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Nobel Prize 2026 Medicine Announcement


3 मिनट पहले

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2026 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा आज से शुरू हो रही है। सबसे पहले चिकित्सा यानी मेडिसिन के क्षेत्र के विजेता का नाम सामने आएगा।

स्वीडन के स्टॉकहोम स्थित कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट की नोबेल असेंबली कुछ ही देर में इस साल के विजेता या विजेताओं का ऐलान करेगी।

यह पुरस्कार ऐसे वैज्ञानिकों को दिया जाता है, जिन्होंने मानव स्वास्थ्य और बीमारियों को समझने, उनके इलाज या चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया हो।

GLP-1 को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा

नोबेल समिति पहले से यह नहीं बताती कि किन लोगों को पुरस्कार के लिए चुना गया है। हालांकि इस साल मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार के लिए GLP-1 पर हुए शोध को सबसे ज्यादा चर्चा मिल रही है।

यह वही हार्मोन है, जिस पर आधारित दवाओं ने मोटापा और डायबिटीज के इलाज में बड़ा बदलाव किया है। ओजेम्पिक और वेगोवी जैसी दवाएं इसी शोध से जुड़ी हैं।

इसके अलावा कैंसर के इलाज, जीन एडिटिंग, इम्यून सिस्टम और उम्र बढ़ने से जुड़ी बीमारियों पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के नाम भी चर्चा में हैं।

5 वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में

1. स्वेतलाना मोइसोव: वजन घटाने वाली दवाओं की नींव

स्वेतलाना मोइसोव का नाम जीएलपी-1 हार्मोन की खोज और उसके काम को समझने से जुड़ा है। उनकी रिसर्च ने यह पता लगाने में मदद की कि जीएलपी-1 का कौन सा हिस्सा शरीर में सबसे ज्यादा असर करता है।

जीएलपी-1 शरीर में शुगर और भूख को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसी शोध ने आगे चलकर ऐसी दवाओं का रास्ता खोला, जिनका इस्तेमाल मोटापे और डायबिटीज के इलाज में किया जा रहा है। मोइसोव के साथ डैनियल ड्रकर और जेन्स जूल होल्स्ट के नाम भी इसी काम के लिए लगातार चर्चा में हैं।

2. डैनियल ड्रकर: जीएलपी-1 को इलाज तक पहुंचाने वाला शोध

डैनियल ड्रकर ने जीएलपी-1 के शरीर पर होने वाले असर को समझने में अहम काम किया। उनकी रिसर्च से यह समझने में मदद मिली कि यह हार्मोन इंसुलिन, ब्लड शुगर और भूख को कैसे प्रभावित करता है।

उनके काम ने जीएलपी-1 को केवल एक हार्मोन की खोज से आगे बढ़ाकर डायबिटीज और मोटापे के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं की दिशा में पहुंचाने में मदद की। इसी वजह से उनका नाम भी इस साल की चर्चाओं में है।

3. डेविड लियू: डीएनए में सटीक बदलाव

डेविड लियू का नाम जीन एडिटिंग के क्षेत्र में उनके काम के कारण चर्चा में है। उन्होंने ऐसी तकनीक विकसित की, जिससे डीएनए में मौजूद किसी खास हिस्से को ज्यादा सटीक तरीके से बदला जा सकता है।

उनकी बनाई बेस एडिटिंग और प्राइम एडिटिंग तकनीकों का मकसद डीएनए में होने वाले गलत बदलावों को ठीक करना है। इन तकनीकों पर आनुवंशिक बीमारियों के इलाज के लिए काम चल रहा है।

हालांकि डेविड लियू का नाम मेडिसिन के साथ-साथ केमिस्ट्री नोबेल की चर्चाओं में भी आता है। क्लैरिवेट ने उन्हें 2026 की केमिस्ट्री श्रेणी के साइटेशन लॉरेट में शामिल किया है। इसलिए उन्हें केवल मेडिसिन के दावेदार के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा।

4. डेनिस स्लैमोन: कैंसर की दवा

डेनिस स्लैमोन ने स्तन कैंसर में HER2 नाम के एक जीन की भूमिका को समझने में अहम काम किया। इसके बाद उनके शोध और क्लिनिकल ट्रायल से हर्सेप्टिन जैसी लक्षित दवा के विकास का रास्ता खुला। यह दवा खास तरह के स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होती है और इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाई।

5. टिमोथी स्प्रिंगर: ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में

स्प्रिंगर ने यह समझने में अहम काम किया कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं एक-दूसरे को कैसे पहचानती हैं और आपस में कैसे जुड़ती हैं।

उनके शोध से ऐसी दवाएं बनाने में मदद मिली, जिनका इस्तेमाल कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में किया जाता है। ऑटोइम्यून बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही शरीर पर हमला करने लगती है।

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