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Tanishq CEO Arun Narayan Statement


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नई दिल्ली2 मिनट पहलेलेखक: एन. रघुरामन

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तनिष्क के CEO अरुण नारायण। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar

तनिष्क के CEO अरुण नारायण। (फाइल फोटो)

सोने की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय ग्राहकों के गहने खरीदने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। अब ज्वेलरी की खरीदारी भावनाओं या बिना सोचे-समझे नहीं, बल्कि काफी रिसर्च और समझदारी के साथ की जा रही है।

तनिष्क के CEO अरुण नारायण ने दैनिक भास्कर को बताया कि कंपनी ग्राहकों की इसी बदलती सोच को ध्यान में रखते हुए ज्वेलरी को ज्यादा किफायती, बहुउपयोगी और व्यावहारिक बनाने पर काम कर रही है।

इसमें पुराने सोने के एक्सचेंज प्रोग्राम, 18-कैरेट में 22-कैरेट जैसी फिनिश देने वाली तकनीक और बहुउपयोगी यानी वर्सटाइल वेडिंग सेट्स शामिल हैं। अरुण ने कहा कि तनिष्क ग्राहकों के बारे में उतनी ही रिसर्च करता है, जितनी ग्राहक सोने के बारे में करते हैं।

तनिष्क के CEO अरुण नारायण से बातचीत के प्रमुख अंश…

सवाल 1. सोने की बढ़ी हुई कीमतों के बीच क्या भारतीय मिडिल क्लास के लिए गहने खरीदना एक लग्जरी बन गया है, जिसके बारे में उन्हें दो बार सोचना पड़ता है?

जवाब: भारतीय मिडिल क्लास ग्राहक बेहद स्मार्ट और जागरूक हैं। समय और बढ़ती कीमतों के साथ उनकी खरीदारी का तरीका विकसित हुआ है। उन्होंने अब खरीदारी की सही टाइमिंग चुनना सीख लिया है।

अब यह पहले की तरह बिना सोचे-समझे की जाने वाली खरीदारी नहीं, बल्कि एक प्लान्ड मूव है। लोग गोल्ड प्राइस के मूवमेंट पर नजर रखते हैं और अपने बजट के हिसाब से कीमत का इंतजार करते हैं। स्टोर में आने वाला हर ग्राहक पूरी रिसर्च के साथ आता है।

इसके अलावा, पुराने सोने को एक्सचेंज करके नई ज्वेलरी खरीदना सबसे स्मार्ट तरीका बन चुका है। हमारी कुल बिक्री का कम से कम 50% हिस्सा पुराने सोने के एक्सचेंज से ही आता है। हम ग्राहकों की समस्याओं को दूर करने के लिए कई पर्चेज प्लान और स्कीम्स चलाते हैं।

उदाहरण के लिए, ग्राहक उस दिन बुकिंग कर सकते हैं जिस दिन सोना सस्ता हो। अगर डिलीवरी के दिन कीमत बढ़ जाती है, तो भी उन्हें बुकिंग वाले दिन की कम दर ही मिलती है। वहीं, अगर कीमतें गिर जाती हैं, तो उन्हें उस दिन की कम कीमत का फायदा दिया जाता है।

हम 18-कैरेट में 22-कैरेट जैसी फिनिश वाले लाइटवेट गहनों पर ध्यान दे रहे हैं, जिससे ग्राहकों को समझौता करने का अहसास न हो। इसी तरह डायमंड ज्वेलरी में हमारे पास 14-कैरेट से शुरुआत होती है। हमारी कोशिश यही है कि महिलाओं को यह महसूस न हो कि गहने उनकी पहुंच से बाहर या केवल एक लग्जरी हैं।

सवाल 2. क्या टियर-2 और टियर-3 शहरों का मिडिल क्लास अब भी अच्छी मात्रा में सोने के आभूषण खरीद रहा है, या यह मार्केट कीमत को लेकर ज्यादा सेंसिटिव है?

जवाब: भारतीय उपभोक्ता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि चाहे शहर छोटा हो या बड़ा, वे अपने पैसों को लेकर बेहद सावधान रहते हैं। वे सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि वैल्यू देखते हैं। सोने की बढ़ती कीमतों के बीच यह बात और भी लागू होती है।

हमारे पास दो तरह के ग्राहक हैं। पहला वर्ग वह है जो वैल्यू की तलाश में रहता है। दूसरा वर्ग वह है जो डिजाइन और लुक की तलाश में रहता है। ये दोनों ही वर्ग हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसलिए जब हम अपने प्रोडक्ट्स तैयार करते हैं, तो वैल्यू और डिजाइन दोनों चाहने वाले ग्राहकों की जरूरतों का ध्यान रखते हैं।

सवाल 3. आप मिडिल क्लास के बजट को प्रभावित किए बिना उनके लिए एस्पिरेशनल डिजाइन कैसे तैयार करते हैं?

जवाब: हमारा ‘Adhyantara’ कलेक्शन इसका एक बेहतरीन उदाहरण है। यह सूर्य, चंद्रमा, तारों और टूटते तारों से प्रेरित है, जो सेलेस्टियल इमेजरी यानी खगोलीय दृश्यों को भारतीय आभूषण कारीगरी के साथ जोड़ता है।

यह कलेक्शन उन महिलाओं के लिए बनाया गया है जो पारंपरिक गहनों को पसंद करती हैं, लेकिन उन्हें आधुनिक तरीकों से स्टाइल करने की आजादी चाहती हैं। इस कलेक्शन में 100 से ज्यादा डिजाइन्स शामिल हैं। हम यह समझने में काफी एनर्जी लगाते हैं कि एक महिला अपने गहनों के बारे में क्या सोच रही है।

सवाल 4. सोने की कीमत वजन और शुद्धता से तय होती है, लेकिन हीरे की रीसेल वैल्यू तय करने की प्रोसेस अलग है। डायमंड ज्वेलरी को बढ़ावा देते समय आप इस चिंता को कैसे दूर करते हैं?

जवाब: जहां तक हीरे की वैल्यू का सवाल है, हम शुरुआत से ही एक्सचेंज वैल्यू या एक्सचेंज के समय प्रचलित दर पर 100% का भरोसा देते हैं। चाहे एक्सचेंज 10 साल बाद हो या अगली पीढ़ी द्वारा किया जाए।

चूंकि हम सोने, हीरे और अन्य स्टोन्स के वजन और वैल्यू का स्पष्ट और सटीक ब्रेक-अप देते हैं, इसलिए प्रोसेस पूरी तरह से पारदर्शी रहती है और ग्राहकों का विश्वास बना रहता है। एकमात्र चीज जो ग्राहक को पहले से नहीं पता होती, वह यह है कि दो दशकों के बाद उसकी कीमत क्या होगी।

सवाल 5. क्या डायमंड ज्वेलरी पहली बार खरीदारी करने वालों के लिए आसानी से उपलब्ध है, या विज्ञापन के जरिए इसे सिर्फ एक इच्छा यानी डिजायरेबल बनाया गया है?

जवाब: हीरा हर किसी की पहुंच में है। हम ग्राहकों को अलग-अलग रेंज में बेहतर विकल्प देने के प्रति सजग रहते हैं। इसलिए, ₹20,000 से शुरुआत करके हमारी रेंज ₹1 लाख और उससे ऊपर तक जाती है।

पहली बार खरीदने वाले या किसी को गिफ्ट देने की इच्छा रखने वालों के लिए ₹9,000 से लेकर ₹50,000 से कम में कई डिजाइन्स उपलब्ध हैं। इस तरह हम ग्राहक के बजट के दबाव को भी संभालते हैं और साथ ही उनके खुशी व गर्व (प्लेजर) के अहसास का भी ध्यान रखते हैं।

सवाल 6. क्या ट्रेंड ट्रेडिशनल ज्वेलरी से लाइटवेट ज्वेलरी की ओर शिफ्ट हो रहा है?

जवाब: नहीं, ऐसा नहीं है। ग्राहक किसी भी ज्वेलर्स से पूरी वेराइटी देखने की उम्मीद करते हैं, ताकि वे रोज पहनने वाले गहनों से लेकर खास मौकों तक के लिए चुनाव कर सकें। हर बार जब कोई महिला स्टोर में आती है, तो वह एक अलग सोच (माइंडसेट) के साथ आती है।

एक दिन वह जीवन में एक बार की जाने वाली खास खरीदारी के लिए कितना भी खर्च करने को तैयार हो सकती हैं, जबकि अगली विजिट में वह डेली वेयर का चुनाव कर सकती हैं। यह ट्रेंड में बदलाव के बजाय ऑप्शंस की बात है।

सवाल 7. छोटे शहरों के उपभोक्ताओं को विकास के अगले बड़े अवसर के रूप में देखा जाता है, आपके पास क्या प्रमाण है कि ये उपभोक्ता गहनों पर खर्च करते हैं?

जवाब: आप किसी भी शहर में चले जाएं, लोगों की आकांक्षाएं अलग नहीं होतीं। खर्च के मामले में सोने और गहनों का भारतीय महिलाओं के साथ गहरा जुड़ाव है। इसे एक साथ परंपरा, निवेश, शुभ, कीमती और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

इसलिए महिलाएं इसे खरीदना और अगली पीढ़ी को सौंपना पसंद करती हैं। केवल इसे व्यक्त करने का तरीका शहर-दर-शहर बदल सकता है, इसीलिए राज्य-दर-राज्य गहनों के डिजाइन्स में भी बदलाव आता है।

सवाल 8. तनिष्क बदलती सोच और बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखकर ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए और क्या प्रयास कर रहा है?

जवाब: कंपनी का मुख्य उद्देश्य हर ज्वेलरी खरीदारी को सार्थक बनाना है। इसके लिए तनिष्क बहुउपयोगी यानी वर्सटाइल डिजाइन्स पर जोर दे रहा है। उदाहरण के लिए, शादी-ब्याह के लिए बनाए जाने वाले ज्वेलरी सेट्स को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि उनके अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग अवसरों पर अलग-अलग तरीकों से पहना जा सके।

इससे ग्राहक को एक ही खरीदारी से ज्यादा वैल्यू मिलती है। इसके पीछे ग्राहकों की बदलती प्राथमिकताओं की गहरी समझ है। चूंकि खरीदार अब शुद्धता, कीमत, डिजाइन और उपयोगिता पर रिसर्च कर रहे हैं, इसलिए तनिष्क भी उनकी जरूरतों का पहले से अनुमान लगाने के लिए रिसर्च में निवेश कर रहा है।

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