इस्लामाबाद 5 मिनट पहलेलेखक: इस्लामाबाद से भास्कर रिपोर्टर यासिर आलम
- कॉपी लिंक

खैबर पख्तूनख्वा के CM सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर इस्लामाबाद मार्च जारी है।
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर हालात बिगड़ते जा रहे हैं। इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च अब पेशावर से महज 30 किलोमीटर दूर पहुंच गया है।
मार्च को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को इमरान समर्थकों को बातचीत का न्योता दिया। शहबाज का यह बयान इसलिए अहम है, क्योंकि सोमवार को ही उनकी सरकार ने इमरान समर्थकों से बातचीत करने से इनकार किया था।
हालांकि, इमरान समर्थकों ने शहबाज के बातचीत के प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि वे इमरान खान की रिहाई की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।

मार्च की तस्वीरें…

लक्की मारवत में सड़क पर कई किलोमीटर तक सिर्फ लोगों की भीड़ नजर आई।

हाथों में PTI के झंडे और इमरान के पोस्टर लेकर समर्थकों ने बस, ट्रक, कार, मोटरसाइकिल और रिक्शा से इस्लामाबाद की ओर कूच किया।

लक्की मारवत में लॉन्ग मार्च शुरू होते ही लोगों ने सफेद कपड़े और PTI के झंडे लहराए।
इमरान 2023 से जेल में बंद, पत्नी-बहनें भी कैद हैं
इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों ने 4 अक्टूबर को यह मार्च शुरू किया था। यह प्रदर्शन पहले 27 सितंबर को होना था, लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया था।
73 साल के इमरान खान 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उन पर 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। तीन मामलों में सजा सुनाई गई है। अल कादिर ट्रस्ट केस में 14 साल, दस्तावेज लीक में 10 साल और तोशाखाना केस में 3 साल की सजा है। तोशाखाना केस में इमरान की पत्नी बुशरा भी जेल में है। सितंबर में इमरान की बहन अलीमा, उजमा और नूरीन को भी एहतियातन हिरासत में लिया गया है।
18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को मेडिकल जांच और इलाज के लिए इस्लामाबाद के निजी अस्पताल में शिफ्ट करने का आदेश दिया था। 20 अगस्त की रात उन्हें निजी अस्पताल की बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। जांच के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।
सरकार से दो दौर की बातचीत, पर सहमति नहीं बनी
सरकार और PTI के बीच शुक्रवार और शनिवार को दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी। PTI इमरान से तत्काल मुलाकात और उन्हें ऐसे अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग की, जहां उनके निजी डॉक्टर जांच और इलाज कर सकें। सरकार की ओर से प्रदर्शन रद्द करने की शर्त रखी गई थी।

मार्च इस्लामाबाद से पहले रोकने की तैयारी
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने घोषणा की कि मार्च जारी रहेगा। टैंक, डेरा इस्माइल खान, दक्षिण वजीरिस्तान, उत्तर वजीरिस्तान, बन्नू और लक्की मारवत के समर्थक गांधी चौक से मार्च में शामिल हुए।
काफिला करक, कोहाट और पेशावर होते हुए आगे बढ़ेगा। 7 अक्टूबर को पेशावर और 8 अक्टूबर को चरसद्दा व मोहम्मंद के समर्थक जुड़ेंगे।
प्रधानमंत्री शरीफ के राजनीतिक सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी की ओर जाने वाली सड़कों पर अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए हैं।

इस्लामाबाद में प्रदर्शन रोकने के लिए रास्ते पर शिपिंग कंटेनर रखे गए हैं।
मार्च और बढ़ा तो शहबाज की कुर्सी खतरे में आएगी
पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग में नियुक्त रहे अविनाश मोहनानी ने बताया कि इमरान समर्थकों का लॉन्ग मार्च खैबर से पंजाब में दाखिल होते ही शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। व्यापक समर्थन मिला तो आर्मी चीफ मुनीर के लिए भी इसे रोकना मुश्किल होगा।
इसलिए मार्च को दबाने की कोशिश तेज है। इमरान की लोकप्रियता अब भी कायम है और उनकी रिहाई की चाबी मुनीर के पास है।
हालांकि सीनियर फैलो और राजनीतिक विश्लेषक सुशांत सरीन के मुताबिक, आसिम मुनीर लॉन्ग मार्च के बहाने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को घेर रहे हैं।
सरीन के मुताबिक, पहले मुनीर ने मार्च के रास्ते में खैबर में फ्रंटियर फोर्स को तैनात किया। इसके बाद मंगलवार को शहबाज से इमरान समर्थकों को बातचीत के लिए बुलाने को कहा गया।
उनका कहना है कि मुनीर की रणनीति शहबाज को एक कमजोर प्रधानमंत्री के तौर पर पेश करने की है। इससे लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ सकता है। पाकिस्तान की राजनीति के इतिहास को देखते हुए शहबाज का सत्ता से जाना तय माना जा रहा है।
—————————
यह खबर भी पढ़ें…
पाकिस्तान का ड्रोन हमलों से बचने के लिए सस्ता तरीका:सेना-पुलिस के ठिकानों पर मछली पकड़ने वाला जाल लगा रहे, दावा- इसमें ड्रोन फंसकर फट जाएंगे

पाकिस्तान में ड्रोन हमलों से बचने के लिए पुलिस और सेना अब मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है। अल जजीरा के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर ये जाल लगाए जा रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
