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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पूर्व अमेरिकी सैनिक निदाल हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने का आदेश दिया है। पेंटागन ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था में 1961 के बाद यह पहली बार होगा जब किसी पूर्व सैनिक को मौत की सजा दी जा रही है। हसन ने 2009 में टेक्सास के सैन्य अड्डे पर धार्मिक नारा लगाते हुए गोलीबारी की थी, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी। 2009 में फोर्ट हुड में की थी गोलीबारी 5 नवंबर 2009 को सेना के मनोचिकित्सक मेजर निदाल हसन फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर एक निजी पिस्तौल लेकर पहुंचा था। उसने सैनिकों और दूसरे लोगों पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में 13 लोगों की मौत के साथ 32 लोग घायल हुए थे। यह अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुई सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी थी। हमले के समय अमेरिका अफगानिस्तान और इराक में युद्ध लड़ रहा था। हसन ने बाद में कहा था कि उसने इन युद्धों को गैरकानूनी और अनैतिक माना था और जिहाद के लिए हमला किया था। गोलीबारी के दौरान हसन को भी गोली लगी थी। इससे उसकी कमर के नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया। उसने सैन्य अदालत में हत्याओं की बात स्वीकार की थी। 2013 में उसे पहले से हत्या की योजना बनाने और हत्या की कोशिश के कुल 45 मामलों में दोषी ठहराया गया। खुद को शहीद मानता था हसन को कंसास के फोर्ट लीवेनवर्थ में सैन्य डेथ रो में रखा गया है। उसने अपने किए पर कोई पछतावा नहीं जताया था। सैन्य मानसिक स्वास्थ्य पैनल के सामने उसने कहा था कि वह चाहता था कि हमले में उसकी भी मौत हो जाती, ताकि वह शहीद बन सके। उसने यह भी कहा था कि अगर उसे मौत की सजा दी गई तो भी वह खुद को शहीद मानेगा। हमले से पहले कट्टर हुए थे धार्मिक विचार मेजर हसन का जन्म वर्जीनिया के अर्लिंगटन में फिलिस्तीनी मूल के मुस्लिम माता-पिता के घर हुआ था। उसने वर्जीनिया टेक में पढ़ाई की और 1997 में सैन्य मेडिकल स्कूल की ट्रेनिंग शुरू की। हमले से पहले के कुछ सालों में इस्लाम को लेकर उसके विचार कट्टर होते गए थे। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने अपने बयान में हसन के जिहादी मकसद का जिक्र करते हुए उसे ‘दोषी आतंकवादी’ बताया। हालांकि, हसन पर आतंकवाद से जुड़ी धाराओं में मुकदमा नहीं चलाया गया था। सेना ने जानबूझकर उस पर आतंकवाद से जुड़े आरोप नहीं लगाए थे।
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अमेरिकी सैनिक को गोली मारकर मौत की सजा दी जाएगी:65 साल में पहला ऐसा मामला; धार्मिक नारा लगाकर 13 लोगों को मार दिया था