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अमेरिका ने ब्रिटिश एयरबेस से B-1 बॉम्बर हटाए:आतंकी साजिश के शक के बाद सुरक्षा बढ़ाई थी, आरोपियों की जमानत पर ट्रम्प नाराज थे




अमेरिका ने ब्रिटेन के फेयरफोर्ड एयरबेस से अपने सभी B-1 बॉम्बर विमान वापस बुला लिए हैं। पेंटागन ने रविवार को इसकी पुष्टि की। हाल ही में इस एयरबेस की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। यहां से पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नाराजगी जताई थी। एयरबेस के पास 3 वैन मिली थीं पिछले रविवार को इंग्लैंड में एयरबेस के पास व्हेलफोर्ड गांव में रहने वाले एक किसान ने सड़क पर तीन वैन खड़ी देखीं थी। उसके मुताबिक, कई नकाबपोश लोग वहां मौजूद थे और बाद में मौके से भाग गए। पुलिस को सूचना मिलने के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई और एयरबेस के आसपास 85 घरों को खाली कराया गया। तस्वीरों में इन वैन के अंदर बैरल जैसी चीजें दिखाई दीं थीं। इनमें से कम से कम एक वैन पर एक फर्जी लोगो और फोन नंबर लगा था, जिससे वह किसी असली डीजल सप्लाई कंपनी की गाड़ी जैसी लग रही थी। जांच में वैन से कोई विस्फोटक नहीं मिला। नेशनल काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग के प्रमुख लॉरेंस टेलर ने बताया था कि वहां से कुछ मात्रा में पेट्रोल बरामद हुआ था। पांच ब्रिटिश पुरुषों को गिरफ्तार किया था इस घटना के बाद लंदन के रहने वाले 20 साल की उम्र के पांच ब्रिटिश पुरुषों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सभी को जमानत पर छोड़ दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोपियों को जमानत मिलने पर कहा था कि वह ऐसा नहीं करते। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मामले में किसी विदेशी ताकत (ईरान) के शामिल होने की आशंका जताई। ईरान ने बाद में इन आरोपों को खारिज कर दिया था। ईरान के खिलाफ ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल हो रहा था फेयरफोर्ड ब्रिटेन ने मार्च में अमेरिका को RAF फेयरफोर्ड का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ खास रक्षात्मक अभियानों के लिए करने की अनुमति दी थी। इसके बाद से अमेरिकी बॉम्बर और दूसरे सैन्य विमान यहां से उड़ान भरते और लौटते देखे गए हैं। फेयरफोर्ड ब्रिटेन का ऐसा एकमात्र एयरबेस है, जिसका इस्तेमाल अमेरिका को इस तरह के अभियानों के लिए करने की अनुमति दी गई है। इस एयरबेस का रनवे करीब 9,990 फीट यानी 3 किलोमीटर लंबा है। यूरोप के उन चुनिंदा एयरफील्ड में इसकी गिनती होती है, जहां भारी बमवर्षक विमानों को उतारा और उड़ाया जा सकता है। यह एयरबेस 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खोला गया था। बाद में अमेरिका ने इसे अपने सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल करना शुरू किया।



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