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वीडियो कॉल पर दाह संस्कार के बाद नहीं आई बेटियां:सोनीपत की संस्था ने गंगा में अस्थियां प्रवाहित की; बड़ा भाई-भतीजा 10 साल बाद आएं




मुंबई के बड़े कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता की सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में 4 अगस्त को हुई मौत के बाद अस्थियां प्रभावित करने के लिए भी बेटियां नहीं पहुंची आज सोनीपत की संस्था ने उनकी अस्थियां गंगा में हरिद्वार में पहुंचकर प्रवाहित की है। 4अगस्त को निधन के बाद जब वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनकी बेटियों से संपर्क किया, तो उन्होंने आने से इनकार कर दिया और ₹5,100 ऑनलाइन भेजकर वीडियो कॉल के जरिए ही दाह संस्कार की प्रक्रिया संपन्न करने को कहा। दुखद बात यह रही कि दाह संस्कार में दूरी बनाने के बाद, आज जब सामाजिक संस्था द्वारा उनकी अस्थियों को हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित किया गया, तब भी उनकी बेटियां मौके पर नहीं पहुंचीं। आश्रम संचालक आनंद कुमार के अनुसार, उन्होंने औलाद का ऐसा संवेदनहीन व्यवहार पहले कभी नहीं देखा। जब बेटियों से आने का आग्रह किया गया तो उन्होंने ऑनलाइन पैसे भेजकर सोनीपत में ही अंतिम संस्कार करने की बात कही और मुखाग्नि के समय वीडियो कॉल पर पूरी प्रक्रिया दिखाने की शर्त रखी। वीडियो कॉल के दौरान पिता का बेजान चेहरा देखकर एक बेटी के मुंह से सिर्फ “पापा” निकला और उसने औपचारिकता निभाते हुए बस इतना कहा कि “सारा काम अच्छे से कर देना।” बेटियों की अनुपस्थिति के बीच सोनीपत की एक सामाजिक संस्था ने इस मानवीय दायित्व को निभाया और शिवचरण गुप्ता की अस्थियों को हरिद्वार ले जाकर अहमदाबाद से आए उसके भाई महेन्द्र व भतीजे के साथ पूरे विधि-विधान के साथ गंगा में प्रवाहित किया। इस पूरे घटनाक्रम का एक भावुक पहलू यह भी है कि ठीक दो साल पहले सोनीपत के ही एक दूसरे आश्रम में उनकी पत्नी की मौत हुई थी, तब खुद शिवचरण ने अपनी पत्नी की अस्थियों का विसर्जन किया था। लेकिन आज जब शिवचरण को अंतिम विदाई देने की बारी आई, तो उनकी अपनी ही बेटियां इस पूरे चक्र से दूर रहीं शिवचरण राम रतन गुप्ता के भाई ने क्या कहा भाई की मौत के करीब एक सप्ताह बाद उनका बड़ा भाई महेंद्र अपने बेटे के साथ हरिद्वार पहुंचा। गंगा में अस्थियां प्रवाहित करने से पहले महेंद्र ने अपने भाई की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे पहलुओं का खुलासा किया, जिनसे परिवार के बीच वर्षों से बनी दूरी और शिवचरण के संघर्ष की कहानी सामने आती है।
महेंद्र ने बताया कि वे सात भाई और तीन बहनें हैं। करीब 10 साल पहले उनकी शिवचरण से बातचीत हुई थी। उस समय उन्हें जानकारी थी कि उनका भाई नेपाल में रह रहा है। इसी दौरान नेपाल में भूकंप आया था और परिवार के बीच यह खबर पहुंची थी कि भूकंप में शिवचरण की मौत हो गई है। इसके बाद उन्होंने भाई से संपर्क की उम्मीद ही छोड़ दी थी। सोशल मीडिया की खबर से मिली जानकारी: महेंद्र ने बताया कि इतने वर्षों बाद सोशल मीडिया पर शिवचरण की मौत से जुड़ी खबर और वीडियो सामने आने के बाद उन्हें वास्तविकता का पता चला। परिवार की मथुरा में रहने वाली सबसे छोटी बहन ने भी वीडियो देखा और इसके बाद महेंद्र तक भाई की मौत की जानकारी पहुंची।
इसके बाद महेंद्र ने सोनीपत में वृद्ध आश्रम चलाने वाले आनंद से संपर्क किया। बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि जिस भाई को परिवार वर्षों पहले मृत मान चुका था, वह वास्तव में सोनीपत के वृद्धआश्रम में रह रहा था और वहीं उसकी मौत हुई। व्यापार अच्छा था, फिर आखिर वृद्ध आश्रम तक कैसे पहुंचे शिवचरण?:महेंद्र के मुताबिक, शिवचरण का कपड़ों का कारोबार कभी नेपाल, मुंबई और अन्य स्थानों पर अच्छा चल रहा था। परिवार के लिए यह बात समझ से परे है कि आखिर व्यापार में ऐसा क्या हुआ कि उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और वे वृद्ध आश्रम तक पहुंच गए।
महेंद्र ने कहा कि उन्हें यह तो बताया गया कि व्यापार में नुकसान के कारण शिवचरण वृद्ध आश्रम में पहुंचे थे, लेकिन नुकसान कितना हुआ, किस कारोबार में हुआ और परिस्थितियां किस तरह बिगड़ीं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। भतीजी की शादी में शामिल हुआ था पूरा परिवार: महेंद्र ने बताया कि शिवचरण की बड़ी बेटी निशा की शादी मुंबई में हुई थी। उस समय वे भी अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए मुंबई गए थे। परिवार के साथ उस समय उनका संपर्क था, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी बढ़ती चली गई।
उन्होंने बताया कि शिवचरण की बेटियों से भी उनका संपर्क रहा है। मौजूदा समय में उन्होंने अपनी भतीजी प्रिया से बातचीत की थी और भाई की मौत के बाद होने वाली क्रिया को लेकर भी बात हुई। प्रिया ने कहा- हम तेहरवीं करेंगे: महेंद्र ने बताया कि प्रिया से बातचीत के दौरान उसने कहा था कि परिवार की ओर से तेहरवीं की जाएगी। इस दौरान महेंद्र ने कहा कि परिवार में यह बात भी सामने आई कि जो नाती हवन में बैठेगा, उसी के हाथ से क्रिया-कर्म की प्रक्रिया पूरी होगी। हालांकि, भाई की अस्थियां लेकर हरिद्वार पहुंचने की जिम्मेदारी आखिरकार महेंद्र ने संभाली। वे अपने बेटे के साथ सोनीपत से मिले आनंद के कहने पर हरिद्वार पहुंचे और अब भाई की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करेंगे। मथुरा में रहने वाली बहन भाई की मौत की खबर सुनकर भावुक: महेंद्र ने बताया कि जब मथुरा में रहने वाली उनकी बहन को शिवचरण की मौत की जानकारी मिली तो वह बेहद भावुक हो गई। जिस भाई को परिवार ने वर्षों पहले खोया हुआ मान लिया था, उसकी मौत की खबर अचानक सामने आने से पुराने रिश्ते और यादें फिर ताजा हो गईं। महेंद्र के मुताबिक, परिवार को यह समझने में काफी समय लगा कि शिवचरण इतने वर्षों तक कहां रहे और उनकी जिंदगी किस परिस्थिति में गुजरी। बेटियों ने सोनीपत आने से जताया डर:महेंद्र ने बताया कि जब उन्होंने अपनी भतीजी से बातचीत की तो उसने सोनीपत आने को लेकर डर जाहिर किया था। देहांत के बाद वे आना चाहती थी लेकिन भतीजी ने कहा कि अगर वह सोनीपत जाएगी तो कहीं उसके साथ कोई अनहोनी न हो जाए। इसी डर और असमर्थता के कारण वह यहां नहीं पहुंच सकी। महेंद्र का कहना है कि बेटियों की अपनी परिस्थितियां हो सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आने में असमर्थता जताने के कारण परिवार की बेटियां शिवचरण के अंतिम संस्कार या अस्थि विसर्जन के लिए सोनीपत नहीं पहुंच सकीं। ‘शायद अब बेटियां क्रिया के बाद भी नहीं आएंगी’ महेंद्र ने आशंका जताई कि संभव है कि शिवचरण की बेटियां अब क्रिया-कर्म के बाद भी यहां न आएं। उन्होंने कहा कि परिवार के बीच लंबे समय से दूरी रही है और परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि भाई की मौत के बाद भी सभी लोग एक जगह एकत्र नहीं हो सके। महेंद्र के लिए यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी भावुक करने वाला है, क्योंकि जिस भाई की मौत की खबर उन्हें करीब 10 साल पहले नेपाल में आए भूकंप के दौरान मिली थी, उसकी अस्थियां वे अब खुद हरिद्वार लेकर पहुंचे हैं। 10 साल बाद भाई की अस्थियों के साथ हरिद्वार पहुंचा बड़ा भाई हरिद्वार में गंगा किनारे खड़े महेंद्र के सामने सिर्फ अपने भाई की अस्थियां नहीं हैं, बल्कि बीते करीब एक दशक की एक ऐसी कहानी है जिसमें संपर्क टूटना, नेपाल में मौत की खबर, कारोबार का खत्म होना, वृद्ध आश्रम में पहुंचना और फिर सोशल मीडिया के जरिए भाई की मौत का पता चलना शामिल है। अब महेंद्र अपने बेटे के साथ शिवचरण की अस्थियां गंगा में प्रवाहित की है। परिवार के लिए यह अंतिम विदाई हो गई।



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