18 मिनट पहले
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हमले के बाद तेल टैंकर पर आग लग गई। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
रूस के पास ब्लैक सी में मंगलवार को लाइबेरिया के झंडे वाले तेल टैंकर में आग लग गई। टैंकर पर 23 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। हमले के बाद इमरजेंसी टीमों ने सभी का रेस्कयू किया।
रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, टैंकर पर यूक्रेन की ओर से आए ड्रोन से हमला हुआ था। हमले के बाद जहाज में आग लगी और समुद्र में कच्चा तेल जलता दिखाई दिया।
लगातार हमलों से ब्लैक सी का समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। जहाज मालिक इस रूट पर जाने से बच रहे हैं और माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है।
अगस्त में रूस का अनाज निर्यात 59 लाख टन से घटकर 17 लाख टन रह गया था, यानी 71% गिरावट। सितंबर में भी निर्यात करीब 50% घटकर 24.5 लाख टन रहने का अनुमान है।
हमले के बाद की तस्वीरें…
अफ्रामैक्स रियो रूस के काला सागर क्षेत्र में सोची के तट से करीब 15 किलोमीटर दूर था।

जहाज से उठती तेज आग और काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था।
यह लाइबेरिया के झंडे वाला कच्चे तेल का टैंकर है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, इसकी लंबाई करीब 247 मीटर है।
तेज आग के कारण बचाव दल नहीं पहुंच पा रहा था
हमले से पहले मरीनट्रैफिक ने जहाज की आखिरी लोकेशन काला सागर में रूस-जॉर्जिया सीमा के पास बताई थी।
रूस के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक तेज आग की के कारण दमकलकर्मी शुरुआत में जहाज के पास नहीं पहुंच पा रहे थे।
मंत्रालय ने बाद में कहा कि आग की तीव्रता घटने के बाद इमरजेंसी टीमों के पास इसे नियंत्रित करने के पर्याप्त साधन थे।
जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में था
द कीव इंडिपेंडेंट के मुताबिक, यह जहाज यूक्रेन की प्रतिबंध सूची में शामिल था। इसे रूस के कथित शैडो फ्लीट का हिस्सा बताया गया था।
रूस का शैडो फ्लीट उन टैंकरों और जहाजों का नेटवर्क है, जिनका इस्तेमाल रूस पश्चिमी प्रतिबंधों से बचकर तेल समेत दूसरे सामान के निर्यात में करता है।
यूक्रेन ने फरवरी में जहाज पर प्रतिबंध लगाए थे। उसका कहना था कि इस नेटवर्क के जहाज रूस को जरूरी ऊर्जा आय बनाए रखने में मदद करते हैं। इसी आय से रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध को फंड करता है।
