वॉशिंगटन डीसी8 मिनट पहले
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मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद जुकरबर्ग ने ट्रम्प से रिश्ते सुधार लिए हैं। अब जुकरबर्ग का प्रभाव AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े फैसलों में भी दिख रहा है। AI सुरक्षा समझौते का मसौदा तैयार करने में उनका बड़ा रोल है।
2011 में फेसबुक हेडक्वार्टर में हुई एक टाउन हॉल मीटिंग के दौरान पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा मार्क जुकरबर्ग से बातचीत करते हुए।
जुकरबर्ग ने ट्रम्प से बिगड़े रिश्ते कैसे सुधारे
2021 में अमेरिकी संसद पर हमले के बाद फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प के अकाउंट्स पर रोक लगा दी थी। कंपनी को आशंका थी कि ट्रम्प की पोस्ट से हिंसा और बढ़ सकती है। इस फैसले से ट्रम्प नाराज हो गए। उन्होंने जुकरबर्ग पर अपने खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें उम्रकैद तक की धमकी दी।
दोनों के रिश्ते सुधरने की शुरुआत जुलाई 2024 में हुई। पेंसिल्वेनिया की एक चुनावी रैली में ट्रम्प पर जानलेवा हमला हुआ। इस घटना के बाद जुकरबर्ग ने कहा कि गोली लगने के बाद ट्रम्प का उठकर हाथ लहराना उनके जीवन में देखी गई सबसे शानदार चीजों में से एक था।
जुकरबर्ग की इस तारीफ के कुछ हफ्ते बाद ट्रम्प ने भी उनके प्रति नरम रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि अब वे जुकरबर्ग को पहले से ज्यादा पसंद करते हैं।
13 जुलाई 2024 को पेंसिल्वेनिया में चुनावी रैली के दौरान गोली लगने के बाद सुरक्षाकर्मी ट्रम्प को सुरक्षित ले जाते हुए।
ट्रम्प के करीब आने के लिए क्या-क्या किया?
ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद जुकरबर्ग ने उनसे रिश्ते सुधारने के लिए कई कदम उठाए।
- ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के लिए दान: मेटा ने 10 लाख डॉलर दिए। जुकरबर्ग को समारोह में दूसरे बड़े उद्योगपतियों के साथ प्रमुख जगह मिली।
- ट्रम्प के मुकदमे का समझौता: मेटा ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर रोक लगाए जाने से जुड़े मुकदमे को खत्म करने के लिए करीब 2.5 करोड़ डॉलर देने पर सहमति जताई।
- कंपनी में नई नियुक्तियां: जुकरबर्ग ने रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े जोएल कपलान को मेटा में अहम जिम्मेदारी दी। बाद में ट्रम्प प्रशासन की पूर्व अधिकारी डीना पॉवेल मैककॉर्मिक को भी कंपनी का अध्यक्ष बनाया।
- सोशल मीडिया के नियमों में बदलाव: मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की जाने वाली चीजों की निगरानी से जुड़ी नीतियों में बदलाव किए। रिपब्लिकन नेताओं का आरोप था कि कंपनी उनके विचारों को दबाती है।
AI पर हुई बैठक के बाद एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मार्क जुकरबर्ग ने ट्रम्प के साथ बात की।
ट्रम्प से नजदीकी का जुकरबर्ग को फायदा मिला
ट्रम्प और जुकरबर्ग की बढ़ती नजदीकी का असर सरकारी फैसलों पर भी दिख रहा है। जुकरबर्ग ने एनवीडिया के CEO जेंसन हुआंग के साथ मिलकर AI सुरक्षा समझौते का शुरुआती मसौदा तैयार किया।
पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस में ट्रम्प और टेक कंपनियों के प्रमुखों की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया गया।
समझौते का मकसद AI के लिए मानक तय करना, उन्हें लागू करना और उनकी जांच कराना है। जुकरबर्ग का मानना है कि AI की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को तकनीकी सुधारों से दूर किया जा सकता है।
हालांकि, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और इसमें कंपनियों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं है।
राष्ट्रपति ट्रम्प व्हाइट हाउस में AI के बारे में एक मीटिंग के दौरान बोलते हुए। तस्वीर 29 सितंबर की है। ट्रम्प के साथ जुकरबर्क, जेंसन हुआंग, इलॉन मस्क, सुंदर पिचाई भी नजर आ रहे हैं।
ट्रम्प से दोस्ती आगे चलकर भारी भी पड़ सकती है
CNN के मुताबिक जुकरबर्ग को ट्रम्प के करीब आने का फायदा मिल रहा है, लेकिन इसके नुकसान भी हो सकते हैं। अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी को अमेरिकी संसद में बहुमत मिलता है या 2028 में उसका राष्ट्रपति बनता है, तो मेटा को कड़े सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
पिछले महीने डेमोक्रेटिक सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने मेटा को लैटर लिखकर पूछा कि कंपनी ने रिपब्लिकन संगठनों और ट्रम्प की पसंदीदा परियोजनाओं को कितना पैसा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेटा ने ट्रम्प को खुश रखने के लिए भारी रकम खर्च की और अब उसे इसका फायदा मिल रहा है।
ट्रम्प के कुछ पुराने सहयोगी भी जुकरबर्ग पर भरोसा नहीं करते। उन्हें लगता है कि जुकरबर्ग की बदली हुई राजनीति के पीछे कोई विचारधारा नहीं, बल्कि अपनी कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश है।
यानी जुकरबर्ग ने कभी जिस ट्रम्प से टकराव मोल लिया था, आज उसी के साथ मिलकर AI के भविष्य से जुड़े फैसलों में भूमिका निभा रहे हैं। लेकिन यह दोस्ती कितनी टिकेगी, इसका फैसला आने वाले चुनाव और अमेरिकी राजनीति का रुख करेगा।
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