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महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तुलशी गांव में पानी की कमी से परेशान लोगों ने “गांव बिक्री के लिए” का बोर्ड लगाया है। इसकी कीमत सिर्फ पानी रखी गई है। 28 सितंबर को पुणे में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने इस समस्या को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गांव को हरसंभव मदद देगी। माढा तहसील के तुलशी गांव की आबादी करीब 7 हजार है। अधूरे सीना-माढा लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट के कारण गांव कई साल से टैंकरों पर निर्भर है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के पास से इस योजना की नहरें गुजरती हैं। इसके बावजूद उन्हें पानी नहीं मिल रहा है। गांव में इस साल बारिश कम होने से संकट और बढ़ गया है। तुलशी के सरपंच शरद मोरे ने कहा, “गांव में हर साल पानी की कमी रहती है। सीना-माढा योजना की नहरें गांव के पास से गुजरती हैं, लेकिन हमें इसका लाभ नहीं मिलता।” उन्होंने कहा, “गांव बिक्री के लिए, कीमत- पानी” का बोर्ड लगाकर सरकार का ध्यान समस्या की ओर खींचने की कोशिश की गई है। 26 साल से अधूरा खुदाई का काम मोरे ने पहले बताया था कि सीना-माढा योजना के सातवें और आठवें आउटलेट के पास करीब 800 मीटर खुदाई का काम 26 साल से अधूरा है। उन्होंने कहा था कि यह काम पूरा होने पर तुलशी की पानी की समस्या हमेशा के लिए दूर हो सकती है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव पहले से ही पानी के टैंकरों पर निर्भर है। इस मानसून में कम बारिश से पानी की कमी और गंभीर हो गई है। प्रदर्शन के बाद आंदोलन तेज करने की चेतावनी ग्रामीणों ने पानी की मांग को लेकर 14 सितंबर को भूख हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने माढा तहसील कार्यालय के बाहर थाली-नाद यानी बर्तन बजाकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने समस्या का समाधान नहीं होने पर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है। मोरे ने कहा, “गांव बिक्री के लिए” वाला बोर्ड हमारी पानी की समस्या पर सरकार का ध्यान खींचने का प्रतीकात्मक विरोध है। पानी मिलने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। जल जीवन मिशन का काम भी असरदार नहीं ग्रामीणों ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत काम कराया गया है। लेकिन स्थानीय जलस्रोत सूख जाने से यह योजना प्रभावी नहीं रही। तुलशी में 14 तालाब और कुएं पूरी तरह सूख चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हें भरने से पीने और सिंचाई के पानी की कमी काफी कम हो सकती है। ग्रामीणों के अनुसार, इसके लिए प्रस्ताव और अनुमान पहले ही तैयार किया जा चुका है। पानी की कमी से खेती और पशुपालन प्रभावित तुलशी के ज्यादातर लोग खेती और पशुपालन से जुड़े हैं। पानी के संकट ने उनकी आजीविका पर बुरा असर डाला है। ग्रामीणों के अनुसार, इस संकट का असर लोगों की निजी जिंदगी पर भी पड़ा है। गांव के करीब 350 युवकों की शादी नहीं हो पा रही है। मोरे ने दावा किया कि कोई भी परिवार उन्हें अपनी बेटियां देने को तैयार नहीं है। योजनाओं की घोषणाओं के बावजूद समाधान नहीं ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए और प्रदर्शन किए। इसके बावजूद पानी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। 2024 में कृष्णा वैली डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने तुलशी और आसपास के सूखाग्रस्त गांवों को सीना-माढा लिफ्ट इरिगेशन योजना से पानी देने की मंजूरी दी थी। इन गांवों में बावी, परितेवाड़ी, कुर्डू, पिंपलखुंटे, अंबाड और अंजनगांव भी शामिल हैं। योजना के लिए तीसरी संशोधित प्रशासनिक मंजूरी जमा करने के निर्देश भी जारी किए गए थे। बंद पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की योजना इस साल जनवरी में तुलशी के भवानी परकोलेशन टैंक तक सीना-माढा योजना से बंद पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने के लिए 2025-26 में 90 लाख रुपए मंजूर किए जाने की घोषणा हुई थी। घोषणा के मुताबिक, इस काम से गांव की पीने और सिंचाई के पानी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती। मोरे ने कहा कि उन्हें DPDC से बंद पाइपलाइन के लिए कुछ राशि मंजूर होने की जानकारी मिली है। हालांकि, अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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महाराष्ट्र के सोलापुर में तुलशी गांव बेचने का बोर्ड लगा:कीमत सिर्फ पानी; राज्य की 265 तहसीलें सूखा घोषित