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दुनिया इस समय बेहद ताकतवर अल नीनो का सामना कर रही है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से 3.4°C ज्यादा पहुंच गया है। यह 1950 के बाद का सबसे मजबूत अल नीनो बताया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ कह रहे हैं। इससे दुनिया के कई हिस्सों में ज्यादा गर्मी, सूखा या भारी बारिश हो सकती है। शिकागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस अल नीनो से जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। ज्यादा गर्मी से हीट स्ट्रोक और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वहीं बारिश का पैटर्न बिगड़ने से कहीं पानी की कमी तो कहीं बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। नक्शे में धरती का ज्यादातर हिस्सा लाल दिखा मौसम विज्ञानी रयान माउ ने पूरी दुनिया का एक जलवायु नक्शा सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसमें धरती का बड़ा हिस्सा लाल रंग में दिखाई दे रहा है, जो सामान्य से ज्यादा गर्म परिस्थितियों को दिखाता है। माउ के मुताबिक, अल नीनो सर्दियों में भी ‘अधिकतम ताकत’ के साथ बना रह सकता है। उन्होंने इसके फरवरी 2027 तक जारी रहने के WMO के अनुमान से भी सहमति जताई है। WMO ने जलवायु परिवर्तन को लेकर चेताया संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, 2026 के आखिरी महीनों में दुनिया के बड़े हिस्से में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ऊपर रहने की बहुत ज्यादा संभावना है। जलवायु वैज्ञानिक जीक हाउसफादर ने कहा कि इस साल का अल नीनो ऐसे स्तर की ओर बढ़ रहा है, जो पहले दर्ज नहीं किया गया। वहीं मौसम विशेषज्ञ लियोन सिमंस ने इसे ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ कहा है। अल नीनो क्या है अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) दुनिया के मौसम को प्रभावित करने वाला प्राकृतिक जलवायु चक्र है। अल नीनो इसका गर्म चरण है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इस बदलाव का असर प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तापमान और बारिश का पैटर्न बदल सकता है। कहीं सूखे की स्थिति बन सकती है तो कहीं सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है। अल नीनो आमतौर पर 2 से 7 साल के अंतराल पर आता है।
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76 साल में सबसे ज्यादा गर्म हुआ प्रशांत महासागर:सुपर अल नीनो से धरती पूरी लाल; 4.5 लाख मौतों की वजह बन सकता है