संसद में सरकार बोली- E20 पेट्रोल से इंजन खराब नहीं:23 करोड़ गाड़ियां बिना परेशानी चल रहीं, पुरानी गाड़ियों का माइलेज मामूली गिरा




देश में 20% एथेनॉल मिला पेट्रोल यानी E20 फ्यूल से गाड़ियों के इंजन खराब होने या उनके अचानक बंद होने की कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। सरकार ने आज यानी 20 जुलाई को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देश भर में चल रहे 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के चलाने के अनुभवों और कई वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकला है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 फ्यूल से इंजन को नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। 20 करोड़ टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ कारें बिना किसी शिकायत के चल रहीं राज्यसभा में जानकारी देते हुए मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि देश में 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें वर्तमान में एथेनॉल मिश्रित ईंधन यानी पर चल रही हैं। इनमें एक बड़ी संख्या उन पुराने वाहनों की भी है, जिन्हें E20 सर्टिफिकेशन मिलने से पहले मैन्युफैक्चर किया गया था। इन सभी गाड़ियों के डेटा और सर्विस रिकॉर्ड देखने के बाद भी इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन फेल होने या किसी बड़े व्हीकल ब्रेकडाउन की कोई पुख्ता पुष्टि नहीं हुई है। बिना सोचे-समझे नहीं किया बदलाव सरकार ने सदन में बताया कि देश को E20 फ्यूल की तरफ ले जाने का फैसला अचानक नहीं हुआ है। यह पूरी तरह से चरणबद्ध और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित रहा है। साल 2013-14 में जहां पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग सिर्फ 1.53% थी, उसे साइंटिफिकली और सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ हर स्तर पर विचार-विमर्श के बाद ही साल 2025-26 तक बढ़ाकर 20% (E20) किया गया है। ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस डेटा से भी पुष्टि मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश की एक प्रमुख फोर-व्हीलर निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। चौंकाने वाली बात यह है कि इन गाड़ियों में 1.5 करोड़ ऐसे पुराने वाहन शामिल थे जो नॉन-E20 सर्टिफाइड थे यानी जिन्हें E20 फ्यूल के हिसाब से नहीं बनाया गया था। इसके बावजूद कंपनी के सर्विस रिकॉर्ड में E20 फ्यूल की वजह से गाड़ी को किसी भी तरह का नुकसान होने की एक भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। इसी तरह, देश की एक प्रमुख टू-व्हीलर निर्माता कंपनी के बड़े सर्विस डेटा में भी पहले के फ्यूल ब्लेंड की तुलना में E20 पर चलने वाले वाहनों में खराबी की कोई अलग घटना सामने नहीं आई है। माइलेज पर असर: पुरानी गाड़ियों में 3 से 5% की कमी संभव, पर मिलेंगे ये 4 बड़े फायदे फ्यूल एफिशिएंसी (माइलेज) के सवाल पर सरकार ने साफ किया कि किसी भी गाड़ी का माइलेज ड्राइविंग कंडीशन, ड्राइवर की आदतों और गाड़ी के मेंटेनेंस पर निर्भर करता है। हालांकि, सरकार ने स्वीकार किया कि E10 (10% इथेनॉल) के लिए डिजाइन की गई कुछ पुरानी गाड़ियों में माइलेज में करीब 3% से 5% तक की मामूली कमी आ सकती है। लेकिन इसके बदले E20 फ्यूल वाहन और पर्यावरण को कई फायदे देता है: फिलहाल 20% से ज्यादा ब्लेंडिंग का कोई फैसला नहीं राज्यसभा में जब मंत्री से पूछा गया कि क्या भविष्य में इथेनॉल ब्लेंडिंग को 20% से आगे बढ़ाया जाएगा, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आगे का कोई भी फैसला ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और रिसर्च संस्थानों के साथ गहन तकनीकी स्टडी के बाद ही लिया जाएगा।



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