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अमेरिका-मौत के 2 इंजेक्शन देने के बाद भी महिला बची:धड़कन चल रही थी, नींद में खर्राटे ले रही थी; मौत की सजा टली




अमेरिका में मौत की सजा पाने वाली एक महिला कैदी को मौत के 2 इंजेक्शन दिए गए लेकिन इसके बाद भी उसकी जान नहीं गई। उसकी धड़कन चलती रही और वह नींद में खर्राटे ले रही थी। अमेरिका के टेनेसी राज्या में क्रिस्टा गेल पाइक नाम की महिला 1995 में हत्या के मामले में दोषी करार की गई थी। उन्हें इस मामले में 1996 में मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि अब महिला की सजा टाल दी गई है। अगर प्रक्रिया पूरी हो जाती तो 200 साल से ज्यादा समय में अमेरिकी राज्य टेनेसी में मौत की सजा पाने वाली वह पहली महिला होती। 1995 में 19 साल की सहपाठी की हत्या की थी क्रिस्टा पाइक को 1995 में अपनी 19 साल की सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। जनवरी 1995 में पाइक, उनके उस समय के बॉयफ्रेंड तादारिल शिप और एक दोस्त ने स्लेमर को टेनेसी यूनिवर्सिटी के कैंपस के पास जंगल में बुलाया था। अदालत में सामने आया कि वहां तीनों ने स्लेमर की पिटाई की और धारदार चीज से हमला किया। अपराध के समय पाइक 18 साल की थीं। वहीं, उनके बॉयफ्रेंड शिप की उम्र 17 साल थी। शिप ने बाद में मामले में गवाही दी। नाबालिग होने के कारण उसे मौत की सजा नहीं दी गई और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इस साल होने वाली बाकी मौत की सजाओं पर रोक टेनेसी के गवर्नर ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। इसका मकसद यह पता लगाना है कि आखिर प्रक्रिया में क्या हुआ। उन्होंने बताया कि इस साल होने वाली बाकी सभी मौत की सजाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। पाइक के वकीलों ने बुधवार देर रात कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों में बताया कि अधिकारियों ने उसे पेंटोबार्बिटल ड्रग्स के 2 इंजेक्शन दिए। इसके बावजूद उसकी मौत नहीं हुई। टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने कहा कि अधिकारियों ने कोर्ट से मंजूर मौत के इंजेक्शन की प्रक्रिया के हर कदम का पालन किया था। लेकिन फिर भी यह फेल हो गया। अमेरिका में इंजेक्शन देने के बाद भी जान बचने का यह पहला मामला डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर की कार्यकारी निदेशक रॉबिन एम. माहेर ने इसे बेहद असाधारण मामला बताया। उनके मुताबिक, अब तक 7 लोग ऐसे रहे हैं जिनकी नस में मौत का इंजेक्शन देने में दिक्कत हुई और प्रक्रिया के दौरान मेडिकल समस्या आई। लेकिन मौत के इंजेक्शन में इस्तेमाल होने वाली दवा शरीर में पहुंचने के बाद किसी व्यक्ति के जिंदा रहने का ऐसा मामला पहले सामने नहीं आया था। राज्य के नियमों के मुताबिक, पहले इंजेक्शन के बाद अगर कैदी की मौत नहीं होती तो दूसरा इंजेक्शन दिया जाता है। लेकिन दूसरे इंजेक्शन के बाद भी व्यक्ति जिंदा रहे तो क्या करना है, इसके बारे में नियमों में साफ जानकारी नहीं है।



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