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अमेरिका से बातचीत के लिए ईरानी डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंचा:बैठक से पहले लेबनान में सीजफायर की शर्त रखी; अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस भी आज इस्लामाबाद पहुंचेंगे




अमेरिका के साथ प्रस्तावित वार्ता से पहले ईरान का डेलिगेशन पाकिस्तान पहुंच गया है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ के नेतृत्व में शुक्रवार देर रात यह टीम इस्लामाबाद पहुंची है। इस डेलिगेशन में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदियन, सेंट्रल बैंक गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती, पूर्व IRGC कमांडर मोहम्मद बाकर जोलगदर और संसद के कई सदस्य शामिल हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता और उसके फ्रीज किए गए अरबों डॉलर जारी नहीं किए जाते, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत शुरू नहीं होगी। दूसरी तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी डेलिगेशन के साथ आज इस्लामाबाद पहुंचेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच यह अहम बैठक आज इस्लामाबाद में होनी है। इस पर दुनियाभर की नजर बनी हुई है। ईरानी डेलिगेशन के इस्लामाबाद पहुंचने का वीडियो… ट्रम्प बोले- डील नहीं हुई तो फिर हमला करेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर डील नहीं होती, तो अमेरिका फिर हमला करेगा। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों को सबसे बेहतरीन हथियारों से लैस किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं उपराष्ट्रपति वेंस ने बताया है कि ट्रम्प ने बातचीत के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह ईमानदारी से बातचीत करेगा तो अमेरिका तैयार है, लेकिन ‘खेल’ करने की कोशिश पर सख्त जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तानी PM बोले- अमेरिका और ईरान वार्ता निर्णायक मौका पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता को निर्णायक मौका’ बताया है। उन्होंने कहा कि इस बैठक से तय होगा कि मध्य-पूर्व में स्थायी सीजफायर हो पाएगा या नहीं। शरीफ ने यह भी कहा कि इस वार्ता की मेजबानी करना सिर्फ पाकिस्तान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम दुनिया के लिए गर्व की बात है। देश को संबोधित करते हुए उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया और कहा कि जो देश पहले युद्ध की स्थिति में थे, अब वे बातचीत के जरिए अपने मतभेद सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका-ईरान के बीच इन मुद्दों पर बातचीत होनी है ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम- अमेरिका का कहना है कि ईरान में कोई संवर्धन नहीं होगा। ईरान को अपना सारा हाई-लीवल इनरिच्ड यूरेनियम बाहर करना होगा और न्यूक्लियर फैसिलिटीज बंद या सीमित करनी होंगी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज- दुनिया का बहुत सारा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान अभी भी इसका नियंत्रण रखना चाहता है और टोल (फीस) लेने की बात कर रहा है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि रास्ता पूरी तरह खुला और सुरक्षित हो, बिना किसी रुकावट या फीस के। बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम- अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाना चाहता है। सैंक्शंस हटाना- ईरान चाहता है कि सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तुरंत हटा दिए जाएं, फ्रोजन एसेट्स वापस मिलें और मुआवजा भी मिले। इस्लामाबाद में बैठक से पहले की तस्वीरें…



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