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स्पोर्ट्स डेस्क18 मिनट पहले
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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 39 मेडल जीतकर चौथा स्थान हासिल किया। वेटलिफ्टर मीराबाई चानू लगातार तीसरा गोल्ड जीतने के बाद राष्ट्रगान सुनकर रो पड़ीं।
जेवलिन में नीरज चोपड़ा को सिल्वर मिला। रनर गुलवीर सिंह ने ट्रैक एंड फील्ड में दो मेडल जीतकर इतिहास रचा। दूसरी ओर लवलीना बोरगोहेन का बॉक्सिंग में मेडल गेम्स शुरू होने से पहले ही पक्का हो गया।
पढिए ऐसे ही 10 यादगार मोमेंट्स…
1. मीराबाई गोल्ड जीतने के बाद रो पड़ीं
भारत के सबसे भावुक पलों में से एक मीराबाई चानू का मेडल इवेंट रहा। वेटलिफ्टिंग में गोल्ड जीतने के बाद जब राष्ट्रगान बजा तो हमेशा मुस्कुराती दिखने वाली मीराबाई रो पड़ीं।

मीराबाई चानू ने 48kg में गोल्ड जीता। मेडल इवेंट में वे रो पड़ीं।
2. तेजस्विन शंकर ने चोट में भी रचा इतिहास
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलन में भारत का पहला कॉमनवेल्थ मेडल जीता। उन्होंने चोटिल घुटने के बावजूद 10 इवेंट्स में हिस्सा लिया। कुछ मौकों पर उन्होंने कोचिंग का काम भी किया। वे साथी खिलाड़ियों को सलाह देते भी नजर आए।

तेजस्विन शंकर ने डेकाथलन में ब्रॉन्ज जीता। उन्हें हाई जंप में चोट लगी थी।
3. अस्मिता डे ने दिलाया जूडो का पहला गोल्ड
त्रिपुरा की अस्मिता डे ने भारत को कॉमनवेल्थ इतिहास का पहला जूडो गोल्ड दिलाया। फाइनल में पिछड़ने के बाद उन्होंने शानदार वापसी की। आर्थिक संघर्षों से निकलकर गोल्ड जीतने वाली अस्मिता ग्लासगो की सबसे इंस्पायर कहानियों में शामिल रहीं।

अस्मिता डे ने जूडो के विमेंस 48kg में गोल्ड जीता।
4. नीरज से ज्यादा चर्चा यशवीर की हुई
जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता, लेकिन सबसे बड़ा सरप्राइज यशवीर सिंह रहे। आखिरी थ्रो से पहले वे आठवें स्थान पर थे। छठे थ्रो में उन्होंने 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन किया और ब्रॉन्ज जीत लिया।

नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह ने जेवलिन में मेडल जीता।
5. गुलवीर सिंह का डबल पोडियम
गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर में सिल्वर और 5 हजार मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज जीतकर भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया। ऐसा पहली बार हुआ कि किसी भारतीय ने ट्रैक एंड फील्ड में दो मेडल जीते।

गुलवीर सिंह ने 10 हजार मीटर में सिल्वर और 5 हजार मीटर दौड़ में ब्रॉन्ज जीता।
6. लवलीना का बिना खेले पक्का हुआ मेडल
कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले ही महिला 75 किलो वर्ग में सिर्फ पांच मुक्केबाज थीं। ऐसे में लवलीना बोरगेहेन सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गईं और उनका मेडल पक्का हो गया। उन्होंने सिर्फ दो मुकाबले खेले। एक जीता और एक हारा, लेकिन सिल्वर अपने नाम कर लिया। यह भारत के सबसे अनोखे मेडल्स में से एक रहा।

लवलीना बोरगेहेन ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
7. प्रवीण चित्रावेल ने चार साल पुराना हिसाब बराबर किया
ट्रिपल जम्पर प्रवीण चित्रावेल 2022 में सिर्फ 3 सेंटीमीटर से मेडल से चूक गए थे। इस बार उन्होंने 16.58 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर जीत लिया और चार साल पुराना हिसाब बराबर कर दिया।

ट्रिपल जम्पर प्रवीण चित्रावेल ने सिल्वर जीता।
8. 5 महिला बॉक्सरों ने गोल्ड जीता
भारत की 6 में से पांच महिला बॉक्सर गोल्ड जीतने में सफल रहीं। साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मिन लांबोरिया, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने मेडल जीते। ऐसा पहली बार हुआ जब एक ही कॉमनवेल्थ में 5 बॉक्सर को मेडल मिले। मेंस और विमेंस मिलाकर 10 मुक्केबाजों ने फाइनल खेला। 7 को गोल्ड, 3 ने सिल्वर जीता।

भारत की 5 महिला बॉक्सर ने गोल्ड जीता।
9. पैरा एथलेटिक्स के तीन डबल पोडियम
भारत ने पैरा एथलेटिक्स में तीन बार डबल पोडियम हासिल किया। यानी 3 बार एक ही इवेंट में दो प्लेयर्स ने मेडल जीते। विमेंस शॉटपुट में शार्मिला धनखड़ ने गोल्ड और शिल्पा शायला ने ब्रॉन्ज जीता। 100 मीटर दौड़ में दिलीप गावित ने गोल्ड और मोहम्मद बासिल ने सिल्वर हासिल किया। मेंस शॉटपुट में सोमन राणा को गोल्ड और शुभम जुयाल को सिल्वर मिला।

पैरा एथलेटिक्स में भारत को 6 मेडल मिले।
10. झंडू कुमार ने पहला मेडल दिलाया
भारत का पहला मेडल पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने दिलाया। पोलियो से प्रभावित झंडू कभी सब्जियां बेचते थे और ई-रिक्शा चलाते थे। ट्रेनिंग जारी रखने के लिए उन्होंने अपना रिक्शा तक बेच दिया था।

पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला मेडल दिलाया।
