुजरकर ‘शेरशाह’ ने करियर को नई पहचान दी।
आज की सक्सेस स्टोरी में सिद्धार्थ मल्होत्रा के करियर और निजी जीवन से जुड़ी खास बातें

दिल्ली में जन्मे, परिवार में था अनुशासन
सिद्धार्थ मल्होत्रा का जन्म 16 जनवरी 1985 को दिल्ली में हुआ। उनके पिता सुनील मल्होत्रा मर्चेंट नेवी में रहे, जबकि मां रिम्मा मल्होत्रा गृहिणी हैं। बड़े भाई हर्षद बैंकिंग सेक्टर में काम करते हैं। सिद्धार्थ की परवरिश ऐसे परिवार में हुई, जहां अनुशासन और स्थिर करियर को महत्व दिया जाता था।
सिद्धार्थ ने दिल्ली के डॉन बॉस्को स्कूल और नेवल पब्लिक स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के शहीद भगत सिंह कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन किया।
उनके मुताबिक कॉलेज के दिनों में उनका प्लान बिल्कुल अलग था। वे एमबीए करना चाहते थे और अच्छे नंबर लाकर किसी अच्छे एमबीए कॉलेज में दाखिला लेने की सोचते थे। फिल्मों में जाने का सपना तब इतना साफ नहीं था कि परिवार या दोस्तों से इसके बारे में बात कर सकें।
सिद्धार्थ बताते हैं कि बचपन में वह शीशे के सामने एक्शन पोज किया करते थे और खेलते समय खुद को एक्शन सीन से लौटे किरदार की तरह कल्पना करते थे। यानी अभिनेता उनके अंदर था, लेकिन उसे करियर बनाने का फैसला काफी बाद में हुआ।
कॉलेज के दौरान मिला मॉडलिंग का पहला ब्रेक
कॉलेज के दौरान सिद्धार्थ ने मॉडलिंग शुरू की। शुरुआत में यह उनके लिए कमाई का जरिया था, लेकिन धीरे-धीरे यही उनका करियर बन गया। 18 साल की उम्र में मॉडलिंग शुरू करने के बाद उन्होंने कई बड़े ब्रांड्स और फैशन शोज में काम किया। वह इंटरनेशनल फैशन सर्किट में भी गए और रॉबर्टो कवाली जैसे डिजाइनर्स के लिए रैंप पर चले।
कुछ साल मॉडलिंग करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें कैमरे के सामने एक्टिंग करनी है। सिद्धार्थ ने कहा कि मॉडलिंग और एक्टिंग दो अलग चीजें हैं और सिर्फ अच्छा मॉडल होना अच्छे एक्टर होने की गारंटी नहीं है। मॉडलिंग के दौरान उन्हें स्टिल कैमरे से मूविंग कैमरे तक जाने का मौका मिला। विज्ञापनों के बाद उन्होंने फिल्मों के ऑडिशन देना शुरू किया।

पहला मौका मिला, लेकिन फिल्म शुरू होने से पहले ही बंद हो गई
सिद्धार्थ ने पहली बार निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म के लिए ऑडिशन दिया। वह फिल्म उन्हें और दो अन्य कलाकारों को लॉन्च करने वाली थी। दिल्ली में ऑडिशन के बाद उन्हें दोबारा मुंबई बुलाया गया और ट्रेनिंग की तैयारी शुरू हो गई थी। लेकिन फिल्म आगे नहीं बढ़ सकी।
बीबीसी को दिए इंटरव्यू में सिद्धार्थ ने बताया था कि उस फिल्म के लिए कॉन्ट्रैक्ट और रहने की व्यवस्था तक हुई थी, लेकिन करीब छह महीने बाद प्रोजेक्ट बंद हो गया। उस समय अनुभव सिन्हा दूसरे प्रोजेक्ट ‘रा.वन’ की तरफ चले गए थे।
सिद्धार्थ के लिए यह झटका इसलिए बड़ा था क्योंकि वह महीनों से खुद को फिल्म के लिए तैयार कर रहे थे। उनके मुताबिक जब किसी चीज के होने की उम्मीद बन जाए और फिर वह हाथ से निकल जाए तो उसका असर ज्यादा होता है।

21 साल की उम्र में मुंबई आए, घर मिलना भी आसान नहीं था
करीब 21 साल की उम्र में सिद्धार्थ मुंबई पहुंचे। दिल्ली में उनका बड़ा परिवार था, लेकिन मुंबई में शुरुआती दिनों में करीबी परिवार का सहारा नहीं था। कुछ दिन दोस्तों और दूर के रिश्तेदारों के भरोसे रहे।
मुंबई में उनके सामने सिर्फ काम पाने की चुनौती नहीं थी, बल्कि रहने की जगह ढूंढना भी बड़ा संघर्ष था। सिद्धार्थ ने बताया कि कभी नॉन-वेज खाने, कभी कम्युनिटी, कभी सिंगल होने और कभी अभिनेता बनने की वजह से उन्हें घर देने से मना किया गया।
उन्होंने उस दौर को याद करते हुए कहा कि मुंबई में उन्हें करियर के साथ-साथ शहर में रहने की भी लड़ाई लड़नी पड़ी। पैसों की स्थिति ऐसी नहीं थी कि घर से हर महीने तय रकम आती रहे। कई बार किराया और डिपॉजिट देने के लिए परिवार से पैसे उधार लेने पड़े। एक समय बैंक अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना भी चुनौती लगता था।
उनका रोज का नाश्ता बजट के हिसाब से तय था- अंडा और स्वीट पोटैटो। किसी महीने मॉडलिंग का अच्छा पेमेंट मिल जाता तो दोस्तों के साथ उसी पैसे से खुलकर घूमने-फिरने का मौका भी मिलता।
मनीष मल्होत्रा से मुलाकात ने बदली दिशा
मॉडलिंग के दिनों में सिद्धार्थ की मुलाकात फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा से हुई थी। मनीष ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी पहली मुलाकात दिल्ली के एक फैशन शो में हुई थी। बाद में अभिनेता बनने मुंबई आए सिद्धार्थ ने निर्देशन सीखने की इच्छा जताई। मनीष ने उन्हें करण जौहर से मिलवाया।
सिद्धार्थ और मनीष मल्होत्रा के रिश्ते को लेकर बाद में कई तरह की बातें हुईं, लेकिन सिद्धार्थ ने स्पष्ट किया कि मनीष उनके रिश्तेदार नहीं हैं। मॉडलिंग के दौरान उनके फैशन इंडस्ट्री से संबंध थे और उसी कनेक्शन के जरिए वह धर्मा प्रोडक्शंस तक पहुंचे।
करण जौहर के साथ ‘माय नेम इज खान’ में असिस्टेंट डायरेक्टर बने
अनुभव सिन्हा की फिल्म बंद होने के बाद सिद्धार्थ ने फैसला किया कि सिर्फ ऑडिशन देने के बजाय फिल्ममेकिंग को करीब से समझना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी के लिए कोशिश शुरू की।
मनीष मल्होत्रा के जरिए उनकी मुलाकात करण जौहर से हुई और वह ‘माय नेम इज खान’ में असिस्टेंट डायरेक्टर की टीम का हिस्सा बने। इस फिल्म में उनके साथ वरुण धवन भी असिस्टेंट डायरेक्टर थे।
सिद्धार्थ ने इस अनुभव को एक्टिंग की सबसे बड़ी ट्रेनिंग में से एक बताया। उनके मुताबिक सेट पर बड़े कलाकारों और पूरी फिल्ममेकिंग प्रक्रिया को करीब से देखने का मौका मिला। वह शाहरुख खान और काजोल के कुछ सीन्स के लिए स्टैंड-इन भी करते थे। बाद में वरुण और सिद्धार्थ दोनों इसी अनुभव के बाद करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ में बतौर एक्टर लॉन्च हुए।
‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से लॉन्च
2012 में करण जौहर की ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ से सिद्धार्थ मल्होत्रा, वरुण धवन और आलिया भट्ट ने बॉलीवुड डेब्यू किया। फिल्म में सिद्धार्थ ने अभिमन्यु सिंह का किरदार निभाया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और उन्हें बेस्ट मेल डेब्यू के लिए फिल्मफेयर नॉमिनेशन भी मिला।
सिद्धार्थ के लिए यह सिर्फ डेब्यू नहीं था, बल्कि उस सपने के सच होने का पल था जिसे उन्होंने बचपन में किसी के सामने खुलकर स्वीकार तक नहीं किया था। उनके शब्दों में, वह आज भी इस सफर को सपने जैसा ही मानते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी यह बात पूरी तरह हजम नहीं होती कि वह इस बिजनेस का हिस्सा हैं।
‘हंसी तो फंसी’ और ‘एक विलेन’ ने बढ़ाई पहचान
‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ के बाद सिद्धार्थ को 2014 में दो अलग तरह की फिल्मों में देखा गया। ‘हंसी तो फंसी’ में उन्होंने रोमांटिक-कॉमेडी और ‘एक विलेन’ में गंभीर और एक्शन-ड्रामा किरदार निभाया।
‘हंसी तो फंसी’ का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन औसत रहा, लेकिन ‘एक विलेन’ ने सिद्धार्थ को कमर्शियल सफलता दिलाई। उपलब्ध ट्रेड आंकड़ों के मुताबिक ‘एक विलेन’ को हिट/सुपरहिट श्रेणी में रखा गया है और यह उनके करियर की शुरुआती बड़ी सफल फिल्मों में शामिल रही।
इसके बाद 2015 में ‘ब्रदर्स’ आई, जिसे बॉक्स ऑफिस इंडिया ने फ्लॉप श्रेणी में रखा। 2016 में ‘कपूर एंड संस’ ने फिर सफलता दिलाई, जबकि ‘बार बार देखो’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी।
एक के बाद एक फिल्मों ने बढ़ाया दबाव
2017 में ‘ए जेंटलमैन’ और ‘इत्तेफाक’ आईं। इसके बाद 2018 में ‘अय्यारी’ और 2019 में ‘जबरिया जोड़ी’ रिलीज हुईं। ट्रेड आंकड़ों के अनुसार इनमें कई फिल्मों को फ्लॉप या उससे नीचे की श्रेणी में रखा गया। ‘मरजावां’ का प्रदर्शन भी औसत से नीचे रहा।
यही वह दौर था जिसे सिद्धार्थ अपने करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण समय में गिनते हैं। उनकी फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा होती थी और मीडिया में उनके करियर पर सवाल उठने लगे थे।
सिद्धार्थ ने इस दौर पर कहा कि जब आप फिल्म के मुख्य किरदार में होते हैं तो फिल्म की जिम्मेदारी आपके कंधों पर आती है। फिल्म नहीं चलती तो उसके साथ आपके करियर को लेकर भी बातें शुरू हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि एक आउटसाइडर के लिए यह दबाव ज्यादा महसूस होता है, क्योंकि उसके पास इंडस्ट्री में लौटने के लिए कोई तैयार बैकअप नहीं होता।
फ्लॉप फिल्मों के दौर में भी हार नहीं मानी
सिद्धार्थ के मुताबिक फिल्मों का असफल होना व्यक्तिगत तौर पर मानसिक और भावनात्मक दबाव पैदा करता है। लेकिन उन्होंने इसे अपने सफर का हिस्सा माना।
उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री प्रदर्शन पर चलती है। अगर दर्शक आपका काम पसंद करते हैं तो आपको आगे काम मिलता है और अगर पसंद नहीं करते तो मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
इसी दौर के बारे में सिद्धार्थ ने कहा, ‘जो कोई गिव अप न करे… जो कोशिश करना बंद नहीं करता, उसको हराना बहुत मुश्किल है। जब तक आप हार नहीं मानते, तब तक आप जिंदा हैं। यहां पर मुझे बहुत काम आया है वो ढीठपना, जो मेरे में है। मैं एक ढीठ किस्म की पर्सनैलिटी हूं। वो जो ढीठपन और अड़ियलपन है मेरे में, आई थिंक, उसने मुझे बचा के रखा।’

‘शेरशाह’ ने करियर को दी नई पहचान
कई फिल्मों के उतार-चढ़ाव के बाद 2021 में आई ‘शेरशाह’ ने सिद्धार्थ के करियर को नई पहचान दी। फिल्म में उन्होंने कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाया। फिल्म ओटीटी पर रिलीज हुई और सिद्धार्थ के अभिनय की खास तौर पर चर्चा हुई। इसके बाद उन्हें सिर्फ रोमांटिक या एक्शन हीरो के तौर पर नहीं, बल्कि गंभीर किरदार निभाने वाले अभिनेता के रूप में भी देखा जाने लगा।
सिद्धार्थ बताते हैं कि आज जब वह किसी कॉलेज में जाते हैं और छात्र ‘शेरशाह’ पर उनसे बारीकी से सवाल करते हैं तो उन्हें भावुक महसूस होता है। उनके मुताबिक किसी अभिनेता के लिए इससे बड़ी बात क्या होगी कि लोग उसके काम को इतनी गंभीरता से देखें और उसके बारे में जानना चाहें।
‘शेरशाह’ के बाद भी सफर जारी
‘शेरशाह’ के बाद सिद्धार्थ ‘थैंक गॉड’, ‘मिशन मजनू’ और ‘योद्धा’ जैसी फिल्मों में नजर आए। इनका बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अलग-अलग रहा। ट्रेड आंकड़ों के मुताबिक ‘थैंक गॉड’ और ‘योद्धा’ फ्लॉप रहे, जबकि ‘मिशन मजनू’ ओटीटी रिलीज थी।
2025 में उनकी ‘परम सुंदरी’ रिलीज हुई, जिसे बॉक्स ऑफिस पर औसत प्रदर्शन की श्रेणी में रखा गया। इस तरह सिद्धार्थ के करियर में सफलता और असफलता दोनों आती रहीं, लेकिन उनका सफर रुका नहीं।
50 साल तक काम करते रहने का सपना
आज इंडस्ट्री में एक दशक से ज्यादा के सफर को सिद्धार्थ किसी उपलब्धि की तरह नहीं, बल्कि अभी भी चल रहे सपने की तरह देखते हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीद है यह सपना कभी न टूटे और वह अगले 10 नहीं, बल्कि 20 और 50 साल तक इसी तरह काम करते रहें और दर्शकों को एंटरटेन करते रहें।

‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ लोककथा-आधारित पौराणिक थ्रिलर/फैंटेसी है। यह बिहार के पटना जिले (बिहटा) में स्थित 16वीं सदी के वन देवी मंदिर और उससे जुड़ी अलौकिक मान्यताओं पर आधारित है।
अब ‘द वन’ की बारी
सिद्धार्थ मल्होत्रा अब अपनी अगली फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में नजर आए। फिल्म में उनके साथ तमन्ना भाटिया हैं और इसका निर्देशन दीपक मिश्रा ने किया है। फिल्म आज सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।

सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की शादी 7 फरवरी 2023 को जैसलमेर (राजस्थान) के सूर्यगढ़ पैलेस में हुई थी।

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